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दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे पर फिर उभरीं खामियां, नई सड़क पर धंसी सतह ने बढ़ाई चिंता

 

नई दिल्ली/देहरादून। करीब तीन माह पहले शुरू किए गए दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे पर एक बार फिर सड़क की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। उत्तर प्रदेश के शामली जिले के पास एक्सप्रेसवे के एक हिस्से में सड़क की सतह धंसने और नई क्षति सामने आने के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने मामले की जांच तेज कर दी है।

NHAI का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह पाया गया है कि संबंधित स्थान पर भारी वर्षा के दौरान जल निकासी (ड्रेनेज) बाधित रही। एजेंसी के अनुसार कुछ स्थानीय लोगों द्वारा अनधिकृत खुदाई किए जाने से क्रॉस-ड्रेनेज व्यवस्था प्रभावित हुई, जिससे पानी जमा हुआ और सड़क की सब-ग्रेड पर दबाव बढ़ने से सतह धंस गई। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

घटना के बाद NHAI ने संबंधित परियोजना निदेशक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है, कुछ अधिकारियों को निलंबित किया है तथा इंजीनियर और निर्माण एजेंसी के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की है।

पहले भी सामने आ चुकी हैं समस्याएं
यह पहला अवसर नहीं है जब इस महत्वाकांक्षी एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता पर सवाल उठे हों। कुछ दिन पहले ही पहली तेज बारिश के बाद सड़क पर बड़े गड्ढे बनने और कई स्थानों पर सतह क्षतिग्रस्त होने की खबरें सामने आई थीं। वाहन चालकों ने दावा किया था कि कई गड्ढे इतने गहरे थे कि उनसे दुर्घटना का खतरा पैदा हो गया था।

उत्तराखंड के लिए महत्वपूर्ण परियोजना
लगभग 210 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का उद्देश्य दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा समय को लगभग ढाई घंटे तक सीमित करना है। यह परियोजना उत्तराखंड के पर्यटन, चारधाम यात्रा, उद्योग और निवेश की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

विशेषज्ञों की राय
सड़क इंजीनियरों का मानना है कि किसी भी एक्सप्रेसवे में केवल मजबूत पेवमेंट पर्याप्त नहीं होता, बल्कि प्रभावी जल निकासी व्यवस्था उसकी दीर्घकालिक मजबूती का सबसे महत्वपूर्ण आधार होती है। यदि वर्षा का पानी समय पर नहीं निकलता तो वह सड़क की निचली परतों को कमजोर कर देता है, जिससे धंसाव और गड्ढे बनने की आशंका बढ़ जाती है।
यदि वास्तव में अनधिकृत खुदाई से ड्रेनेज व्यवस्था प्रभावित हुई है, तो यह स्थानीय निगरानी और परियोजना प्रबंधन दोनों की विफलता मानी जाएगी। वहीं यदि निर्माण गुणवत्ता में कमी सामने आती है, तो यह देश की महंगी आधारभूत संरचना परियोजनाओं की गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करेगा।
राजनीतिक और प्रशासनिक असर
इस घटना के बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार और NHAI पर निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए हैं, जबकि NHAI का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अतिरिक्त निगरानी की व्यवस्था की जा रही है। �
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे को देश की सबसे आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल एक्सप्रेसवे परियोजनाओं में गिना जाता है। ऐसे में उद्घाटन के कुछ ही महीनों के भीतर लगातार सामने आ रही तकनीकी खामियां निर्माण गुणवत्ता, निगरानी व्यवस्था और रखरखाव प्रणाली पर गंभीर बहस को जन्म दे रही हैं।

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