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आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन – विश्व की सबसे बड़ी डिजिटल स्वास्थ्य अवसंरचनाओं में से एक

The Ayushman Bharat Digital Mission has built one of the world’s largest digital health ecosystems, with over 104 crore health records linked to over 93 crore ABHA accounts. By eliminating paperwork and reducing waiting times, ABDM is seamlessly connecting patients to insurers, hospitals, and doctors on a single unified network.

 

-A PIB FEATUREEDITED BY USHA RAWAT-

भारत सबके लिए  स्वास्थ्य सुविधा की ओर लगातार बढ़ रहा है, जहाँ हर कोई बिना किसी आर्थिक कठिनाई के गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा सकता है।भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक मज़बूत डिजिटल आधार की ज़रूरत है। स्वास्थ्य सेवाओं को ज़्यादा आसानकुशल और सुलभ बनाने के लिए एक मज़बूत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना अनिवार्य है।

एक डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम:

  • मरीज़ों के रिकॉर्ड को सुरक्षित रूप से रखने में मदद करता है।
  • लोगों को स्वास्थ्य सेवा और बीमा प्रदाताओं से जोड़ता है।
  • यह स्वास्थ्य रिकॉर्ड्स को आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाने की सुविधा देता है, जिससे नागरिक देश भर में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन से जुड़े किसी भी स्वास्थ्य केंद्र पर अपने स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड्स को सुरक्षित रूप से देख और शेयर कर सकते हैं।
  • यह बिना पहचान वाले गोपनीय स्वास्थ्य डेटा तैयार करता है।

इस डेटा का उपयोग स्वास्थ्य योजना और सेवा वितरण में सुधार करने के साथ-साथ भारत के उभरते हुए कृत्रिम मेधा (एआई) इकोसिस्टम को मज़बूत करने के लिए किया जा सकता है। इस तरह की अवसंरचना के होने से बीमारी पर नज़र रखने, ​​निदान और स्वास्थ्य प्रबंधन के क्षेत्र में नए नवाचार की संभावना बनती है।

इसे ध्यान में रखते हुए, भारत सरकार ने एक एकीकृत और नागरिक-केंद्रित राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम विकसित करने के लिए सितंबर 2021 में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) की शुरुआत की।

एक एबीडीएम-सक्षम सॉफ्टवेयर का उपयोग करके, स्वास्थ्य केंद्र  आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाते (आभा) से जुड़े डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड बना सकते  हैं। इसके अलावा, वे मरीज की सहमति लेने के बाद उनके पिछले रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से देख सकते हैं और मरीज़ की ऐसी मंज़ूरी, जिसे कभी भी वापस लिया जा सके और जो एक तय समय के लिए हो, के ज़रिए डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड का आदान-प्रदान कर सकते हैं।

‘आभा’ ‘आधार’ की तरह एक विशिष्ट पहचान है, जो लोगों को सुरक्षित रूप से व्यापक स्वास्थ्य प्रणाली से जोड़ता है। यह मरीजों को डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँचने में मदद करता है। वे इस एक अंतर-संचालनीय नेटवर्क के माध्यम से अपने पूरे मेडिकल इतिहास को सुरक्षित रखते हुए बीमा कंपनियों, स्वास्थ्य सुविधाओं, डॉक्टरों और अन्य सेवाओं से जुड़ सकते हैं।

मई 2026 में हासिल की गई एक बड़ी उपलब्धि के तहत, अब 104 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड 93 करोड़ से भी ज़्यादा आभा‘  खातों से जुड़ चुके हैं। यह एक व्यवस्थित डिजिटल सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र की दिशा में अहम प्रगति है।

एबीडीएम: एक संपूर्ण डिजिटल स्वास्थ्य तंत्र

‘आभा’ के अलावा, एबीडीएम एक पूर्ण रूप से विकसित डिजिटल स्वास्थ्य तंत्र है। यह मरीजों को उनके मेडिकल रिकॉर्ड से जोड़ता है, बीमा कंपनियों को अस्पतालों से जोड़ता है, और सभी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को एक ही नेटवर्क पर लाता है।

  • आभा संख्या: 14 अंकों की  एक विशिष्ट स्वास्थ्य पहचान या संख्या जो आपकी सहमति से विभिन्न अस्पतालों, लैब, बीमा कंपनियों और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में आपके सभी स्वास्थ्य रिकॉर्ड को जोड़ती  है।
  • स्वास्थ्य व्यावसायिक पंजीयन: देश के सभी स्वास्थ्य पेशेवर डॉक्टरों से लेकर आयुष चिकित्सकों तक का पंजीयन, जो सत्यापित होते हैं और डिजिटल रूप से जुड़े हुए हैं।
  • स्वास्थ्य सुविधा रजिस्ट्री: सभी सरकारी और निजी स्वास्थ्य सुविधाओं—जैसे अस्पतालों, क्लीनिकों, लैब और फार्मेसियों का एक राष्ट्रीय पंजीकरण, जो सभी एक ही स्थान पर उपलब्ध हैं।
  • यूनिफाइड हेल्थ इंटरफेस: स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक खुला नेटवर्क—जैसे स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के लिए यूपीआई। इसके ज़रिए किसी भी ऐप से अपॉइंटमेंट बुक करें, डॉक्टरों से परामर्श लें और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं का पता लगा सकते हैं।
  • आरोग्य सेतु 2.0: यह डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं और एक व्यक्तिगत स्वास्थ्य रिकॉर्ड (पीएचआर) के लिए एक एकीकृत माध्यम के रूप में कार्य करता है, जिससे देश भर में डिजिटल स्वास्थ्य को अपनाने की रफ़्तार को तेज़ किया जा रहा है।

आरोग्य सेतु 2.0

मूल रूप से भारत के कोविड-19 ट्रेसिंग एप्लिकेशन (कोविड-19 संपर्क में आने वालों का पता लगाने वाला एप) के रूप में विकसित, आरोग्य सेतु को एबीडीएम के तहत नागरिकों के लिए एक व्यापक डिजिटल स्वास्थ्य एप्लिकेशन के रूप में बदल दिया गया है। यह डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं और एक व्यक्तिगत स्वास्थ्य रिकॉर्ड के लिए एक एकीकृत गेटवे के रूप में कार्य करता है, जो देश भर में डिजिटल स्वास्थ्य को अपनाने की गति को तेज़ कर रहा है।

‘आरोग्य सेतु’ 2.0 को 29 जून, 2026 को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा द्वारा एबीडीएम के तहत एक नए रूप और नागरिक-केंद्रित डिजिटल स्वास्थ्य एप्लिकेशन के रूप में शुरू किया गया था।

मुख्य विशेषताएं

  • एबीडीएम-सक्षम सेवाओं तक पहुँच: इसमें ‘आभा’ आईडी बनाना, स्वास्थ्य रिकॉर्ड का प्रबंधन करना और बिना किसी परेशानी के डिजिटल पंजीकरण के लिए ‘स्कैन और रजिस्टर’  जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
  • स्मार्ट रिपोर्ट्स: ये रिपोर्ट्स ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (ओसीआर) तकनीक पर आधारित हैं, जो डिजिटल दस्तावेजों को आसानी से पढ़ सकती हैं।
  • पारदर्शी कवरेज और क्लेम की जानकारी: इसके तहत एनएचसीएक्स के माध्यम से आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना वॉलेट और निजी बीमा के विवरण को देखा जा सकता है।
  • आपातकालीन देखभाल तक समय पर पहुँच: पास की स्वास्थ्य सुविधाओं का पता लगा सकते हैं और आपातकालीन देखभाल तक समय पर पहुँच के लिए ‘ई-रक्तकोष’ के माध्यम से रक्त की वास्तविक समय पर उपलब्धता देख सकते हैं।
  • एआई-संचालित स्वास्थ्य अंतर्दृष्टि: बायोमार्कर और आरोग्य प्रवृत्तियों के विश्लेषण के लिए अपने अपलोड किए गए रिकॉर्ड को एबीडीएम से जुड़े डेटा के साथ जोड़कर एआई-आधारित स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
  • संबद्ध और सुलभ इलाज के लिए यूएचआई के माध्यम से टेलीकंसल्टेशन (ऑनलाइन डॉक्टर परामर्श) और अस्पताल जाकर दिखाने, दोनों तरह के अपॉइंटमेंट बुक करने की सुविधा।
  • मरीज अपने स्वास्थ्य की निर्बाध रूप से निगरानी और प्रबंधन कर सकेंगे; जिसमें एकीकृत वाइटल्स (शारीरिक संकेतकों), व्यक्तिगत रिमाइंडर्स, लक्ष्य ट्रैकिंग और चलने के कदम, कैलोरी, हृदय गति व ग्लूकोज के स्तर को ट्रैक करने के लिए वियरेबल डिवाइस (फिटनेस बैंड/स्मार्टवॉच) को मिलाने की सुविधा शामिल है।
  • खुद को सूचित रखने और स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने के लिए ब्लॉग, आईईसी (सूचना, शिक्षा और संचार) सामग्री, वीडियो और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों (एफएक्यू) सहित आरोग्य संबंधी जानकारी तक पहुँच शामिल है। ।

 

एबीडीएम: ऑनलाइन अपॉइंटमेंट पंजीकरण के माध्यम से अस्पतालों में प्रतीक्षा के समय को कम करना

भारतीय स्वास्थ्य प्रबंधन अनुसंधान संस्थान (आईआईएचएमआर) द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, 2022 में एबीडीएम के तहत शुरू की गई राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण  की ‘स्कैन एंड शेयर’ सेवा ने मोबाइल तकनीक और क्यूआर कोड का उपयोग करके बाह्य रोगी (ओपीडी) पंजीकरण को काफी सरल और सुव्यवस्थित बना दिया है।

यह सेवा मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाओं में एक क्यूआर कोड स्कैन करके डिजिटल कतार टोकन जनरेट करने में सक्षम बनाती है, जिसमें उनके आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाते (आभा) से जनसांख्यिकीय विवरण सुरक्षित रूप से प्राप्त कर लिए जाते हैं और उन्हें उस स्वास्थ्य सुविधा के स्वास्थ्य सूचना तंत्र के साथ एकीकृत कर दिया जाता है।

आईआईएचएमआर के अध्ययन में पाया गया कि ‘स्कैन एंड शेयर’ सेवा ने मरीजों के प्रतीक्षा समय  को लगभग एक घंटे से घटाकर मात्र 2 से 5 मिनट कर दिया है। देश भर की स्वास्थ्य सुविधाओं में 23.21 करोड़ से अधिक आभा‘ से जुड़े टोकन जारी किए गए (18 जून, 2026 तक की स्थिति के अनुसार)।

सरकारी एजेंसियों, स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं और रोगी अधिकार समूहों के सहयोग से विकसित यह सेवा, डेटा सुरक्षा, गोपनीयता और अंतर-संचालनीयता  के स्थापित मानकों का कड़ाई से पालन करती है।

 

स्वास्थ्य पेशेवरों और सुविधाओं को एबीडीएम से जोड़ना

सभी स्वास्थ्य सुविधाएं—सरकारी और निजी एबीडीएम नेटवर्क में शामिल हो सकती हैं। इसमें अस्पताल, क्लिनिक, डायग्नोस्टिक प्रयोगशालाएं और इमेजिंग केंद्र, फार्मेसी आदि शामिल हैं। इस प्रणाली से जुड़ने के बाद, मरीज नेटवर्क के भीतर अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड को बिना किसी परेशानी के आपस में जोड़ सकते हैं। इस नेटवर्क से जुड़ने के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं को प्रतिपूर्ति दी जाती है और उन्हें अधिक अनुभव भी मिलता है। इसकी पंजीकरण प्रक्रिया बेहद सरल है और यह एबीडीएम की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

स्वास्थ्य सुविधा रजिस्ट्री :

स्वास्थ्य सुविधा रजिस्ट्री, एबीडीएम से जुड़ी सरकारी और निजी स्वास्थ्य सुविधाओं का एक व्यापक संग्रह है।

एक बार जब कोई स्वास्थ्य सुविधा इसमें पंजीकृत हो जाती है, तो मरीज उसे ‘आभा’  ऐप पर आसानी से खोज सकते हैं। यदि वे इलाज के लिए उस सुविधा (अस्पताल/क्लिनिक) में जाते हैं, तो उनके स्वास्थ्य रिकॉर्ड स्वचालित रूप से लिंक हो जाते हैं और मरीज की सहमति से उन्हें साझा किया जा सकता है। यदि वह स्वास्थ्य सुविधा राष्ट्रीय स्वास्थ्य दावा विनिमय‘ (एनएचसीएक्स) का उपयोग करती है, तो बीमा कवरेज भी इससे जुड़ जाता है। यह पूरी प्रक्रिया को बेहद सरल बना देता है। किसी स्वास्थ्य सेवा प्रदाता को खोजने और पहचान सत्यापित करने से लेकर बीमा दावों के निपटान और कतार के प्रबंधन तक।

डिजिटल स्वास्थ्य प्रोत्साहन योजना:

अधिक से अधिक स्वास्थ्य सुविधाओं को एबीडीएम से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से, सरकार ‘डिजिटल स्वास्थ्य प्रोत्साहन योजना’ चलाती है। स्वास्थ्य सुविधाओं को एबीडीएम इकोसिस्टम में शामिल होने के लिए इन माध्यमों से प्रोत्साहित किया जाता है:

  • सभी भागीदार स्वास्थ्य सुविधाओं को डिजिटलीकरण  पर आने वाले खर्च की प्रतिपूर्ति  दी जाती है।
  • मरीज के संपूर्ण स्वास्थ्य रिकॉर्ड को बिना किसी रुकावट के देखा जा सकता है, जिससे प्रशासनिक कार्य अधिक आसान हो जाता है।

अस्पताल और डिजिटल समाधान कंपनियाँ आपस में साझा किए जा सकने वाले डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड बनाने के लिए नकद प्रोत्साहन पाते हैं। डीएचआईएस के ज़रिए सार्वजनिक और निजी, दोनों क्षेत्रों की कंपनियों को प्रोत्साहित किया जाता है।

कौन पात्र है?

  • सभी स्वास्थ्य केंद्र जैसे कि क्लिनिक, नर्सिंग होम और अस्पताल, लैबोरेटरी/रेडियोलॉजी डायग्नोस्टिक सेंटर और फ़ार्मेसी
  • एबीडीएम-सक्षम डिजिटल समाधान देने वाली संस्थाएं (डिजिटल समाधान कंपनियां)।

इस योजना के तहत भुगतान की गई राशि (18 जून, 2026 तक):

  • अस्पताल: 107+ करोड़ रुपये
  • डायग्नोस्टिक्स/लैब/फ़ार्मेसी: 2.95 करोड़ रुपये
  • डिजिटल समाधान  कंपनियाँ: 26+ करोड़ रुपये

 

एबीडीएम स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक कुशल बना रहा है

डॉ. प्रवीन सिक्का ने गुरुग्राम स्थित अपनी फार्मेसी (दवा की दुकान) को एबीडीएम पर पंजीकृत किया, जिसमें लगभग 2 घंटे का समय लगा। उनका कहना है कि अब मरीज ‘आभा’  ऐप के माध्यम से अपने सभी स्वास्थ्य रिकॉर्ड एक ही स्थान पर सुरक्षित रख सकते हैं और उन तक पहुँच सकते हैं। डॉ. सिक्का को भी इससे सीधा लाभ मिल रहा है,  डीएचआईएस प्रोत्साहन योजना के तहत, एबीडीएम से लिंक होने वाले प्रत्येक स्वास्थ्य रिकॉर्ड के लिए उनकी फार्मेसी को वित्तीय प्रोत्साहन मिलता है।

 

ई-सुश्रुत@क्लिनिक हॉस्पिटल प्रबंधन सूचना प्रणाली:

जहाँ डॉ. सिक्का की फार्मेसी जैसी पहलकदमियां यह दर्शाती हैं कि कैसे व्यक्तिगत स्वास्थ्य सुविधाएं एबीडीएम के तहत डिजिटल स्वास्थ्य समाधानों को अपना रही हैं, वहीं सरकार ने छोटे क्लीनिकों के डिजिटलीकरण को सहायता देने के लिए एक विशेष समाधान  भी पेश किया है।

जून में शुरू किया गया ‘ई-सुश्रुत@क्लिनिक’ एक प्लग-एंड-प्ले (तुरंत इस्तेमाल के योग्य) और आसान हॉस्पिटल मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (एचएमआईएस) है, जिसे सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डेक) द्वारा विकसित किया गया है। यह प्लेटफॉर्म छोटे क्लीनिकों को एक किफायती और मानकीकृत तरीके से मरीजों के रिकॉर्ड डिजिटलीकरण और दैनिक प्रशासनिक कार्यों को सरल व सुव्यवस्थित करने में सक्षम बनाता है।

यह प्रणाली मरीज पंजीकरण, बिलिंग और रिपोर्टिंग सहित प्रमुख परिचालन प्रक्रियाओं  को स्वचालित  करती है। इस प्लेटफॉर्म तक पहुँच केवल तभी दी जाती है जब हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स रजिस्ट्री (एचपीआर) और हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री‘ (एचएफआर) के माध्यम से स्वास्थ्य पेशेवरों और सुविधाओं का सत्यापन  पूरा हो जाता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि केवल सत्यापित प्रदाता ही इस प्लेटफॉर्म का उपयोग कर सकें।

अब तक 2,200 से अधिक स्वास्थ्य सुविधाओं को इस प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा चुका हैजिसके माध्यम से 1,633 से अधिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड तैयार किए गए हैं। जहाँ ‘ई-सुश्रुत@क्लिनिक’ छोटे स्वास्थ्य केंद्रों में रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने के लिए एक मानकीकृत फ्रेमवर्क प्रदान करता है, वहीं अगला महत्वपूर्ण कदम यह सुनिश्चित करना है कि ये डिजिटल रिकॉर्ड व्यापक स्वास्थ्य वित्तपोषण और बीमा तंत्र के साथ बिना किसी रुकावट के एकीकृत हो सकें।

 

बीमा प्रदाताओं के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य दावा विनिमय (एनएचसीएक्स)

‘आभा’ न केवल मरीजों को उनके स्वास्थ्य डेटा को सुरक्षित रखने और साझा करने में मदद करता है,  बल्कि यह उनके स्वास्थ्य बीमा दावों के निपटान की प्रक्रिया को भी सरल और सुव्यवस्थित बनाता है। भारत में बढ़ते स्वास्थ्य बीमा दावों को देखते हुए, राष्ट्रीय स्वास्थ्य दावा विनिमय (एनएचसीएक्स) दावों के निपटान की उबाऊ और थकाऊ अवधि की जगह मरीजों के लिए एक मददगार समाधान साबित हो सकता है। यह दावों की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और गैर-संचारी रोगों  से पीड़ित उन मरीजों के अनुकूल भी बना सकता है, जिन्हें नियमित और निरंतर इलाज की आवश्यकता होती है।

एनएचसीएक्स भुगतानकर्ताओं, स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं, लाभार्थियों, नियामकों  और पर्यवेक्षकों के बीच दावों से संबंधित सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए एक डिजिटल मार्ग बनाता  है।

इस प्रणाली के कई लाभ हैं:

  1. यह निर्णयों में तेजी लाती है, अस्पताल से छुट्टी मिलने के समय को कम करती है, और अस्पताल के प्रशासनिक खर्चों में कटौती करती है।
  2. इसके परिणामस्वरूप बीमा दावों का निपटान  अधिक तेजी से होता है।
  3. मरीज़ अपने फ़ायदे, मेडिकल हिस्ट्री और मिलने वाली सुविधाओं को एक ही जगह पर देख सकते हैं।
  4. स्वास्थ्य सेवा प्रदाता (डॉक्टर/अस्पताल) मरीज की सहमति से उसके इलाज का पूरा इतिहास देख सकते हैं, जिससे बार-बार एक जैसे टेस्ट कराने की जरूरत नहीं पड़ती और इलाज से जुड़े फ़ैसले बेहतर होते हैं।
  5. बीमा कंपनियाँ बेहतर फ़ैसले ले सकती हैं और नए बीमा कर सकती हैं।
  6. चूंकि मरीज एक ही प्लेटफॉर्म पर अपने हर दावे को ट्रैक कर सकते हैं, इसलिए उनकी आर्थिक सुरक्षा, योजना और सेहत से जुड़े नतीजों में सुधार होता है।

एकीकृत स्वास्थ्य इंटरफ़ेस (यूएचआई)

 

परंपरागत रूप से, मरीज़ और स्वास्थ्य सेवा प्रदाता तभी आपस में बातचीत कर सकते थे जब वे एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे हों। यूएचआई इस बाधा को दूर करता है, जिससे यूएचआई-सक्षम एप्लिकेशन का उपयोग करने वाला कोई भी मरीज़, प्रदाता द्वारा उपयोग किए जा रहे एप्लिकेशन की परवाह किए बिना, किसी भी सत्यापित स्वास्थ्य सेवा प्रदाता को खोज सकता है, उससे जुड़ सकता है और उसके साथ लेन-देन कर सकता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) द्वारा संचालित एक सामान्य गेटवे के माध्यम से अनुरोध भेजे जाते हैं, जो मरीज़ों को उनके ‘आभा’ विवरण का उपयोग करके प्रमाणित करता है, जबकि स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं और सुविधाओं का सत्यापन एचपीआर और एचएफआर रजिस्टरों के माध्यम से किया जाता है।

यूएचआई चार सिद्धांतों पर बनाया गया है:

  • अंतरसंचालनीयता
  • किसी भी आकार के प्रदाताओं के लिए उचित खोज योग्यता
  • केवल प्रमाणित डॉक्टरों और सुविधाओं का सत्यापन
  • ऐसे खुले नियम और तकनीकी मानक, जिन पर कोई भी डेवलपर नया एप्लिकेशन बना सके।

यूएचआई प्लेटफॉर्म पर वर्तमान में पांच सेवाएं उपलब्ध हैं:

  • ब्लड बैंक की खोज
  • पीएम जन आरोग्य योजना के तहत अस्पतालों की खोज — यह योजना समाज के गरीब तबके को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा प्रदान करती है।
  • जन औषधि केंद्रों की खोज — ये ऐसे केंद्र हैं जहां जेनेरिक दवाएं बाजार मूल्य से 50-90% तक कम कीमतों पर उपलब्ध होती हैं।
  • एम्बुलेंस बुकिंग
  • डॉक्टर से परामर्श

इन रोजमर्रा के कामों को आसान करने के अलावा, यूएचआई का एक बहुत बड़ा उद्देश्य और भी है। यह एबीडीएम में उत्पन्न डेटा का उपयोग सार्वजनिक स्वास्थ्य अनुसंधान और नीति को सशक्त बनाने के लिए करता है।

भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य डेटा और एआई  अभियान का केंद्र बिंदु है एबीडीएम

‘आभा’ और इससे जुड़े स्वास्थ्य रिकॉर्ड सार्वजनिक स्वास्थ्य अनुसंधान और नीति निर्धारण के लिए तेजी से एक मूल्यवान संसाधन के रूप में उभर रहे हैं। एबीडीएम पर मौजूद स्वास्थ्य डेटा पूरी तरह से गोपनीय होता है। यह डेटा सरकार को बीमारियों के फैलने का पता लगाने, सार्वजनिक स्वास्थ्य के रुझानों  की निगरानी करने और अधिक सटीक व लक्षित स्वास्थ्य कार्यक्रम तैयार करने में भी मदद करता है।

 

गोपनीयता पर आधारित संरचना

जब मरीज एबीडीएम पर अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड अपलोड करते हैं, तो वह डेटा उसी के पास रहता है जिसने उसे तैयार किया है — जैसे कि संबंधित अस्पताल, लैब या बीमा कंपनी। इस पूरे डेटा को सुरक्षित रखने  के लिए केंद्र सरकार का कोई केंद्रीय सर्वर नहीं है। रिकॉर्ड केवल तभी एबीडीएम नेटवर्क के भीतर साझा किए जाते हैं जब मरीज इसके लिए अपनी सहमति देता है।

ऐप्स और प्लेटफॉर्म सीधे एबीडीएम से नहीं जुड़ सकते। प्रत्येक नए ऐप को सबसे पहले एक “सैंडबॉक्स” में परखा जाना अनिवार्य है, जो कि वास्तविक सिस्टम का एक सुरक्षित और सिम्युलेटेड (काल्पनिक) संस्करण होता है। इसके साथ ही, लाइव होने से पहले ऐप को एक सुरक्षा ऑडिट से भी गुजरना पड़ता है। यह ऑडिट यह जांच करता है कि ऐप मरीजों के डेटा को कैसे संभालता है और उसकी सुरक्षा कैसे करता है।

 

स्वास्थ्य सेवा में  आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को एकीकृत करने के लिए भी यह डेटा बेहद महत्वपूर्ण है। फरवरी 2026 में, सरकार ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026′ में ‘साही’ (एसएएचआई)-भारत के लिए स्वास्थ्य सेवा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रणनीति) और ‘बोध’ (बीओडीएच)-स्वास्थ्य एआई के लिए बेंचमार्किंग ओपन डेटा प्लेटफॉर्म) को शुरू किया।

  • एसएएचआई ‘साही’-   नैतिकता , जवाबदेही, सुरक्षा और सहयोग पर एक व्यवस्थित मार्गदर्शन प्रदान करता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि स्वास्थ्य सेवा में एआई  का उपयोग पारदर्शी, समावेशी और जन-केंद्रित बना रहे।
  • बीओडीएच ‘बोध’– एक सुरक्षित और संबद्ध  इकोसिस्टम है, जहाँ डेवलपर्स मरीजों के मूल डेटा को देखे  बिना ऑन-साइट ही अपने एआई मॉडल को प्रशिक्षित कर सकते हैं और पूर्ण गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए केवल परिष्कृत मॉडल वेट्स को ही वापस भेजते हैं।

ये सभी मिलकर भारत की उस प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं, जिसका लक्ष्य एक भरोसेमंद, समावेशी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी स्वास्थ्य एआई  इकोसिस्टम बनाना है — एक ऐसा इकोसिस्टम जो नवाचार, ज़िम्मेदारी और जनता के भरोसे पर आधारित हो।

डिजिटलीकरण के माध्यम से सबके लिए स्वास्थ्य सेवा

एबीडीएम  दुनिया के सबसे महत्वाकांक्षी और सफल डिजिटल स्वास्थ्य कार्यक्रमों में से एक है। यह पहले से ही परिणाम दे रहा है। लाखों मरीजों के लिए प्रतीक्षा समय कम हुआकागज़ रहित रिकॉर्ड, दावों का तेज़ी से निपटान और स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुँच देखी गई।

93 करोड़ से अधिक ‘आभा’ खातों से जुड़े 104 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड के साथ, एबीडीएम ने समय के साथ मरीजों के विस्तृत और डिजिटल मेडिकल इतिहास को तैयार करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव हासिल कर लिया है। सरकार का लक्ष्य भारत भर के सभी मरीजों और स्वास्थ्य सुविधाएँ देने के लिए एबीडीएम नेटवर्क का विस्तार करना है, ताकि हर नागरिक के लिए पूरी तरह से डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड का लक्ष्य हासिल किया जा सके।

 

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