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ईमानदारी और सादगी के प्रतीक रहे पूर्व आईएएस चंद्र सिंह नहीं रहे

 

देहरादून, 9 जुलाई। उत्तराखंड के वरिष्ठ पूर्व आईएएस अधिकारी श्री चंद्र सिंह के निधन से प्रशासनिक, सामाजिक और बौद्धिक जगत में शोक की लहर है। अपने लंबे प्रशासनिक जीवन में उन्होंने ईमानदारी, निष्पक्षता और जनसेवा की मिसाल कायम की। उनके निधन को उत्तराखंड ने एक अनुभवी, संवेदनशील और कर्मठ प्रशासक की अपूरणीय क्षति के रूप में देखा जा रहा है।
15 अगस्त 1942 को जन्मे श्री चंद्र सिंह ने अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की थी। भारतीय प्रशासनिक सेवा में रहते हुए उन्होंने उत्तर प्रदेश और बाद में उत्तराखंड में अनेक महत्वपूर्ण दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया। वे चमोली, उधम सिंह नगर सहित कई जनपदों में जिलाधिकारी रहे। इसके अतिरिक्त उन्होंने परियोजना निदेशक, अतिरिक्त निदेशक, निदेशक, विशेष सचिव, संयुक्त विकास आयुक्त, उपाध्यक्ष तथा विभिन्न विभागों में सचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद भी उन्होंने शासन में अहम जिम्मेदारियां निभाईं और सचिव पद से सेवानिवृत्त हुए।
श्री चंद्र सिंह अपनी प्रशासनिक दक्षता के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं और सरल व्यक्तित्व के लिए भी जाने जाते थे। वे निर्णय लेने में निष्पक्ष, कार्यशैली में पारदर्शी और जनसमस्याओं के समाधान के प्रति सदैव प्रतिबद्ध रहे। उनके सहयोगियों और अधीनस्थ अधिकारियों के बीच उनकी पहचान एक अनुशासित तथा सहज उपलब्ध अधिकारी के रूप में थी।
उनका निकट संबंध प्रसिद्ध पर्यावरणविद् से रहा। हिमालय, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास जैसे विषयों के प्रति उनकी गहरी रुचि थी तथा वे इन मुद्दों पर गंभीर चिंतन करते थे।
उनके जीवन का एक प्रेरक अध्याय टिहरी के ठक्कर बापा छात्रावास से जुड़ा है। छात्र जीवन में वे पूर्व पर्वतीय विकास मंत्री स्वर्गीय बर्फिया लाल जुवांठा तथा प्रसिद्ध सर्वोदय समाजसेवी स्वर्गीय बिहारी लाल के साथ वहीं रहे। तीनों ने आगे चलकर अपने-अपने क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया। इन तीनों विभूतियों में अब केवल चंद्र सिंह जी से ही समय-समय पर संपर्क बना रहता था, लेकिन उनके निधन के साथ वह आत्मीय रिश्ता भी स्मृतियों का हिस्सा बन गया।
श्री चंद्र सिंह के निधन पर प्रशासनिक अधिकारियों, सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों तथा उनके शुभचिंतकों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने अपने पूरे सेवा जीवन में ईमानदारी, सादगी और लोकहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनका व्यक्तित्व आने वाली पीढ़ियों के प्रशासनिक अधिकारियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
भावभीनी श्रद्धांजलि।

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