क्या मुझे इसबगोल की भूसी (सैलियम हस्क) का सेवन करना चाहिए?

The supplement is said to help with weight loss, blood sugar, cholesterol and more. Is that too good to be true?
यह सप्लीमेंट वजन घटाने, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और अन्य समस्याओं में मदद के लिए जाना जाता है। क्या यह सचमुच इतना असरदार है या सिर्फ एक छलावा?
-लेखिका: एलिस कैलाहन-
प्रश्न: ऐसा लगता है कि आजकल हर कोई तमाम फायदों के लिए इसबगोल की भूसी (सैलियम हस्क) ले रहा है। क्या शोध यह संकेत देते हैं कि यह वास्तव में मददगार है? और किन समस्याओं के लिए?
ईसबगोल (Psyllium Husk) ‘प्लांटेगो ओवेटा’ पौधे के बीजों का छिलका है。 यह एक प्राकृतिक और घुलनशील फाइबर है जो पानी के संपर्क में आते ही जेल जैसा बन जाता है。 इसका उपयोग मुख्य रूप से पाचन सुधारने, कब्ज से राहत पाने और वजन नियंत्रित करने के लिए किया जाता है .इसे “पेट के लिए एक चमत्कारी सप्लीमेंट“, “कुदरती ओज़ेम्पिक” और “दुनिया के सबसे कम आंके गए सप्लीमेंट्स में से एक” कहा गया है। इसबगोल की भूसी, जो मुख्य रूप से दक्षिण एशिया में उगने वाले एक पौधे के बीजों से तैयार होने वाला फाइबर–युक्त पदार्थ है, सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियां बटोर रही है। यह न केवल पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने बल्कि कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर को नियंत्रित करने और वजन घटाने जैसे फायदों के लिए भी ध्यान आकर्षित कर रही है।
बाजार में मिलने वाले अधिकांश सप्लीमेंट्स के प्रमाणित स्वास्थ्य लाभ बहुत कम या ना के बराबर होते हैं। तो क्या इसबगोल की भूसी इसका एक अपवाद है?
शोध क्या संकेत देते हैं
इसबगोल की भूसी में प्रचुर मात्रा में ‘म्यूसिलेज‘ (लुआब) होता है। यह एक प्रकार का घुलनशील फाइबर है, जो पानी के संपर्क में आने पर एक जेल (लसदार पदार्थ) का रूप ले लेता है। यह सप्लीमेंट बाजार में विभिन्न रूपों में बिकता है, जिसमें साबुत भूसी (आमतौर पर खुरदरी और हल्की बनावट में), पिसा हुआ पाउडर (आटे जैसी बारीक स्थिरता) और कैप्सूल शामिल हैं।
इसके संभावित फायदों को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है, जिनमें से कुछ के पक्ष में दूसरों की तुलना में अधिक वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद हैं।
1. पाचन (Digestion)
मिशिगन मेडिसिन में गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी (पेट रोग) विभाग के प्रमुख डॉ. विलियम डी. चेय के अनुसार, इसबगोल पेट के डॉक्टरों के लिए “सबसे भरोसेमंद फाइबर सप्लीमेंट” है, क्योंकि यह कब्ज और इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS) में बेहद मददगार साबित हुआ है।
जब यह पेट और आंतों से होकर गुजरता है, तो पानी को सोखकर एक चिपचिपा, जेल जैसा पदार्थ बना लेता है। यह मल को नरम और भारी बनाता है, जिससे यह मलाशय से आसानी से बाहर निकल जाता है। यह प्रक्रिया कब्ज से राहत दिलाती है, खासकर आई.बी.एस. से पीड़ित मरीजों में।
बोस्टन की आहार विशेषज्ञ (डाइटिशियन) केट स्कार्लाटा कहती हैं कि विरोधाभासी रूप से, इसबगोल दस्त (डायरिया) में भी मदद करता है, जो कि आई.बी.एस. का ही एक अन्य आम लक्षण है। यह आंतों में अतिरिक्त तरल पदार्थ को सोख लेता है। चूंकि आंतों के अधिकांश बैक्टीरिया इसबगोल को आसानी से नहीं तोड़ पाते (जिस प्रक्रिया में गैस बनती है), इसलिए अन्य फाइबर सप्लीमेंट्स की तुलना में इससे पेट फूलने और मरोड़ उठने जैसी शिकायतें काफी कम होती हैं।
2. कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर (Cholesterol and Blood Sugar)
पेन स्टेट यूनिवर्सिटी में पोषण विज्ञान की एमेरिटस प्रोफेसर पेनी क्रिस–एथर्टन का कहना है कि शोध बताते हैं कि इसबगोल के सेवन से कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर के स्तर में मामूली कमी आ सकती है।
वर्ष 2018 में हुए 28 छोटे परीक्षणों के विश्लेषण में—जिनमें अधिकांश उच्च कोलेस्ट्रॉल वाले लोग शामिल थे—शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों ने कम से कम तीन सप्ताह तक प्रतिदिन लगभग 10 ग्राम इसबगोल लिया, उनके एलडीएल (bad cholesterol) में थोड़ी गिरावट देखी गई। इसी तरह, वर्ष 2024 के अध्ययनों की समीक्षा (जिसमें ज्यादातर टाइप-2 मधुमेह या उससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोग शामिल थे) में पाया गया कि इसबगोल लेने से ब्लड शुगर का स्तर थोड़ा कम हुआ।
आहार विशेषज्ञ स्कार्लाटा बताती हैं कि इसबगोल में मौजूद फाइबर आंतों में पित्त एसिड (bile acids) से जुड़ जाता है, जो कोलेस्ट्रॉल से बने होते हैं। यह उन्हें शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे रक्त में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल कम होता है। इसके अलावा, इसबगोल कार्बोहाइड्रेट के पाचन को धीमा कर देता है, जिससे रक्तप्रवाह में ग्लूकोज का अवशोषण धीरे–धीरे होता है और ब्लड शुगर अचानक से तेजी से नहीं बढ़ता।
डॉ. क्रिस–एथर्टन कहती हैं कि ये प्रभाव उन लोगों के लिए मददगार हो सकते हैं जो उच्च कोलेस्ट्रॉल, टाइप-2 मधुमेह या प्री–डायबिटीज से जूझ रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि आप साबुत अनाज, फलियां, नट्स, बीज, फल और सब्जियों जैसे फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थों का प्रचुर मात्रा में सेवन करते हैं, तो आपको इससे भी अधिक स्वास्थ्य लाभ मिलेंगे।
3. वजन घटाना (Weight Loss)
मास जनरल ब्रिघम की आहार विशेषज्ञ जूलिया लॉयड कहती हैं कि चूंकि इसबगोल आंतों में जाकर फूल जाता है और कार्बोहाइड्रेट के पाचन को धीमा करता है, इसलिए इसे लेने के बाद एक या दो घंटे तक पेट भरे होने का एहसास हो सकता है। लेकिन शोध बताते हैं कि यह प्रभाव आमतौर पर वास्तविक वजन घटाने में तब्दील नहीं होता है।
वर्ष 2020 में 22 छोटे परीक्षणों की समीक्षा की गई, जिनमें अधिकांश वयस्क अधिक वजन या मोटापे की श्रेणी के थे। शोधकर्ताओं ने पाया कि जब शरीर के वजन, बॉडी मास इंडेक्स (BMI) या कमर के घेरे की बात आई, तो इसबगोल लेने वाले और प्लेसिबो (बिना किसी दवा वाली डमी गोली) लेने वाले समूहों के परिणामों में कोई अंतर नहीं था।
इसका सेवन कैसे करें
जूलिया लॉयड का मानना है कि फाइबर को भोजन के माध्यम से प्राप्त करना सबसे बेहतर है। लेकिन यदि आप कब्ज, आई.बी.एस., उच्च कोलेस्ट्रॉल, टाइप-2 मधुमेह या प्री–डायबिटीज जैसी स्थितियों से पीड़ित हैं, तो इसबगोल के इस्तेमाल को लेकर डॉक्टर से परामर्श करना फायदेमंद हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि आप केवल अपने खान–पान से दैनिक रूप से आवश्यक 25 से 38 ग्राम फाइबर प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं, तो यह सप्लीमेंट उस कमी को पूरा करने में मदद कर सकता है।
डॉ. चेय के अनुसार, इसबगोल का प्रतिदिन सेवन करना पूरी तरह सुरक्षित है। बस किसी भी दवा को लेने के दो घंटे पहले या दो घंटे बाद तक इसका सेवन करने से बचें, क्योंकि यह दवाओं के अवशोषण को कम कर सकता है। जिन लोगों को पेट की कुछ खास बीमारियां हैं, जैसे गैस्ट्रोपेरेसिस (पेट का धीरे–धीरे खाली होना) या आंतों में रुकावट (बाउल ऑब्स्ट्रक्शन) का इतिहास रहा है, उन्हें सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि उनके पाचन तंत्र में इसबगोल के फंसने का खतरा रहता है।
डाइटिशियन स्कार्लाटा शुरुआत में धीमी गति से बढ़ने की सलाह देती हैं, जैसे पहले या दूसरे सप्ताह में रोजाना पांच ग्राम से शुरुआत करें, ताकि गैस, पेट फूलना या अन्य असहजता को कम किया जा सके। वह इसबगोल पाउडर को स्मूदी, दलिया (ओटमील) और मफिन में मिलाकर लेना पसंद करती हैं, जबकि अधिकांश लोग इसके पाउडर या साबुत भूसी को सीधे पानी या जूस में मिलाकर पीते हैं।
जूलिया लॉयड चेतावनी देती हैं कि चूंकि इसबगोल पानी को तेजी से सोखता है, इसलिए इसे हमेशा कम से कम एक से दो गिलास पानी के साथ लें और पूरे दिन खुद को हाइड्रेटेड रखें (पर्याप्त पानी पीते रहें)। ऐसा न करने पर, इसबगोल आपकी आंतों में जाकर सख्त हो सकता है, जिससे पेट में मरोड़, गंभीर कब्ज और अत्यंत दुर्लभ मामलों में आंतों में रुकावट पैदा हो सकती है।
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एलिस कैलाहन न्यूयॉर्क टाइम्स की पत्रकार हैं जो पोषण और स्वास्थ्य विषयों को कवर करती हैं। उन्होंने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, डेविस से पोषण विज्ञान में पीएच.डी. की है।
