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दो दिनों में ईरान पर अमेरिकी हमलों ने बढ़ाया तनाव, 170 से अधिक सैन्य ठिकाने निशाने पर

U.S. forces hit more than 170 targets, including air defense systems, drone and missile storage sites, and military speedboats.

Eric Schmitt

-एरिक श्मिट की रिपोर्ट-
वॉशिंगटन से रिपोर्टिंग

अमेरिका ने इस सप्ताह ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को तेज करते हुए मंगलवार और बुधवार को 170 से अधिक सैन्य ठिकानों पर हमले किए। अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) के अनुसार, चार महीने से अधिक समय से जारी संघर्ष के दौरान यह सबसे व्यापक और तीव्र हमलों में से एक रहा।

विश्लेषकों का मानना है कि इन हमलों के जरिए ट्रंप प्रशासन ने तेहरान को स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि हालात बिगड़ते हैं तो अमेरिका अपने अभियान का दायरा और बढ़ाने तथा ऐसे ठिकानों को भी निशाना बनाने के लिए तैयार है, जिनका उपयोग सैन्य और नागरिक दोनों उद्देश्यों के लिए होता है।

हालांकि शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि उन्होंने ईरान के साथ वार्ता जारी रखने पर सहमति जताई है, लेकिन साथ ही यह भी लिखा कि “सीज़फायर अब खत्म हो चुका है।” इससे आगे की अमेरिकी रणनीति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

एयर डिफेंस, मिसाइल डिपो और नौसैनिक ठिकाने बने निशाना

अमेरिकी हमलों में ईरान की वायु रक्षा प्रणाली, ड्रोन एवं मिसाइल भंडारण केंद्र तथा दक्षिणी तट पर होरमुज़ जलडमरूमध्य के निकट तैनात सैन्य स्पीडबोटों को निशाना बनाया गया। होरमुज़ जलडमरूमध्य विश्व की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक लाइनों में से एक है और हालिया संघर्ष का प्रमुख केंद्र बन चुका है।

इसके अलावा, अमेरिकी सेना ने पूर्वोत्तर ईरान में एक रेलवे पुल पर भी हमला किया, जो होरमुज़ से लगभग 700 मील दूर स्थित है। न्यूयॉर्क टाइम्स द्वारा सत्यापित वीडियो में पुल के पास बने बड़े गड्ढे का निरीक्षण करते लोग दिखाई दिए।

अमेरिका का संकेत—नागरिक अवसंरचना भी सुरक्षित नहीं

पूर्व और वर्तमान अमेरिकी सैन्य अधिकारियों का कहना है कि ये हमले संघर्ष में स्पष्ट वृद्धि का संकेत हैं। पूर्व अमेरिकी अधिकारी डाना स्ट्रोल के अनुसार, अमेरिका यह संदेश देना चाहता है कि यदि ईरान तनाव बढ़ाता है तो उसकी नागरिक अवसंरचना, जैसे पुल और रेलवे नेटवर्क, भी निशाने पर आ सकते हैं।

राष्ट्रपति ट्रंप ने भी इस सप्ताह कहा था कि आवश्यकता पड़ने पर अमेरिका ईरान के बिजली संयंत्रों और पुलों जैसी नागरिक संरचनाओं पर भी हमला कर सकता है, हालांकि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत ऐसे हमले युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकते हैं।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने बताया कि रेलवे पुल जैसे ठिकानों को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि उनके माध्यम से ईरान विवादित क्षेत्रों तक हथियार, गोला-बारूद और सैन्य सामग्री पहुंचा रहा था।

ईरान में 14 लोगों की मौत, 78 घायल

ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अमेरिकी हमलों में पांच प्रांतों में कम से कम 14 लोगों की मौत हुई और 78 लोग घायल हुए।

इसके जवाब में ईरान ने दावा किया कि उसने कतर, बहरीन और कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागीं। वहीं जॉर्डन ने कहा कि उसने अपने हवाई क्षेत्र में कई ईरानी मिसाइलों को मार गिराया।

व्यापारिक जहाजों पर हमलों से बढ़ा विवाद

ताजा तनाव की शुरुआत तब हुई जब पेंटागन ने आरोप लगाया कि ईरान ने तीन वाणिज्यिक जहाजों, जिनमें एक सऊदी तेल टैंकर और कतर का एलएनजी पोत शामिल था, पर हमला किया। हालांकि ईरान ने इन हमलों की जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है।

बुधवार को ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका संभवतः ईरान पर “कड़ा प्रहार” करेगा, लेकिन उन्हें पूर्ण युद्ध की वापसी की आशंका नहीं है। बाद में उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने फिर जहाजों पर हमला किया तो स्थिति “और भी बदतर” होगी।

अमेरिकी विपक्ष ने उठाए सवाल

डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने ट्रंप प्रशासन की रणनीति पर सवाल उठाए हैं। सीनेट की सशस्त्र सेवा समिति के वरिष्ठ सदस्य सीनेटर जैक रीड ने कहा कि वास्तविक युद्धविराम कभी लागू ही नहीं हुआ और राष्ट्रपति ट्रंप लगातार अपना रुख बदल रहे हैं, जिससे बिना स्पष्ट रणनीति के संघर्ष लंबा खिंच रहा है।

होरमुज़ पर नियंत्रण को लेकर जारी है टकराव

विश्लेषकों का मानना है कि वार्ता और सैन्य झड़पें अब साथ-साथ चल सकती हैं, क्योंकि दोनों देश होरमुज़ जलडमरूमध्य पर प्रभाव बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।डाना स्ट्रोल के अनुसार, अमेरिका को उम्मीद थी कि हालिया समझौते में प्रस्तावित प्रतिबंधों में राहत के बदले ईरान होरमुज़ से निर्बाध समुद्री आवाजाही सुनिश्चित करेगा। लेकिन इसके विपरीत ईरान ने जहाजों को केवल अपने स्वीकृत मार्ग से गुजरने का दबाव बनाना शुरू कर दिया।

उन्होंने यह भी कहा कि ईरान ने भी अमेरिकी प्रतिक्रिया का गलत आकलन किया। तेहरान को लगा था कि समुद्री संकट पैदा कर वह अमेरिका से अतिरिक्त आर्थिक रियायतें हासिल कर लेगा, लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है।

जवाबी हमलों का सीमित असर

ईरान ने गुरुवार को दावा किया कि उसने जॉर्डन स्थित मुवाफ्फक सल्ती एयर बेस, जिसका उपयोग अमेरिकी सेना भी करती है, पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जॉर्डन ने कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने आठ मिसाइलों को मार गिराया और कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।

कुवैत ने भी तीन बैलिस्टिक मिसाइलें, एक क्रूज मिसाइल और दस ड्रोन नष्ट करने का दावा किया। गिरते मलबे से एक व्यक्ति घायल हुआ और कुछ संपत्ति को नुकसान पहुंचा। बहरीन ने भी कई मिसाइलों और ड्रोन को नष्ट करने की पुष्टि की।

ईरान ने कतर पर भी हमले का दावा किया, जबकि कतर, अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। हालांकि कतर ने किसी हमले की पुष्टि नहीं की। सुरक्षा अलर्ट जारी करने के बाद बाद में उसे वापस ले लिया गया।

(साभार: द न्यूयॉर्क टाइम्स | मूल रिपोर्ट: एरिक श्मिट)

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