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क्वांटम नेटवर्क को अधिक कुशलता से जोड़ने के लिए नई रूपरेखा विकसित

 

चित्र : जीसीपी फ्रेमवर्क का परिचालन प्रवाह, जो मौजूदा कम उलझाव वाले लिंकों को अनुकूलित करने के लिए स्थानीयकृत ज्यामितीय रूटिंग का उपयोग करता है। इस प्रकार जीसीपी मौजूदा प्रोटोकॉल से उत्पन्न होने वाले अवांछित परिणामों, जैसे नोड्स का अलगाव और विलोपन , से बचता है और उच्चतर अधिकतम उलझाव से जुड़ा एक मजबूत और टिकाऊ क्वांटम नेटवर्क प्रदान करता है।

नई दिल्ली। भविष्य के क्वांटम संचार तंत्र (क्वांटम कम्युनिकेशन आर्किटेक्चर) के विकास की दिशा में वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। एक नए अध्ययन में ऐसा प्रोटोकॉल प्रस्तुत किया गया है, जो क्वांटम नेटवर्क के निर्माण के लिए अधिक मजबूत, कुशल और पूर्वानुमानित ढांचा उपलब्ध करा सकता है।
क्वांटम नेटवर्क में दूरस्थ स्टेशनों के बीच अधिकतम क्वांटम एंटैंगलमेंट (उलझाव) स्थापित करना सुरक्षित और प्रभावी संचार के लिए आवश्यक माना जाता है। हालांकि, प्रयोगशाला के बाहर वास्तविक परिस्थितियों में अधिकतम एंटैंगलमेंट बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि वातावरण से उत्पन्न व्यवधान लगातार इसकी गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं।
अब तक वैज्ञानिक क्वांटम यांत्रिकी और सांख्यिकीय भौतिकी के परकोलेशन सिद्धांत का उपयोग कर कमजोर नेटवर्क में मजबूत कड़ियां विकसित करने का प्रयास करते रहे हैं। मौजूदा तकनीकों में प्रायः मध्यवर्ती स्टेशनों को क्रमशः अलग कर दूरस्थ स्टेशनों के बीच संपर्क स्थापित किया जाता है। इससे नेटवर्क संसाधनों की खपत बढ़ती है और मूल नेटवर्क संरचना भी प्रभावित होती है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के स्वायत्त संस्थान बोस इंस्टीट्यूट, कोलकाता के वैज्ञानिकों ने इस समस्या का नया समाधान प्रस्तुत किया है। डॉ. दीप नाथ और प्रो. सौमेन रॉय के अध्ययन में जनरल कॉन्करेंस परकोलेशन (जीसीपी) नामक नया प्रोटोकॉल विकसित किया गया है, जो क्वांटम नेटवर्क को जोड़ने के लिए आवश्यक संसाधनों को कम करते हुए उसकी दक्षता बढ़ाने में सक्षम है।
यह अध्ययन प्रतिष्ठित शोध पत्रिका फिजिकल रिव्यू ए में प्रकाशित हुआ है। जीसीपी प्रोटोकॉल की विशेषता यह है कि यह स्टेशनों के बीच संपर्क तोड़ने के बजाय उपलब्ध सबसे छोटे मार्गों का उपयोग कर क्वांटम एंटैंगलमेंट को मजबूत बनाता है। इससे विरल (Sparse) भौतिक नेटवर्क भी अत्यधिक सघन और प्रभावी नेटवर्क में परिवर्तित हो सकता है।
शोधकर्ताओं ने कंप्यूटर सिमुलेशन के माध्यम से दिखाया कि इस तकनीक से पूरे नेटवर्क को जोड़ने के लिए आवश्यक न्यूनतम एंटैंगलमेंट स्तर पहले की तुलना में कम हो जाता है। अध्ययन में यह भी सिद्ध किया गया कि जीसीपी प्रोटोकॉल सांख्यिकीय भौतिकी के प्रसिद्ध परकोलेशन यूनिवर्सैलिटी क्लास का पालन करता है, जिससे क्वांटम एंटैंगलमेंट परकोलेशन की सैद्धांतिक समझ और अधिक मजबूत होती है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह शोध भविष्य में सुरक्षित, विश्वसनीय और बड़े पैमाने पर क्वांटम संचार नेटवर्क विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार प्रदान करेगा।

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