38 घंटे बाद खुला ग्वालदम-सिमली राष्ट्रीय राजमार्ग, पिंडर घाटी के लोगों ने ली राहत की सांस
थराली, 8 अगस्त (हरेन्द्र बिष्ट)। पिंडर घाटी की लाइफलाइन माने जाने वाला ग्वालदम-सिमली राष्ट्रीय राजमार्ग नारायणबगड़ से आगे आमसोड़ में करीब 38 घंटे बाद शुक्रवार देर शाम यातायात के लिए खोल दिया गया। मार्ग खुलने से पिंडर घाटी के लोगों ने राहत की सांस ली। वहीं, आमसोड़ में पहाड़ी खिसकने से क्षतिग्रस्त हुई सिमली (कर्णप्रयाग) से नारायणबगड़, थराली और देवाल को जाने वाली 33 केवी विद्युत लाइन को भी ऊर्जा निगम ने करीब 40 घंटे बाद दुरुस्त कर बिजली आपूर्ति बहाल कर दी।
गुरुवार तड़के आमसोड़ के पास अचानक बड़ी चट्टान टूटने के साथ करीब 150 से 200 मीटर लंबाई में पहाड़ी का एक हिस्सा खिसककर राष्ट्रीय राजमार्ग पर आ गिरा था। इससे मार्ग पर बड़े-बड़े बोल्डर, पेड़ और भारी मात्रा में मलबा जमा हो गया था। मार्ग बंद होने के कारण गढ़वाल और कुमाऊं के बीच आवाजाही प्रभावित होने के साथ ही पिंडर घाटी के थराली, देवाल और नारायणबगड़ क्षेत्र का संपर्क भी बाधित हो गया था।
मार्ग खोलने के लिए संबंधित विभागों ने गुरुवार और शुक्रवार को लगातार मशीनों के माध्यम से मलबा और बोल्डर हटाने का काम किया। शुक्रवार देर शाम करीब सात बजे सड़क से मलबा हटाकर यातायात बहाल करने में सफलता मिली। सड़क खुलने के बाद मार्ग पर फंसे वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई और यात्रियों ने राहत की सांस ली।
बिजली आपूर्ति भी करीब 40 घंटे बाद बहाल
आमसोड़ में पहाड़ी खिसकने के कारण 123 केवी सब स्टेशन सिमली से नारायणबगड़, थराली और देवाल को आपूर्ति करने वाली 33 केवी विद्युत लाइन के कई पोल क्षतिग्रस्त हो गए थे। इससे पिंडर घाटी के तीनों विकासखंडों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई थी।
ऊर्जा निगम के एसडीओ अतुल कुमार ने बताया कि सड़क खुलने के बाद क्षतिग्रस्त पोलों को दोबारा खड़ा करने और नई विद्युत लाइन खींचने का काम शुरू किया गया। निगम की टीम ने शुक्रवार देर रात करीब नौ बजे क्षेत्र में बिजली आपूर्ति बहाल कर दी। सड़क और बिजली आपूर्ति बहाल होने से पिंडर घाटी के लोगों को बड़ी राहत मिली है।
