जंगल की आग से घट सकता है भारत में सौर ऊर्जा उत्पादन
By- Jyoti Rawat
भारत वर्तमान में वैश्विक स्तर पर स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा के तेजी से विस्तार करने वाले देशों में प्रमुख स्थान रखता है। देश भर में बड़े पैमाने पर सौर पैनल और सोलर पार्क स्थापित किए जा रहे हैं। हालांकि, सौर ऊर्जा उत्पादन की इस यात्रा में मौसम, बादल और प्रदूषण हमेशा से ही चुनौतियाँ रहे हैं। अब एक नए अध्ययन ने एक और अप्रत्यक्ष लेकिन बेहद गंभीर खतरे की ओर ध्यान आकर्षित किया है—जंगल की आग (Wildfires)।
गर्मी के मौसम में देश के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर हिमालयी और मध्य भारत के जंगलों में लगने वाली आग न केवल जैव विविधता को नष्ट करती है, बल्कि देश में उत्पादित होने वाली सौर बिजली की मात्रा को भी काफी हद तक घटा देती है।
वैज्ञानिक अध्ययन और मुख्य शोध निष्कर्ष
अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका रिमोट सेंसिंग (Remote Sensing) में प्रकाशित एक विस्तृत अध्ययन में इस बात का गहन विश्लेषण किया गया है। यह शोध भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज (ARIES, नैनीताल) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. उमेश चंद्र डुमका के नेतृत्व में किया गया। इसमें ग्रीस के ‘नेशनल ऑब्जर्वेटरी ऑफ एथेंस’ (NOA) और अमेरिका के ‘जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी’ (JPL/NASA) के शोधकर्ताओं ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
वैज्ञानिकों ने जनवरी से अप्रैल 2021 के आंकड़ों का रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट डेटा और कंप्यूटर सिमुलेशन के जरिए विश्लेषण किया। अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष इस प्रकार हैं:
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सौर विकिरण में भारी गिरावट: जंगल की आग से भारी मात्रा में धुआं, राख और कार्बन के अति-सूक्ष्म कण (एरोसोल) वायुमंडल में फैल जाते हैं। इस धुएं के कारण जमीन पर सीधे पहुँचने वाले सूर्य के प्रकाश (Beam Horizontal Irradiance) में 0 से 45 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
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एरोसोल ऑप्टिकल डेप्थ (AOD) का बढ़ना: आग के चरम मौसम के दौरान हवा में एरोसोल का घनत्व (AOD मान) 1.8 तक पहुँच गया। यह मान वायुमंडल में धुएं के अत्यधिक प्रभाव को दर्शाता है, जो सूर्य की किरणों को सोख लेता है या उन्हें वापस अंतरिक्ष की ओर बिखेर (scatter) देता है।
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तकनीकी दक्षता पर असर: धुएं और वायुमंडलीय रुकावटों का असर फोटोवोल्टिक (PV) पैनलों और कंसंट्रेटेड सोलर पावर (CSP) संयंत्रों, दोनों की ऊर्जा उत्पादन क्षमता पर नकारात्मक रूप से पड़ता है।
आर्थिक नुकसान और ग्रिड स्थिरता पर प्रभाव
सौर ऊर्जा उत्पादन में गिरावट केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका सीधा वित्तीय और तकनीकी असर भी पड़ता है:
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वित्तीय नुकसान: अध्ययन की चार महीने की अवधि के दौरान कुल सौर ऊर्जा क्षमता का राजस्व लगभग 79.5 मिलियन रुपये आंका गया था। हालांकि, केवल बादलों और वायुमंडलीय एरोसोल (जिसमें जंगल की आग का मुख्य योगदान था) के कारण सौर कंपनियों को 22 मिलियन रुपये (लगभग 2.2 करोड़ रुपये) से अधिक का प्रत्यक्ष वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा।
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बिजली ग्रिड प्रबंधन: नेशनल और स्टेट पावर ग्रिड ऑपरेटरों के लिए बिजली की मांग और आपूर्ति में संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी होता है। अचानक धुएं के कारण जब मेगावाट स्तर पर सौर उत्पादन गिरता है, तो ग्रिड के अनियंत्रित होने का खतरा बढ़ जाता है।
नीतिगत महत्व और भविष्य की राह
यह अध्ययन भारत में ऊर्जा प्रबंधन और पर्यावरण नीतियों के समन्वय की आवश्यकता पर बल देता है:
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ग्रिड शेड्यूलिंग में सुधार: अब ग्रिड ऑपरेटर जंगल की आग के मौसम (मार्च से मई) के दौरान धुएं के पूर्वानुमान को ध्यान में रखकर पहले से ही बैकअप पावर (जैसे हाइड्रो या थर्मल) की योजना बना सकते हैं।
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जलवायु परिवर्तन नीतियां: यह शोध दर्शाता है कि जंगल की आग को रोकना केवल जंगलों और वन्यजीवों को बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की हरित ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखने के लिए भी अनिवार्य है।
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सतत विकास: कार्बन उत्सर्जन में कटौती और सौर ऊर्जा के लक्ष्यों को पूरी तरह से प्राप्त करने के लिए जंगल की आग के प्रबंधन और रोकथाम को राष्ट्रीय सौर मिशन की प्राथमिकताओं में शामिल करना होगा।
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- प्रकाशन: Dumka, U. C. et al. (2022). क्या भारत में सौर ऊर्जा उत्पादन में कमी के लिए जंगल की आग एक महत्वपूर्ण कारक हो सकती है? रिमोट सेंसिंग, 14, 549 (22pp)
प्रकाशन लिंक:: https://doi.org/10.3390/rs14030549
