जमीनों की खरीद-फरोख्त और ‘देवभूमि कार्ड’ पर यूकेडी मुखर
देहरादून, 8 अगस्त। उत्तराखंड में जमीनों की खरीद-फरोख्त को लेकर उठ रहे विवादों के बीच उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने भू-कानून और सरकार के प्रस्तावित ‘देवभूमि कार्ड’ के मुद्दे पर सरकार को घेरा है। कचहरी रोड स्थित केंद्रीय कार्यालय में आयोजित पार्टी की बैठक में जमीनों की खरीद-बिक्री, मूल निवासियों के अधिकारों और ‘देवभूमि कार्ड’ की व्यवस्था को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड के मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए स्पष्ट, मजबूत और प्रभावी भू-कानून जरूरी है। उनका कहना था कि सरकार की ओर से प्रस्तावित ‘देवभूमि कार्ड’ प्रदेश की मूल समस्या का समाधान नहीं है और इससे मूल निवासियों के संवैधानिक, सामाजिक और भूमि संबंधी अधिकारों को अपेक्षित संरक्षण नहीं मिल पाएगा।
यूकेडी के मूल निवास भू-कानून प्रकोष्ठ के अध्यक्ष लूशुन टोडरिया ने आरोप लगाया कि पर्वतीय क्षेत्रों में बाहरी लोगों और प्रॉपर्टी डीलरों द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से खुलेआम जमीन खरीदने-बेचने के विज्ञापन प्रसारित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान, जनसांख्यिकीय संतुलन और प्राकृतिक संसाधनों पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है।
टोडरिया ने कहा कि पौड़ी जिले के सबदरखाल में 144 नाली जमीन की बिक्री का मामला सामने आना इस बात का संकेत है कि मौजूदा भू-कानून जमीनों की अनियंत्रित खरीद-फरोख्त पर प्रभावी रोक लगाने में सक्षम नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस मामले में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जमीनों की खरीद-फरोख्त पर प्रभावी रोक नहीं लगाई गई तो आगामी विधानसभा चुनाव में यूकेडी गांव-गांव जाकर सरकार की भू-कानून नीति के खिलाफ अभियान चलाएगा।
केंद्रीय महामंत्री सेवानिवृत्त कर्नल देवरानी ने कहा कि प्रदेश की जनता लंबे समय से मूल निवास प्रमाण-पत्र की मांग कर रही है, जबकि सरकार 15 वर्ष के निवास के आधार पर ‘देवभूमि कार्ड’ के माध्यम से निवास प्रमाण-पत्र देने की तैयारी कर रही है। उन्होंने इसे मूल निवासियों के अधिकारों के लिए चिंता का विषय बताते हुए सरकार से अपनी नीति स्पष्ट करने की मांग की।
केंद्रीय प्रवक्ता मीनाक्षी घिल्डियाल ने कहा कि सरकार एक ओर सशक्त भू-कानून लागू होने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर पर्वतीय क्षेत्रों में जमीनों की खरीद-बिक्री का प्रचार खुलेआम सोशल मीडिया पर हो रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को अपने दावों और जमीनी स्थिति के बीच के अंतर को स्पष्ट करना चाहिए।
सैनिक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष महिपाल पुंडीर ने कहा कि उत्तराखंड राज्य का गठन केवल प्रशासनिक और भौगोलिक आधार पर नहीं हुआ था, बल्कि राज्य आंदोलन के पीछे यहां की संस्कृति, पहचान, संसाधनों और अधिकारों की रक्षा की भावना भी थी। उन्होंने सरकार से मूल निवास की स्पष्ट परिभाषा, सख्त भू-कानून और भूमि संरक्षण की प्रभावी व्यवस्था लागू करने की मांग की।
तराई प्रभारी राजेंद्र बिष्ट ने कहा कि राज्य में प्रभावी और कठोर भू-कानून लागू कर मूल निवासियों के अधिकारों को कानूनी संरक्षण दिया जाना चाहिए। केंद्रीय प्रवक्ता प्रमोद काला ने पर्वतीय क्षेत्रों में अनियंत्रित भूमि खरीद-फरोख्त पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से संचालित भूमि कारोबार की निगरानी करने और भू-कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
बैठक में तय किया गया कि यूकेडी आने वाले दिनों में भू-कानून, मूल निवास और जमीनों की खरीद-फरोख्त के मुद्दे पर जनजागरण अभियान चलाएगा। पार्टी ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक जनआंदोलन भी किया जाएगा।
बैठक में मोहन सिंह असवाल, मुकेश बहुगुणा, टीकम राठौड़, निरंजन चौहान, राकेश नेगी, प्रवीण रतूड़ी, कपिल रावत, पंचम सिंह, रमेश चंद्र, पंकज पोखरियाल, अमित कोटियाल, संदीप सिंह, दीप्ति दुधपुरी, दिनेश पंत, गंगा सिंह बिष्ट, नीटू सिंह पंवार, आनंद कोठारी और आरसी उनियाल आदि मौजूद रहे।
