डिजिटल क्रांति का नया अध्याय: ‘गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस’ (GeM) और भारत की बदलती सार्वजनिक खरीद व्यवस्था
|
The Government e-Marketplace (GeM) has transformed public procurement by replacing manual, fragmented processes with a transparent, technology-driven digital platform. By digitising the entire procurement lifecycle, GeM has improved efficiency, transparency and accountability while reducing transaction costs. Dedicated initiatives for MSEs, startups, women entrepreneurs and socially disadvantaged enterprises have expanded access to government markets, making procurement more inclusive. As a key pillar of India’s Digital Procurement Ecosystem, GeM supports Digital India, Make in India, Aatmanirbhar Bharat and Ease of Doing Business. |

-A PIB FEATURE EDITED BY USHA RAWAT-
भारत में सार्वजनिक खरीद (Public Procurement) का इतिहास लंबे समय तक लालफीताशाही, भारी-भरकम कागजी प्रक्रियाओं, अनगिनत फाइलों, प्रशासनिक स्वीकृतियों और लंबी टेंडर प्रणालियों से घिरा रहा है। सरकारें हर साल स्वास्थ्य, शिक्षा, रक्षा, बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक जरूरतों के लिए लाखों करोड़ रुपये के सामान और सेवाओं की खरीदारी करती हैं। पहले इस विशाल बजट के आवंटन और खरीदारी की प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव, सीमित प्रतिस्पर्धा, ऊंचे सौदेबाजी मूल्य और चुनिंदा विक्रेताओं का वर्चस्व एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी। इस पुरानी और बोझिल व्यवस्था को पूरी तरह से समाप्त कर एक पारदर्शी, जवाबदेह और डिजिटल ढांचा खड़ा करने के उद्देश्य से भारत सरकार ने 9 अगस्त 2016 को ‘गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस’ यानी GeM की नींव रखी थी।
GeM का विज़न और राष्ट्रीय अभियानों से जुड़ाव
आज अपने सफल संचालन के 10 वर्ष पूरे कर 11वें वर्ष में प्रवेश कर रहा GeM पोर्टल सिर्फ एक खरीदारी की वेबसाइट बनकर नहीं उभरा है, बल्कि यह भारत के ‘डिजिटल इंडिया’, ‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस’ जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संकल्पों का एक मजबूत आधार स्तंभ बन चुका है। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB Delhi) द्वारा जारी एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, GeM ने सार्वजनिक खरीद के पूरे जीवनचक्र को पूरी तरह से डिजिटल, पेपरलेस, कैशलेस और कॉन्टैक्टलेस बना दिया है। अमेरिका और दक्षिण कोरिया जैसे विकसित देशों की सर्वोत्तम वैश्विक खरीद प्रणालियों के अध्ययन और सामान्य वित्तीय नियमों (GFR) में दूरदर्शी संशोधनों के आधार पर विकसित यह पोर्टल आज केंद्र व राज्य सरकारों के मंत्रालयों, विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs), स्वायत्त निकायों, स्थानीय निकायों, पंचायतों और सहकारी समितियों को देश भर के छोटे-बड़े विक्रेताओं से सीधे जोड़ता है।
खरीद का विशाल पैमाना और रक्षा क्षेत्र का योगदान
GeM की सफलता और इसके विशाल आकार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह मंच वर्तमान में 1.37 लाख से अधिक सरकारी खरीदार संगठनों को लगभग 25 लाख पंजीकृत विक्रेताओं और सेवा प्रदाताओं से सफलतापूर्वक जोड़ता है। इस डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र के माध्यम से अब तक ₹20 लाख करोड़ से भी अधिक का संचयी व्यापार (Cumulative Procurement) संपन्न हो चुका है। GeM का दायरा केवल सामान्य वस्तुओं तक सीमित नहीं है; इस पर 10,660 से अधिक उत्पाद श्रेणियों और 350 से अधिक सेवा श्रेणियों का एक विस्तृत बाज़ार उपलब्ध है। इसमें अस्पताल के अत्याधुनिक मेडिकल उपकरण, क्लासरूम का फर्नीचर, कंप्यूटर और अग्निशमन उपकरण से लेकर परिवहन, कैटरिंग, वाहन किराए पर लेना और मानव संसाधन (HR) जैसी जटिल व्यावसायिक सेवाएं भी एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराई जा रही हैं।
सार्वजनिक खरीद के इस महा-अभियान में देश के सुरक्षा तंत्र का योगदान भी उल्लेखनीय रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 6 अगस्त 2026 तक केवल रक्षा मंत्रालय के ‘सैन्य मामलों के विभाग’ (Department of Military Affairs) ने GeM के जरिए ₹1.35 लाख करोड़ से अधिक की संचयी खरीद (GMV) का आंकड़ा पार किया है, जो GeM के कुल संचयी मूल्य का लगभग 14.93% हिस्सा है। इससे यह स्पष्ट होता है कि देश के सबसे संवेदनशील और विशाल मंत्रालयों ने भी अपनी दैनिक और रणनीतिक जरूरतों के लिए इस डिजिटल मंच की पारदर्शिता और गति पर पूर्ण भरोसा जताया है।
पारदर्शिता, डेटा विश्लेषण और पोर्टल्स का एकीकरण
पारदर्शिता, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और डेटा-संचालित निर्णय प्रक्रिया GeM की कार्यप्रणाली के केंद्र में हैं। खरीदार संस्थाएं अपनी आवश्यकता के अनुसार सीधी खरीद (Direct Purchase), तुलनात्मक अध्ययन (Comparison), इलेक्ट्रॉनिक बिडिंग (e-Bidding) या रिवर्स ऑक्शन (Reverse Auction) जैसे पारदर्शी तरीकों का चयन कर सकती हैं। विवेकाधीन निर्णयों (Discretionary Decision Making) की गुंजाइश को समाप्त करने के लिए मंच पर ऑटोमेटेड वर्कफ़्लो और रियल-टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है। खरीदारों को बुद्धिमत्तापूर्ण और लागत-प्रभावी निर्णय लेने में सक्षम बनाने के लिए GeM ‘लास्ट परचेज प्राइस’ (LPP), मूल्य रुझान और पूर्व खरीद इतिहास जैसे व्यावसायिक विश्लेषण (Business Analytics) उपकरण प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त, यदि कोई खरीदार GeM से बाहर खरीदारी करने का विचार करता है, तो उसके लिए पोर्टल पर उपलब्ध उत्पादों की उपलब्धता और पिछले लेनदेन के रुझान की जांच करने के लिए ‘GeM Availability Report’ देखना अनिवार्य बनाया गया है।
सार्वजनिक खरीद के संपूर्ण तंत्र को एकीकृत और अंतर-संचालनीय (Interoperable) बनाने के उद्देश्य से GeM का लगातार अन्य सरकारी पोर्टलों के साथ एकीकरण किया जा रहा है। इसे ‘सेंट्रल पब्लिक प्रोक्योरमेंट पोर्टल’ (CPPP) के साथ पहले ही एकीकृत किया जा चुका है, जिससे देश भर के सरकारी टेंडरों की जानकारी एक ही बिंदु पर मिल जाती है। इसके साथ ही, ‘भारतीय रेलवे इलेक्ट्रॉनिक प्रोक्योरमेंट सिस्टम’ (IREPS) और ‘डिफेंस पब्लिक प्रोक्योरमेंट पोर्टल’ (DPPP) की कार्यप्रणालियों को भी GeM के साथ जोड़ा जा रहा है, ताकि पूरे देश के लिए एक एकीकृत, पारदर्शी और सहज सार्वजनिक खरीद नेटवर्क स्थापित किया जा सके।
समावेशी विकास: MSEs, महिलाओं और स्टार्टअप्स का सशक्तिकरण
GeM पोर्टल की सबसे बड़ी सामाजिक और आर्थिक उपलब्धि यह है कि इसने देश के पारंपरिक रूप से वंचित, छोटे और हाशिए पर खड़े उद्यमियों के लिए सरकारी बाजार के दरवाजे हमेशा के लिए खोल दिए हैं। पूर्व की जटिल टेंडर प्रक्रियाओं के कारण जो सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs), महिला उद्यमी, स्टार्टअप्स, दलित व आदिवासी (SC/ST) व्यवसायी और ग्रामीण कारीगर सरकारी ठेकों से दूर रह जाते थे, आज वे डिजिटल तकनीक की मदद से सीधे केंद्र सरकार को अपनी सामग्रियां बेच रहे हैं। वर्ष 2025-26 के आंकड़े इस समावेशी विकास की कहानी बखूबी बयां करते हैं:
-
सूक्ष्म एवं लघु उद्यम (MSEs): 11 लाख से अधिक पंजीकृत सूक्ष्म और लघु उद्यमों ने ₹2.36 लाख करोड़ से अधिक मूल्य के 51 लाख से अधिक सरकारी ऑर्डर सफलतापूर्वक पूरे किए।
-
महिला उद्यमी (Womaniya): 2.1 लाख से अधिक पंजीकृत महिला नेतृत्व वाले उद्यमों ने ₹28,000 करोड़ से अधिक का व्यापार हासिल किया।
-
अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) उद्यम: SC/ST वर्ग के उद्यमियों से खरीद ने ₹6,000 करोड़ का आंकड़ा पार किया, जिसमें सालाना 28% की अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई।
-
स्टार्टअप्स (Startup Runway 2.0): नवाचार को प्रोत्साहन देते हुए स्टार्टअप्स से खरीद ₹19,000 करोड़ के पार पहुंच गई, जिसमें 36% से अधिक की वार्षिक वृद्धि देखी गई।
इन श्रेणियों को विशेष अवसर और गति प्रदान करने के लिए GeM ने कई समर्पित पहलें शुरू की हैं। ‘SWAYATT’ (Startups, Women and Youth Advantage Through e-Transactions) पहल विशेष रूप से युवाओं, महिलाओं और स्व-सहायता समूहों को ई-लेनदेन से जोड़ती है। ‘वमनिया’ (Womaniya) पहल महिला उद्यमियों और महिला स्व-सहायता समूहों (WSHGs) के हस्तशिल्प और उत्पादों को सीधे प्रदर्शित करती है। इसी तरह, ‘सरस कलेक्शन’ (SARAS Collection) के माध्यम से ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं द्वारा बनाए गए दैनिक उपयोग के सामान को सरकारी खरीदारों तक पहुंचाया जा रहा है, और ‘स्टार्टअप रनवे 2.0’ नई तकनीकी कंपनियों को अपने इनोवेटिव उत्पादों के प्रदर्शन का सीधा मंच देता है।
ग्राउंड-लेवल सपोर्ट, रणनीतिक साझेदारियां और भविष्य की दिशा
समावेशिता की इस प्रक्रिया को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने (Last-Mile Connectivity) के लिए जून 2026 में GeM ने ‘कॉमन सर्विस सेंटर’ (CSC-SPV) के साथ रणनीतिक साझेदारी की, जिसके तहत देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पायलट आधार पर 50 ‘GeM सुविधा केंद्र’ स्थापित किए जा रहे हैं। ये केंद्र ग्रामीण कारीगरों, बुनकरों, SHGs, छोटे निर्माताओं और उद्यमियों को विक्रेता पंजीकरण, कैटलॉग निर्माण, वेंडर एसेसमेंट, क्षमता निर्माण और शिकायतों के निवारण में स्थानीय स्तर पर व्यावहारिक मदद (Handholding) प्रदान कर रहे हैं।
इसके अलावा, विक्रेताओं की कार्यशील पूंजी (Working Capital) की समस्याओं को दूर करने के लिए यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के साथ मिलकर ‘GeM Sahay’ मोबाइल ऐप विकसित किया गया है। यह ऐप पात्र एकल स्वामित्व (Proprietorship) वाले विक्रेताओं को सरकारी ऑर्डर मिलने पर बिना किसी गारंटी (Collateral-free), त्वरित और पूरी तरह से पेपरलेस लोन की सुविधा देता है, जिससे वे बिना किसी वित्तीय बाधा के आपूर्ति पूरी कर सकें। नीतिगत सुधारों के क्रम में बार-बार होने वाली खरीदारी के लिए ‘रेट कॉन्ट्रैक्ट’ की व्यवस्था लागू की गई है और छोटे विक्रेताओं के लिए ‘कॉशन मनी’ की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है। अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के लिए IN-SPACe, ड्रोन खरीद के लिए ‘ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (DFI), और कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के साथ किए गए एकीकरण ने इस पारिस्थितिकी तंत्र को और अधिक मजबूत बनाया है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), उन्नत डेटा एनालिटिक्स और व्यापक जन-भागीदारी के साथ अपने 11वें वर्ष में कदम रख रहा गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस भारत में गुड गवर्नेंस (सुशासन) की एक मिसाल बन चुका है। इसने न केवल सरकारी खजाने के हजारों करोड़ रुपये की बचत की है और भ्रष्टाचार के चोर रास्तों को बंद किया है, बल्कि देश के सुदूर इलाकों में बैठे छोटे कारीगरों और उद्यमियों को सीधे राष्ट्रीय मुख्यधारा से जोड़कर एक आत्मनिर्भर, समावेशी और डिजिटल रूप से सशक्त भारत के निर्माण में क्रांतिकारी भूमिका निभाई है।
