आपदा/दुर्घटना

द्वारी-भौन मार्ग पर 200 मीटर गहरी खाई में गिरी पिकअप, चालक-हेल्पर ने कूदकर बचाई जान

रिखणीखाल, 15 अगस्त (प्रभुपाल रावत)। रिखणीखाल विकासखंड में द्वारी-भौन सड़क मार्ग की बदहाल स्थिति एक बार फिर हादसे का कारण बनते-बनते बची। शुक्रवार दोपहर द्वारी-क्वीराली सड़क जंक्शन के पास एक मालवाहक पिकअप अनियंत्रित होकर करीब 200 मीटर गहरी खाई में जा गिरी। हादसे के दौरान वाहन में सवार चालक और हेल्पर ने चलते वाहन से कूदकर किसी तरह अपनी जान बचाई। दुर्घटना में पिकअप के परखच्चे उड़ गए और उसका इंजन समेत वाहन का अधिकांश हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
जानकारी के अनुसार पिकअप कोटद्वार से खाद्य सामग्री लेकर द्वारी क्षेत्र के दुकानदारों को सामान वितरित करने जा रही थी। द्वारी-क्वीराली सड़क जंक्शन के पास वाहन अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे जा गिरा और करीब 200 मीटर नीचे ग्राम गले गांव की दिशा में जा पहुंचा। चालक और हेल्पर के समय रहते वाहन से कूद जाने के कारण बड़ा हादसा टल गया।
दुर्घटना में वाहन में लदी खाद्य सामग्री भी मिट्टी और पत्थरों के बीच दबकर बर्बाद हो गई। स्थानीय लोगों ने मौके पर पहुंचकर बची हुई सामग्री को किसी तरह एकत्र किया। दुर्घटनाग्रस्त वाहन की हालत देखकर हादसे की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
12-13 साल से नहीं हुआ सड़क का डामरीकरण
स्थानीय लोगों के अनुसार द्वारी-भौन मार्ग लंबे समय से बदहाली का शिकार है। सड़क पर पिछले करीब 12-13 वर्षों से न तो समुचित डामरीकरण हुआ है और न ही आवश्यक चौड़ीकरण। सड़क के किनारे झाड़ियां इतनी अधिक बढ़ गई हैं कि कई स्थानों पर मार्ग की वास्तविक चौड़ाई भी काफी कम हो गई है। इससे वाहन चालकों को सामने से आने वाले वाहनों को पास देने में भी परेशानी होती है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है, लेकिन संबंधित विभाग की ओर से स्थायी सुधार के प्रयास धरातल पर नजर नहीं आ रहे हैं। क्षेत्रीय जनता और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा कई बार लोक निर्माण विभाग, लैंसडौन से सड़क की स्थिति सुधारने की मांग की जा चुकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि हर बार आश्वासन तो मिलता है, लेकिन काम आगे नहीं बढ़ पाता।
यात्री वाहन चालक भी मार्ग पर आने से कतरा रहे
सड़क की खराब स्थिति का असर क्षेत्र की यातायात व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक मार्ग की हालत ऐसी हो गई है कि यात्री बसों सहित अन्य वाहन चालक भी इस सड़क पर वाहन चलाने से कतराते हैं। इससे क्षेत्र के लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क करीब 25 वर्ष पुरानी है, लेकिन इतने लंबे समय बाद भी इस पर सुचारू और सुरक्षित यातायात की सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी है। उनका कहना है कि क्षेत्र की भौगोलिक और यातायात संबंधी परिस्थितियों को देखते हुए सड़क का चौड़ीकरण, डामरीकरण और नियमित रखरखाव प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।
स्थानीय लोगों ने शासन और प्रशासन से दुर्घटना का संज्ञान लेते हुए सड़क की तकनीकी स्थिति का स्थलीय निरीक्षण कराने तथा आवश्यक सुधार कार्य शीघ्र शुरू कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सड़क की लगातार उपेक्षा भविष्य में किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों और पंचायत प्रतिनिधियों से भी सड़क की समस्या को प्रभावी ढंग से शासन-प्रशासन के समक्ष उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि सड़क क्षेत्र के लोगों की रोजमर्रा की जरूरत से जुड़ी है और इसकी बदहाली का सीधा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था, आवागमन और जरूरी सेवाओं पर पड़ रहा है।
द्वारी-भौन मार्ग पर हुई यह दुर्घटना एक बार फिर पहाड़ी सड़कों के रखरखाव, सुरक्षा और नियमित निगरानी की जरूरत को सामने ले आई है। स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग से हादसे के बाद औपचारिक मरम्मत के बजाय सड़क का स्थायी समाधान करने की मांग की है।

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