उत्तराखंड में निवेश की संभावनाओं पर धामी ने उद्योग जगत को दिया भरोसा, मारुति-हुंडई को किया आमंत्रित
नई दिल्ली, 21 अगस्त। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में इंडिया टुडे ग्रुप के मेगा ब्रांड बिजनेस टुडे द्वारा आयोजित BTIndia@100 कार्यक्रम में उत्तराखंड की औद्योगिक क्षमता और निवेश की संभावनाओं को देश के प्रमुख उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के सामने रखा। ‘Uttarakhand: Powering India’s Industrial Growth’ विषय पर अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि राज्य औद्योगिक विकास, निवेश, रोजगार, स्टार्टअप और स्थानीय अर्थव्यवस्था को एक साथ आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2023 में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के बाद उत्तराखंड की औद्योगिक पहचान में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में आयोजित इस समिट में 50 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने निवेश प्रस्तावों को केवल एमओयू तक सीमित रखने के बजाय उन्हें धरातल पर उतारने के लिए पहले से नीतिगत और प्रशासनिक तैयारियां की थीं। निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के उद्देश्य से राज्य में 30 से अधिक नई नीतियां बनाई गई हैं, जिनका सकारात्मक परिणाम निवेश प्रस्तावों की ग्राउंडिंग के रूप में सामने आया है।
धामी ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां अन्य राज्यों से अलग हैं और यहां बड़े औद्योगिक लैंड बैंक सीमित हैं। हालांकि, हरिद्वार, देहरादून और ऊधमसिंह नगर जैसे क्षेत्रों में उद्योगों की जरूरत के अनुरूप भूमि उपलब्ध है। उन्होंने उद्योग जगत को राज्य में निवेश के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि सरकार निवेशकों को भूमि के साथ आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
कनेक्टिविटी को बताया औद्योगिक विकास की ताकत
मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की बेहतर होती कनेक्टिविटी को निवेश के लिए बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर शुरू होने से राष्ट्रीय राजधानी और देहरादून के बीच यात्रा का समय कम हुआ है। देहरादून से देश के प्रमुख शहरों के लिए 50 से अधिक हवाई सेवाएं उपलब्ध हैं।
उन्होंने कहा कि हरिद्वार राज्य के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल है, जबकि ऊधमसिंह नगर का पंतनगर कृषि के साथ-साथ औद्योगिक गतिविधियों के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित हुआ है। पंतनगर में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट को भी उन्होंने औद्योगिक और लॉजिस्टिक विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया।
धामी ने कहा कि औद्योगिक विकास का लाभ केवल मैदानी क्षेत्रों तक सीमित न रहे, इसके लिए पर्वतीय जिलों में भी औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। पौड़ी, अल्मोड़ा और चमोली में औद्योगिक पार्क विकसित करने की दिशा में काम चल रहा है। वहीं, ‘एक जिला-दो उत्पाद’ जैसी पहलों के माध्यम से स्थानीय उत्पादों, छोटे उद्यमियों और पारंपरिक आर्थिक गतिविधियों को बाजार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
पांच साल में 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी
मुख्यमंत्री ने रोजगार के मुद्दे पर कहा कि सरकार ने पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि 4 जुलाई 2021 को मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का संकल्प लिया गया। पेपर लीक और नकल के मामलों में कठोर कार्रवाई की गई तथा नकल माफिया के खिलाफ कार्रवाई करते हुए करीब 100 लोगों को जेल भेजा गया।
धामी के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्तियां दी गई हैं। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के बाद लगभग दो दशकों में करीब 16 हजार नियुक्तियां हुई थीं, जबकि पिछले पांच वर्षों में ही यह संख्या 34 हजार से अधिक रही है।
मुख्यमंत्री ने राज्य में स्टार्टअप और स्वरोजगार के बढ़ते इकोसिस्टम का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनके मुख्यमंत्री बनने के समय राज्य में करीब 700 स्टार्टअप थे, जिनकी संख्या अब लगभग 2,000 तक पहुंच गई है। होमस्टे, छोटे होटल, कृषि, बागवानी और स्थानीय उद्यमों के माध्यम से युवा और महिलाएं स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
उन्होंने ‘मुख्यमंत्री उद्यमशाला’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से युवाओं और महिलाओं को व्यवसाय शुरू करने, उत्पाद तैयार करने, बाजार से जोड़ने, प्रशिक्षण और ऋण प्रक्रिया से संबंधित जानकारी दी जा रही है। इस पहल के तहत अब तक 13 हजार से अधिक लोग प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं।
पलायन रोकने पर जोर, रिवर्स माइग्रेशन में 44 प्रतिशत वृद्धि का दावा
धामी ने कहा कि उत्तराखंड के विकास की प्राथमिकताओं में ‘पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी’ को राज्य के काम लाना शामिल है। पर्यटन, स्वरोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों के विस्तार से राज्य में रिवर्स माइग्रेशन की दिशा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। उन्होंने रिवर्स माइग्रेशन में 44 प्रतिशत वृद्धि का दावा किया।
उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि पर्वतीय क्षेत्रों में ही रोजगार और आय के अवसर बढ़ाए जाएं, ताकि युवाओं को रोजगार के लिए पलायन न करना पड़े और बाहर जा चुके लोग भी वापस लौटकर स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों से जुड़ सकें।
पर्यटन बना अर्थव्यवस्था का बड़ा आधार
मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की पर्यटन क्षमता को राज्य की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा, कांवड़ यात्रा और आदि कैलाश जैसे धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंच रहे हैं।
धामी ने कहा कि चारधाम यात्रा के प्रथम चरण में ही 47 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे, जबकि कांवड़ यात्रा में करीब 4.80 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आदि कैलाश यात्रा के बाद सीमांत क्षेत्र में पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिला है।
जेन-जी को बताया ‘इंडियन जनरेशन’
मुख्यमंत्री ने नई पीढ़ी का उल्लेख करते हुए जेन-जी को ‘इंडियन जनरेशन’ बताया। उन्होंने कहा कि आज का युवा दुनिया से जुड़ा हुआ, जागरूक और अपनी आकांक्षाओं को लेकर स्पष्ट है। डिजिटल और संचार क्रांति ने युवाओं को वैश्विक अवसरों से जोड़ा है। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि युवाओं की अपेक्षाओं को समझते हुए उन्हें बदलती दुनिया के अनुरूप अवसर उपलब्ध कराए जाएं।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड निवेश के लिए सुरक्षित, शांतिपूर्ण और संभावनाओं से भरा राज्य है। प्राकृतिक संपदा, गंगा और यमुना जैसी नदियां, बेहतर कानून-व्यवस्था, कुशल मानव संसाधन, पर्यटन क्षमता और बढ़ती कनेक्टिविटी राज्य को दीर्घकालिक निवेश के लिए आकर्षक बनाती हैं।
मुख्यमंत्री ने मंच से मारुति और हुंडई सहित देश की प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियों के शीर्ष नेतृत्व को उत्तराखंड में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप भूमि, बुनियादी सुविधाएं और अनुकूल नीतिगत वातावरण उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का विकास मॉडल अब केवल पर्यटन और प्राकृतिक संसाधनों तक सीमित नहीं है। औद्योगिक विकास, स्टार्टअप, स्वरोजगार, डिजिटल अर्थव्यवस्था, कनेक्टिविटी, स्थानीय उत्पाद और पर्वतीय क्षेत्रों में नई आर्थिक गतिविधियों को जोड़कर राज्य व्यापक और संतुलित विकास मॉडल की ओर बढ़ रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि निवेश और रोजगार के नए अवसरों का लाभ मैदानी और पर्वतीय, दोनों क्षेत्रों के लोगों तक पहुंचे और उत्तराखंड देश की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भागीदार बने।

