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डीआरआई ने हाथीदांत की कलाकृतियों के अवैध व्यापार में लिप्त वन्यजीव तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया

नई दिल्ली, 21 अगस्त। राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) ने एक बड़े अभियान में वन्यजीव तस्करों के एक गिरोह का भंडाफोड़ किया और आज हाथीदांत से बनी 54 उत्कृष्ट कलाकृतियों को जब्त किया।

हाथीदांत की कलाकृतियों के अवैध व्यापार से जुड़ी विशेष खुफिया जानकारी के आधार पर, डीआरआई के अधिकारियों ने लखनऊ में एक सुनियोजित अभियान चलाया और वन्यजीव वस्तुओं के अवैध व्यापार में शामिल गिरोह के चार सदस्यों को पकड़ा, जिसके चलते हाथी दांत से बनी 54 उत्कृष्ट कलाकृतियां बरामद हुईं।

बरामद कलाकृतियों में बैल, हाथी, कुत्ते की पशु मूर्तियां; योद्धा, बच्चे को गोद में लिए मां की मानव मूर्तियां; तथा कैंची, कंघी, अगरबत्ती स्टैंडसिंदूर दानी आदि अन्य वस्तुएं शामिल हैं। हाथीदांत से बनी ये कलाकृतियां उत्कृष्ट, बारीक नक्काशी वाली और संभावना के आधार पर बहुत व्यावसायिक और प्राचीन मूल्य की हैं। जब्त की गई हाथीदांत की कलाकृतियों और गिरोह के चार सदस्यों को आगे की जांच के लिए उत्तर प्रदेश वन विभाग को सौंप दिया गया है।

 

 

वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972, अन्य बिंदुओं के साथ-साथ, वन्य जीव-जंतुओं और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर सम्मेलन (सीआईटीईएस) के अंतर्गत भारत के अंतर्राष्ट्रीय दायित्वों को आगे बढ़ाने के लिए हाथीदांत और उससे निर्मित वस्तुओं के व्यापार और वाणिज्य पर प्रतिबंध लगाता है।

जुलाई महीने में (प्रेस विज्ञप्ति का लिंक: https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2284262&reg=1&lang=1), दो अलग-अलग अभियानों में राजस्थान के सुजानगढ़ में 11 किलोग्राम हाथीदांत और कोलकाता के हावड़ा में देवी-देवताओं की जटिल रूप से तैयार की गई हाथीदांत की दो मूर्तियां जब्त की गई थीं।

डीआरआई ने कर्नाटक के मैसूरु में एक गिरोह का भंडाफोड़ किया था और 4 किलोग्राम हाथीदांत जब्त किए थे।

इन अभियानों की श्रृंखला अवैध वन्यजीव तस्करी के बढ़ते खतरे को रेखांकित करती है और राष्ट्रीय कानूनों और सीआईटीईईएस के अंतर्गत अंतर्राष्ट्रीय दायित्वों के अनुसार भारत की जैव विविधता की रक्षा करने और ऐसे आपराधिक नेटवर्क को नष्ट करने के लिए डीआरआई की अटूट प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

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