कल कुरूड़ से शुरू होगी नंदा देवी लोकजात, 18 सितंबर को पहुंचेगी वेदनी बुग्याल

13 पड़ावों से गुजरकर नंदा सप्तमी पर वेदनी कुंड में होगी विशेष पूजा, 25 सितंबर को देवराड़ा पहुंचेगी उत्सव डोली
–हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट-
थराली, 4 सितम्बर। नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ (नंदानगर) से शनिवार को मां नंदा देवी की लोकजात यात्रा का भव्य शुभारंभ होगा। तीन दिवसीय नंदा मेले के समापन के साथ शुरू होने वाली यह धार्मिक यात्रा 13 पड़ावों से गुजरते हुए नंदा सप्तमी के दिन 18 सितंबर को वेदनी बुग्याल पहुंचेगी। यात्रा की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और विभिन्न पड़ावों पर ग्रामीणों की ओर से लोकजात के स्वागत की व्यवस्था की गई है।
केंद्रीय समिति मां नंदादेवी राजराजेश्वरी बधाण, थराली के अध्यक्ष सुशील रावत और सचिव पृथ्वी सिंह बुटोला ने बताया कि कुरूड़ में 3 से 5 सितंबर तक आयोजित नंदा मेले के बाद शनिवार अपराह्न तीन बजे सिद्धपीठ से देवी की लोकजात रवाना होगी। यात्रा का पहला पड़ाव चरबंग गांव होगा, जहां रात्रि में देवी जागरण आयोजित किया जाएगा।
इसके बाद लोकजात निर्धारित मार्ग पर आगे बढ़ते हुए 13 दिनों में 13 पड़ाव पार करेगी। 14वें दिन नंदा सप्तमी के अवसर पर 18 सितंबर की सुबह यात्रा निर्जन पड़ाव गैरोली पातल से वेदनी बुग्याल के लिए प्रस्थान करेगी। वेदनी कुंड में स्नान और देवी भगवती की विशेष पूजा एवं जात संपन्न होने के बाद यात्रा उसी दिन आली बुग्याल होते हुए वापस लौटेगी। वापसी में पहला पड़ाव बांक गांव होगा।
लोकजात की वापसी यात्रा 25 सितंबर को ढुंगाखोली गांव से भेटा होते हुए नंदा सिद्धपीठ देवराड़ा (थराली) पहुंचेगी। यहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद बधाण की नंदादेवी की उत्सव डोली छह माह के प्रवास के लिए देवराड़ा मंदिर के गर्भगृह में विराजमान होगी। इस अवसर पर देवराड़ा में नंदा देवी मेले का भी आयोजन किया जाएगा।
रावत और बुटोला ने बताया कि यात्रा मार्ग के गांवों और पड़ाव समितियों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है। केंद्रीय समिति वर्ष 2027 में प्रस्तावित श्री नंदादेवी राजजात की तैयारियों में भी जुटी है। राजजात मार्ग पर आवश्यक अवस्थापना सुविधाओं के विकास के प्रस्ताव समिति के माध्यम से सरकार को भेजे जा रहे हैं।
