नफरत के खिलाफ निर्णायक लड़ाई का ऐलान
सामाजिक संगठनों ने कारगी ग्रांट के लोगों से की मुलाकात, एसएसपी से कार्रवाई की मांग करेंगे

देहरादून, 4 सितम्बर। उत्तराखंड इंसानियत मंच और उत्तराखंड महिला मंच के प्रतिनिधियों ने शुक्रवार को कारगी ग्रांट पहुंचकर मुस्लिम समुदाय और स्थानीय लोगों से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने क्षेत्र में पिछले दिनों उत्पन्न हुए सांप्रदायिक तनाव और सोशल मीडिया पर महिलाओं को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों पर चिंता जताते हुए नफरत फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करने का ऐलान किया।
स्थानीय लोगों ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि पिछले दिनों ललित शर्मा नामक व्यक्ति के एक वीडियो में मुस्लिम समुदाय और महिलाओं को लेकर कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं। उनका कहना था कि यदि किसी व्यक्ति से कोई विवाद या नाराजगी है तो इसके लिए पूरे समुदाय को निशाना बनाना उचित नहीं है।
स्थानीय लोगों ने दावा किया कि उन्होंने नारे लगाकर विरोध किया था, लेकिन बाद में उन पर पथराव और महिलाओं से अभद्रता के आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया गया। उन्होंने इन आरोपों को खारिज करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। उनका कहना था कि घटना से संबंधित उपलब्ध वीडियो की भी जांच की जानी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
उत्तराखंड महिला मंच की निर्मला बिष्ट ने कहा कि महिलाओं के प्रति अपमानजनक भाषा किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि इस मामले में कानूनी कार्रवाई के लिए आवश्यक सहयोग किया जाएगा और संबंधित अधिकारियों से मिलकर शिकायत दर्ज कराई जाएगी। कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में लोकतांत्रिक ढंग से धरना-प्रदर्शन भी किया जाएगा।
प्रतिनिधिमंडल ने मो. जाकिर हुसैन, सरवर, तनवीर, इमरान राणा, शाह नजर और दानिश सहित क्षेत्र के कई लोगों से बातचीत की। प्रतिनिधिमंडल में प्रो. एन. राघवेन्द्र, कमला पंत, विमला कोली, निर्मला बिष्ट, हरिओम पाली, परमेन्द्र सिंह कक्कड़ और त्रिलोचन भट्ट शामिल थे।
बैठक में तय किया गया कि सोमवार को प्रतिनिधिमंडल देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और कथित रूप से सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने वाली गतिविधियों पर कार्रवाई की मांग करेगा।
हरिओम पाली ने कहा कि इससे पहले बैरागीवाला की घटना को भी कथित रूप से सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की गई थी। इस संबंध में एसएसपी को ज्ञापन देकर कार्रवाई की मांग की गई थी, लेकिन संगठनों के अनुसार अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
कमला पंत ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर महिलाओं और गर्भस्थ बच्चों को लेकर अत्यंत आपत्तिजनक और हिंसक टिप्पणियां की गई हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी भाषा के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।
दोनों संगठनों ने कहा कि यदि कथित रूप से सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में प्रभावी कानूनी कार्रवाई नहीं की गई तो वे व्यापक आंदोलन करेंगे। संगठनों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर कानून के अनुसार कार्रवाई करने की मांग की है।
