नंदा देवी की बड़ी जात शनिवार से, सिद्धपीठ कुरुड़ में उमड़ा भक्तों का सैलाब
बारह वर्ष बाद बड़ी जात के लिए मां नन्दा की तीनों डोलियां होंगी कैलाश रवाना, 20 सितंबर को होमकुंड में होगी विदाई

–महिपाल गुसाईं–
कुरुड़ (चमोली), 4 सितम्बर। उत्तराखंड की आराध्य देवी भगवती नन्दा की बारह वर्ष बाद आयोजित हो रही बड़ी जात शनिवार से शुरू होगी। मां नन्दा की कैलाश विदाई के इस महाआयोजन का साक्षी बनने के लिए नन्दा धाम सिद्धपीठ कुरुड़ में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। शुक्रवार को मंदिर के गर्भगृह से भगवती नन्दा की डोली बाहर आने के साथ ही समूचा क्षेत्र नन्दामय हो गया।
सिद्धपीठ कुरुड़ स्थित नंदादेवी मंदिर को विशेष रूप से सजाया गया है। शनिवार को विशेष पूजा-अर्चना के बाद दोपहर करीब तीन बजे मां नन्दा की तीनों डोलियां कैलाश के लिए रवाना होंगी। नंदानगर प्रखंड के अलावा दर्शाली, बंड और बधाण सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में नन्दा भक्त कुरुड़ पहुंच गए हैं।

बड़ी जात आयोजन समिति के प्रमुख कर्नल हरेंद्र सिंह और सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर समिति के अध्यक्ष सुखबीर रौतेला के नेतृत्व में हकहकूकधारी और नन्दा घाटी के लोग तैयारियों में जुटे हैं। बारह वर्ष बाद हो रहे इस आयोजन को लेकर क्षेत्र में खासा उत्साह है।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पांच सितम्बर को कुरुड़ से प्रस्थान करने के बाद बड़ी जात विभिन्न पड़ावों से होते हुए 12 सितम्बर को रामणी पहुंचेगी। रामणी में विभिन्न देव डोलियों और छतोलियों का मिलन होगा। यहां से यात्रा सितोल-कनोल होते हुए बधाण क्षेत्र में प्रवेश करेगी। 15 सितम्बर को वाण स्थित लाटू मंदिर में प्रवास होगा। मां नन्दा के ध्वजवाहक माने जाने वाले लाटू देवता का इस यात्रा में विशेष धार्मिक महत्व है।

अगले दिन यात्रा वाण से गैरोली पाताल की ओर बढ़ेगी और 18 सितम्बर को वेदनी बुग्याल पहुंचेगी, जहां सप्तमी की पूजा और पारंपरिक अनुष्ठान होंगे। इसके बाद बड़ी जात भगुवावासा, पातर नचौणियां, कैलवा विनायक, रूपकुंड, ज्यूंरागली और शिलासमुद्र होते हुए होमकुंड पहुंचेगी।
20 सितम्बर को होमकुंड में मां नन्दा की विशेष पूजा-अर्चना के बाद मायके की सौगात चैसिंग्या खाडू को सौंपकर कैलाश के लिए विदा किया जाएगा। इसके बाद जात यात्री वापसी करेंगे और भगवती नन्दा की उत्सव डोली विभिन्न गांवों से होते हुए वापस सिद्धपीठ कुरुड़ पहुंचेगी। डोली के मंदिर पहुंचने के साथ बड़ी जात का विशेष अनुष्ठान संपन्न होगा।
नन्दा क्षेत्र में प्रतिवर्ष मां नन्दा को मायके से कैलाश विदा करने की परंपरा के तहत लोकजात आयोजित होती है, लेकिन अलग-अलग क्षेत्रों की लोकजात के गंतव्य अलग होते हैं। बड़ी जात की विशेषता यह है कि विभिन्न क्षेत्रों के नन्दा भक्त एक साथ होमकुंड तक मां नन्दा की विदाई के लिए जाते हैं।
बड़ी जात को निर्विघ्न संपन्न कराने के लिए प्रशासन और पुलिस ने भी तैयारियां की हैं। कुरुड़ और यात्रा मार्ग पर पुलिस बल तैनात किया गया है तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। कुरुड़ में बाहर से पहुंच रहे श्रद्धालुओं के स्वागत के साथ उनके रहने, ठहरने और अन्य सुविधाओं की भी
