भू-तुल्यकालिक कक्षा से भारत की पहली ‘अंतरिक्ष आंख’ बनेगा ईओएस-05
India is preparing for a significant advance in Earth observation with ISRO’s GSLV-F17 mission, which will carry the advanced EOS-05 satellite into space. The mission marks the 19th flight of India’s Geosynchronous Satellite Launch Vehicle. Weighing about 2,367 kg, EOS-05 will be placed initially in a Sub-Geosynchronous Transfer Orbit and is designed to become India’s first imaging satellite operating from geosynchronous orbit.
जीएसएलवी-एफ17 की 19वीं उड़ान, 2367 किलो वजनी अत्याधुनिक भू-प्रेक्षण उपग्रह को अंतरिक्ष में पहुंचाएगा इसरो
By- Usha Rawat
बेंगलुरु। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) पृथ्वी की निगरानी और अंतरिक्ष से तस्वीरें लेने की अपनी क्षमता में एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाने जा रहा है। इसरो का जीएसएलवी-एफ17 मिशन अत्याधुनिक भू-प्रेक्षण उपग्रह ईओएस-05 को अंतरिक्ष में स्थापित करेगा। इस मिशन की खासियत यह है कि ईओएस-05 भू-तुल्यकालिक कक्षा से पृथ्वी की तस्वीरें लेने वाला भारत का पहला उपग्रह होगा। इसरो ने इसे अत्याधुनिक भू-प्रेक्षण अंतरिक्षयान बताया है।
इसरो की ओर से जारी मिशन विवरण के अनुसार जीएसएलवी-एफ17 भारत के भू-तुल्यकाली उपग्रह प्रमोचन यान यानी जीएसएलवी की 19वीं उड़ान होगी। मिशन का प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, शार के द्वितीय प्रमोचन पैड से किया जाना है। जीएसएलवी-एफ17 ईओएस-05 को सीधे भू-तुल्यकालिक कक्षा में नहीं, बल्कि उप-भू-तुल्यकाली अंतरण कक्षा (सब-जीटीओ) में स्थापित करेगा।

51.7 मीटर ऊंचा, 420.5 टन वजनी रॉकेट
जीएसएलवी-एफ17 तीन चरणों वाला शक्तिशाली प्रमोचन यान है। इसकी कुल ऊंचाई 51.7 मीटर और उड़ान भरते समय वजन करीब 420.5 टन होगा। इसके पहले चरण में एस-139 के साथ चार एल-40एच स्ट्रैप-ऑन मोटर, दूसरे चरण में जीएल-40एचटी और तीसरे चरण में सीयूएस-15 क्रायोजेनिक चरण लगाया गया है। उपग्रह को वायुमंडलीय दबाव और तापीय प्रभावों से सुरक्षित रखने वाली पेलोड फेयरिंग चार मीटर व्यास वाली ओजाइव आकार की मिश्रित संरचना है।
मिशन ब्रोशर में दिए गए प्रणोदन विवरण के मुताबिक पहले चरण के एस-139 में 138 टन प्रणोदक है, जबकि उससे जुड़ी चार एल-40एच मोटरों में कुल 170 टन प्रणोदक है। दूसरे चरण में 42 टन तथा क्रायोजेनिक तीसरे चरण में 15 टन प्रणोदक रहेगा। क्रायोजेनिक चरण में तरल हाइड्रोजन और तरल ऑक्सीजन का इस्तेमाल किया जाता है।

करीब 2367 किलो का ईओएस-05
इस मिशन में भेजे जा रहे ईओएस-05 का वजन लगभग 2,367 किलोग्राम है। जीएसएलवी-एफ17 इसे जिस उप-जीटीओ में पहुंचाएगा, उसका पृथ्वी से निकटतम बिंदु करीब 170 किलोमीटर और दूरस्थ बिंदु 28,934 किलोमीटर निर्धारित किया गया है। कक्षा का झुकाव 19.28 डिग्री और प्रक्षेपण अजीमुथ 104 डिग्री रखा गया है।
मिशन की उड़ान रूपरेखा भी दिलचस्प है। प्रक्षेपण के बाद निर्धारित क्रम में पहले और दूसरे चरण अलग होंगे, पेलोड फेयरिंग हटेगी और इसके बाद क्रायोजेनिक चरण उपग्रह को अपेक्षित ऊंचाई तथा वेग प्रदान करेगा। अंततः क्रायोजेनिक इंजन बंद होने के बाद ईओएस-05 रॉकेट से अलग होकर अपनी निर्धारित कक्षा की ओर बढ़ेगा। मिशन ब्रोशर के तीसरे पृष्ठ पर इस पूरी उड़ान प्रक्रिया को चित्रात्मक रूप से दर्शाया गया है।
अंतरिक्ष से पृथ्वी पर भारत की नई निगाह
ईओएस-05 की सबसे बड़ी विशेषता उसकी कक्षा और प्रतिबिंबन क्षमता है। अब तक भारत के अनेक भू-प्रेक्षण उपग्रह पृथ्वी की अपेक्षाकृत निचली कक्षाओं से आंकड़े और तस्वीरें उपलब्ध कराते रहे हैं, लेकिन इसरो के अनुसार ईओएस-05 भू-तुल्यकालिक कक्षा से प्रतिबिंबन करने वाला देश का पहला उपग्रह होगा। इस लिहाज से यह मिशन भारतीय भू-प्रेक्षण कार्यक्रम में एक नया अध्याय जोड़ने वाला है।
हालांकि इसरो के उपलब्ध मिशन ब्रोशर में ईओएस-05 के कैमरों, सेंसरों, स्थानिक विभेदन क्षमता और उसके विशिष्ट उपयोगों का विस्तृत तकनीकी विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए इन क्षमताओं के बारे में अभी अनुमान लगाना उचित नहीं होगा। लेकिन इसरो द्वारा इसे अत्याधुनिक भू-प्रेक्षण अंतरिक्षयान और भू-तुल्यकालिक कक्षा से भारत का पहला इमेजिंग उपग्रह बताया जाना ही इस मिशन के तकनीकी महत्व को रेखांकित करता है।

