शिक्षक दिवस पर विशेष : पिता पुत्र दोनों विद्वान शिक्षक थे

-गोविन्द प्रसाद बहुगुणा-
यह अच्छी परंपरा की शुरुआत हुई थी कि एक शिक्षक के जन्मदिवस को राष्ट्रीय स्तर पर बतौर उत्सव मनाया जाय क्योंकि एक शिशक राष्ट्र के सर्वोच्च पद राष्ट्रपति के पद तक भी पहुंचा I
क्योंकि डॉ० सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी भी पहले शिक्षक थे, जो भारत के राष्ट्रपति का पद हासिल कर पाए, इसी तथ्य को देश के सभी शिक्षकों ने भी अपना सामान माना I अब यह भ्रम पालना भी निरर्थक है कि डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितम्बर को हुआ कि नहीं क्योंकि डॉ० राधाकृष्णन जी के बेटे डा०सर्वपल्ली गोपाल ने ही यह लिखकर भ्रम पैदा किया कि यद्यपि मेरे पिता जी की ऑफिसियल डेट ऑफ़ बिर्थ 5 सितम्बर ही दर्ज हो गयी थी लेकिन उनकी वास्तविक जन्म तिथि सितंबर 20, 1887 थीl
दरअसल उस जमाने के लोगों की दो- दो डेट आफ बर्थ होती थी, जो स्कूल में मास्टर लोग बच्चे के एडमिशन के समय उसके माता पिताओं द्वारा बताई गई अनुमानित जन्म तिथि होती थी —इस मामले में आज भी बहुत से लोग * द्विज* ही मिलेंगे।
डॉ सर्वपल्ली गोपाल सुविख्यात भारतीय इतिहासकार और बायोग्राफर थे ,वह भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति और तत्पश्चात द्वितीय राष्ट्रपति डॉ० सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के सुपुत्र थे। डॉ० गोपाल की माता जी का नाम श्रीमती शिव कामू राधाकृष्णन था। ऑक्सफोर्ड के Balliol कॉलेज से PhD हासिल करने के बाद वह आंध्र विश्वविद्यालय में नेशनल डायरेक्टर बने और फिर जवाहरलाल नेहरु यूनिवर्सिटी में Archives of India, प्रोफेसर emeritus बने
यह भी एक अच्छा संयोग था कि पिता पुत्र दोनों प्रारम्भ में शिक्षक ही थे I डॉ राधाकृष्णन जी की गीता पर लिखी टीका मुझे बहुत पसंद है मैने 1964 में मात्र 4/रु में यह किताब इलाहाबाद में खरीदी और फिर अपने चाचा जी स्व सुंदरलाल जी बहुगुणा प्रधानाचार्य इंटर कॉलेज उत्तरकाशी को शिक्षक दिवस पर भेंट की तो वे बहुत खुश हुए ।मेरे चाचा जी बहुत अध्ययनशील व्यक्ति थे ,उनके देहावसान के बाद उनकी बहुत सी पुस्तकें चाची ने मुझे विरासत के बतौर दे दी थी। गीता की यह पुस्तक डॉ राधाकृष्णन जी ने गांधी जी को समर्पित की है …..GPB
