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हबल की आंखों से ब्रह्मांड के अद्भुत नजारे

 

– आदित्य सिंह रावत 

अंतरिक्ष की अथाह गहराइयों में कहीं तारों का जन्म हो रहा है, कहीं आकाशगंगाएं आपस में टकरा रही हैं और कहीं मरते हुए तारे रंग-बिरंगी गैसों का अद्भुत संसार रच रहे हैं। हबल अंतरिक्ष दूरबीन ने तीन दशकों से अधिक समय में ब्रह्मांड के ऐसे अनगिनत रहस्यों को कैमरे में कैद किया है। प्रस्तुत चित्र इन्हीं विस्मयकारी खगोलीय नजारों की झलक पेश करते हैं।

इन तस्वीरों में सर्पिल और अनियमित आकाशगंगाओं से लेकर तारों से भरे घने समूह और चमकती नीहारिकाएं दिखाई देती हैं। कुछ चित्रों में दूरस्थ आकाशगंगाओं का प्रकाश विशाल आकाशगंगा समूहों के गुरुत्वाकर्षण के कारण मुड़ता हुआ नजर आता है। इस प्रभाव को वैज्ञानिक ‘गुरुत्वीय लेंसिंग’ कहते हैं। यह तकनीक अत्यंत दूर स्थित और सामान्य परिस्थितियों में दिखाई न देने वाली आकाशगंगाओं के अध्ययन में मदद करती है।

चित्रों में मंगल ग्रह भी अपनी विशिष्ट लालिमा के साथ दिखाई दे रहा है। हबल केवल सुंदर तस्वीरें लेने वाली दूरबीन नहीं है। इसके अवलोकनों ने ब्रह्मांड की आयु, उसके विस्तार की गति, तारों के जन्म और मृत्यु, आकाशगंगाओं के विकास तथा रहस्यमय डार्क एनर्जी को समझने में वैज्ञानिकों की महत्वपूर्ण मदद की है।

वर्ष 1990 में अंतरिक्ष में स्थापित हबल ने मानवता को ब्रह्मांड देखने की एक नई दृष्टि दी। इसकी तस्वीरें याद दिलाती हैं कि पृथ्वी विशाल ब्रह्मांड का एक बेहद छोटा-सा हिस्सा है।

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