राजजात नहीं, लोकजात भी नहीं—कुरूड़ से ‘बड़ी जात’ के रूप में कैलाश की ओर चली मां नंदा
भारी बारिश के बावजूद कुरूड़ में उमड़ा ऐतिहासिक जनसैलाब, दो चौसिंगा खाडू भी यात्रा में शामिल
–हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट-
थराली/नंदधाम कुरूड़, 5 सितम्बर। वर्ष 2026 में न तो श्री नंदादेवी राजजात यात्रा का आयोजन हुआ और न ही शनिवार को नंदधाम कुरूड़ से नंदा लोकजात के नाम से यात्रा रवाना हुई। महीनों से चले आ रहे विवाद, दावों और असमंजस के बीच आखिरकार मां नंदा राजराजेश्वरी की कैलाश यात्रा ने ‘बड़ी जात’ के रूप में नंदधाम कुरूड़ से प्रस्थान किया। भारी बारिश के बावजूद सिद्धपीठ कुरूड़ में जिस संख्या में नंदा भक्त उमड़े, उसने इस यात्रा को पहले ही दिन ऐतिहासिक स्वरूप दे दिया।
स्थानीय लोगों और आयोजन से जुड़े पदाधिकारियों का दावा है कि वर्ष 2000 और 2014 की श्री नंदादेवी राजजात के दौरान भी कुरूड़ में इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालु नहीं पहुंचे थे, जितने इस बार नंदा राजराजेश्वरी बड़ी जात की विदाई के अवसर पर दिखाई दिए। कुरूड़ मंदिर परिसर से लेकर आसपास के क्षेत्रों तक नंदा भक्तों का सैलाब नजर आया।

विश्व की सबसे लंबी और कठिन धार्मिक यात्राओं में शुमार मां नंदा की कैलाश यात्रा को लेकर इस वर्ष लंबे समय से भ्रम और विवाद की स्थिति बनी हुई थी। यात्रा के स्वरूप और आयोजन को लेकर अलग-अलग पक्षों के अपने दावे थे और इस मुद्दे पर राजनीति भी खूब हुई। श्री नंदादेवी राजजात समिति नौटी ने इस वर्ष बसंत पंचमी से पहले ही पत्रकार वार्ता कर वर्ष 2026 में प्रस्तावित राजजात को 2027 में आयोजित करने की घोषणा कर दी थी। इसके बाद कई महीनों तक राजजात के आयोजन को लेकर बहस चलती रही।
इसी बीच नंदाक और बधाण क्षेत्र के एक बड़े वर्ग ने वर्ष 2026 में नंदा राजराजेश्वरी बड़ी जात आयोजित करने की घोषणा करते हुए यात्रा का कार्यक्रम जारी कर दिया। दूसरी ओर बधाण के ही एक अन्य पक्ष ने वर्ष 2026 में नंदा लोकजात यात्रा आयोजित करने की घोषणा की और नंदा सिद्धपीठ देवराड़ा से उसका अलग यात्रा कार्यक्रम जारी कर दिया। एक ही समय में दो अलग-अलग यात्रा कार्यक्रम सामने आने से नंदा भक्तों में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई थी।
ऐसे में सभी की निगाहें 5 सितम्बर पर टिकी थीं कि नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ से मां नंदा की यात्रा आखिर किस स्वरूप और नाम से आगे बढ़ेगी। शनिवार को कुरूड़ में उमड़े श्रद्धालुओं के भारी जनसैलाब ने बड़ी जात आयोजन समिति का उत्साह बढ़ा दिया और विधि-विधान तथा पूजा-अर्चना के बाद मां नंदा राजराजेश्वरी की डोली बड़ी जात के रूप में अपने अगले पड़ाव के लिए रवाना हुई।
यात्रा की एक और महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि बधाण की नंदा डोली के साथ दो चौसिंगा खाडू भी चल रहे हैं। इन्हें देखते हुए आयोजकों और श्रद्धालुओं का मानना है कि यात्रा अब आगे बढ़ते हुए होमकुंड तक जाएगी। परंपरा के अनुसार होमकुंड में मां नंदा की पूजा-अर्चना के बाद चौसिंगा खाडुओं को भेंट-पवाड़े के साथ कैलाश की ओर विदा किया जाता है।
नंदधाम कुरूड़ से शुरू हुई नंदा राजराजेश्वरी की बड़ी जात कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आयोजन से जुड़े लोगों का कहना है कि भारी बारिश और कठिन परिस्थितियों के बावजूद जिस तरह श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी, उससे बड़ी संख्या में नंदा भक्तों का इस वर्ष बड़ी जात के प्रति समर्थन दिखाई दिया है।
यात्रा के पहले ही चरण में व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठे। आयोजकों के अनुसार कुरूड़ में बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने, भोजन और अन्य बुनियादी जरूरतों के अनुरूप पर्याप्त सरकारी व्यवस्थाएं नहीं थीं। देश के विभिन्न राज्यों से नंदा भक्त 4 सितम्बर से ही कुरूड़ पहुंचने लगे थे। ऐसी स्थिति में कुरूड़, नंदानगर और आसपास के क्षेत्रों के लोगों ने श्रद्धालुओं के ठहरने से लेकर भोजन-पानी तक की व्यवस्था में सहयोग किया। स्थानीय लोगों के इस आतिथ्य और सहयोग की बाहर से आए श्रद्धालुओं ने भी सराहना की।
शनिवार को बधाण की नंदा राजराजेश्वरी की डोली के साथ ही कुरूड़ मंदिर से दशोली और बंड की नंदा देवियों की डोलियां भी बड़ी जात में शामिल होने के लिए अपने-अपने निर्धारित पड़ावों की ओर रवाना हुईं। कार्यक्रम के अनुसार ये दोनों डोलियां 15 सितम्बर को लाटू धाम वांण में बधाण की नंदा डोली से मिलेंगी। इसके बाद तीनों डोलियां एक साथ बड़ी जात के अगले चरण की यात्रा पर आगे बढ़ेंगी।
“उम्मीद से कहीं अधिक पहुंचे नंदा भक्त”
श्री नंदादेवी राजराजेश्वरी बड़ी जात यात्रा समिति के अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह रावत ने कहा कि भारी बारिश के बावजूद जिस संख्या में नंदा भक्त कुरूड़ पहुंचे, उसकी समिति को भी उम्मीद नहीं थी। चार सितम्बर से ही देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालुओं का कुरूड़ और नंदानगर क्षेत्र में पहुंचना शुरू हो गया था।
उन्होंने कहा कि कुरूड़ पहुंचे श्रद्धालु बड़ी जात यात्रा में शामिल होने के उद्देश्य से आए हैं और आने वाले दिनों में यात्रा के आगे बढ़ने के साथ श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है।
कर्नल रावत ने यात्रा व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन के रवैये पर नाराजगी भी जताई। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जिलाधिकारी से वार्ता कर यात्रा के आगामी पड़ावों पर श्रद्धालुओं के लिए ठहरने, पेयजल, भोजन, स्वास्थ्य, स्वच्छता और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की जाएगी।
