तीन राहों से कैलाश की ओर बढ़ रहीं नंदा की डोलियां, गांव-गांव उमड़ रही आस्था
भेंट-पवाड़ा लेकर पहुंच रहे श्रद्धालु, जगह-जगह नंदा कौथिग और जागरणों का आयोजन

–हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट-
थराली/नंदाधाम कुरूड़, 8 सितम्बर। नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ से कैलाश यात्रा पर निकली श्री नंदा राजराजेश्वरी बड़ी जात यात्रा के तहत नंदा देवी की तीनों डोलियां अपने-अपने चौथे पड़ाव पर पहुंच गई हैं। यात्रा मार्ग के गांवों और कस्बों में नंदा-भगवती के भक्त डोलियों का भव्य एवं पारंपरिक स्वागत कर रहे हैं। काखड़ी, मुगरी, कलेऊ, खाजा सहित स्थानीय स्तर पर उत्पादित खाद्य सामग्री और अन्य वस्तुएं भेंट-पवाड़ा के रूप में देवी को अर्पित की जा रही हैं। श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर मनौतियां भी मांग रहे हैं।
यात्रा के दौरान कई गांवों में नंदा कौथिग (मेलों) का आयोजन किया जा रहा है। नंदा के जागर, झोड़े और चांचड़ी से वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। इन दिनों चमोली के गांव-गांव नंदामय नजर आ रहे हैं।
दशोली की डोली 15 किमी की यात्रा कर पहुंची सेमा
नंदा शक्तिपीठ कुरूड़ से शनिवार को रवाना हुई दशोली परगना की नंदा देवी की उत्सव डोली मंगलवार को द्वादशी पर्व पर अपने चौथे पड़ाव नंदानगर के काण्डई गांव से अगले पड़ाव के लिए रवाना हुई। इससे पूर्व काण्डई और आसपास के गांवों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने मां नंदा की पूजा-अर्चना कर भेंट-पवाड़ा चढ़ाया और मनौतियां मांगीं।
करीब 11.30 बजे काण्डई से रवाना हुई यात्रा खलतरा, मोठा और चाका होते हुए करीब 15 किलोमीटर की दूरी तय कर देर शाम सेमा गांव पहुंची। यहां ग्रामीणों और नंदा भक्तों ने पारंपरिक ढंग से डोली का भव्य स्वागत किया। पूरे यात्रा मार्ग पर जगह-जगह श्रद्धालुओं ने डोली को रोककर मां नंदा की आराधना और पूजा-अर्चना की।
यात्रा के साथ मंदिर कमेटी कुरूड़ के अध्यक्ष सुखबीर सिंह रौतेला, पुजारी मुंशी चंद्र गौड़, दिनेश गौड़, राजेंद्र प्रसाद गौड़, गोविंद गौड़, प्रकाश गौड़, जनार्दन गौड़, कमेटी के बिरेंद्र बिष्ट सहित बड़ी संख्या में यात्री चल रहे हैं। बुधवार को दशोली की डोली सेमा से बैरासकुंड, इतमोली और दूबड़खेत होते हुए अपने पांचवें पड़ाव मटेई गांव पहुंचेगी।
भेटी पहुंची बधाण की नंदा, सोल डुंग्री में होगा देवी जागरण
बधाण पट्टी की मां नंदा राजराजेश्वरी की उत्सव डोली भी अपने तीसरे पड़ाव उस्तोली से रवाना होकर सरपाणी और लाखी होते हुए चौथे पड़ाव भेटी गांव पहुंच गई है। करीब आठ किलोमीटर लंबे यात्रा मार्ग पर जगह-जगह नंदा भक्तों ने डोली का स्वागत कर देवी की आराधना की।
बुधवार को यात्रा करीब 15 किलोमीटर की पैदल दूरी तय कर सोल डुंग्री गांव पहुंचेगी। यहां रात्रि प्रवास के दौरान देवी जागरण का आयोजन कर मां नंदा की स्तुति की जाएगी।
बण्ड की डोली नोरख पहुंची, बेटियों-बहनों ने किए नंदा के दर्शन
नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ से निकली परगना बण्ड की नंदा देवी की तीसरी डोली मंगलवार सुबह करीब 10 बजे दशोली विकासखंड के अपने तीसरे पड़ाव दिगोली गांव से चौथे पड़ाव के लिए रवाना हुई। यात्रा ल्वाह, क्योठा, गड़ोरा, मल्ला और आक्थला होते हुए करीब 12 किलोमीटर की पैदल दूरी तय कर देर शाम नोरख गांव पहुंची। यहां नंदा भक्तों ने देवयात्रा का पारंपरिक ढंग से भव्य स्वागत किया।
पूरे यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं ने अपनी आस्था के अनुरूप मां नंदा की पूजा-अर्चना कर मनौतियां मांगीं। देवी के दर्शनों के लिए दूर-दराज के गांवों और कस्बों से बड़ी संख्या में बेटियां और बहनें भी नंदा से भेंट करने संबंधित पड़ावों पर पहुंच रही हैं। नोरख गांव में देवी की विशेष पूजा-अर्चना के साथ रात्रि जागरण का आयोजन किया गया।
बुधवार को यात्रा नोरख से मल्ला, आक्थला, नंदा देवी मंदिर नंदुली और रैतोली होते हुए करीब 16 किलोमीटर की पैदल यात्रा तय कर कम्यार गांव पहुंचेगी।
तीनों नंदा डोलियों की यात्रा को लेकर गांव-गांव में खासा उत्साह है। ध्वनि यंत्रों पर नंदा की स्तुति के पारंपरिक गीत गूंज रहे हैं, वहीं ग्रामीण झोड़े और चांचड़ी गाकर आराध्य देवी का गुणगान कर रहे हैं। डोलियों के साथ चल रहे नंदा पुजारी जगह-जगह श्रद्धालुओं की पूजा संपन्न करा रहे हैं। नंदा के स्वागत में उमड़ रही आस्था ने इन दिनों पूरे क्षेत्र को उत्सव और भक्ति के रंग में रंग दिया है।
