ऋषिकुल बनेगा आयुर्वेद-योग और भारतीय ज्ञान का बड़ा केंद्र
दो साल में मास्टर प्लान पूरा करने का लक्ष्य, आयुर्वेदिक चिकित्सा, मेडिकल टूरिज्म, योग-ध्यान और शोध की होंगी आधुनिक सुविधाएं
ऋषिकुल बनेगा आयुर्वेद-योग और भारतीय ज्ञान का बड़ा केंद्र
हरिद्वार, 11 सितम्बर। हरिद्वार स्थित श्री मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान, ऋषिकुल को आयुर्वेद, योग और भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रमुख अध्ययन एवं शोध केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। प्रस्तावित मास्टर प्लान के तहत यहां आयुर्वेदिक चिकित्सा, मेडिकल टूरिज्म, योग-ध्यान, ज्योतिष, वैदिक गणित और भारतीय दर्शन से जुड़ी उच्च स्तरीय शैक्षणिक एवं शोध सुविधाएं विकसित की जाएंगी। परियोजना को दो वर्ष के भीतर चरणबद्ध तरीके से पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में ऋषिकुल के समग्र विकास के प्रस्तावित मास्टर प्लान की समीक्षा की। बैठक में संस्थान के नए स्वरूप और प्रस्तावित गतिविधियों का प्रस्तुतीकरण किया गया। योजना में ऋषिकुल को शिक्षा, शोध, आयुर्वेदिक चिकित्सा, वेलनेस, योग एवं ध्यान, भारतीय दर्शन, वैदिक एवं शास्त्रीय अध्ययन तथा कला-संस्कृति के समन्वित केंद्र के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई है।
मास्टर प्लान में परिसर के वास्तुशिल्प को भी विशेष महत्व दिया गया है। भवनों का बाहरी स्वरूप प्राच्य और पारंपरिक स्थापत्य शैली पर आधारित होगा, जबकि भीतर की शैक्षणिक, चिकित्सा और अन्य सुविधाएं आधुनिक होंगी। इस तरह परिसर में प्राचीन भारतीय स्थापत्य और आधुनिक सुविधाओं का समन्वय किया जाएगा।
हरिद्वार में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को ध्यान में रखते हुए संस्थान को मेडिकल और वेलनेस टूरिज्म से भी जोड़ने की योजना है। यहां आने वाले लोगों को आयुर्वेद, योग, भारतीय ज्ञान परंपरा और अध्यात्म को समझने तथा अनुभव करने की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने परियोजना के अलग-अलग कार्यों की स्पष्ट समय-सीमा तय कर नियमित समीक्षा करने और सभी कार्य दो वर्ष में पूरे करने के निर्देश दिए हैं।
