पर्यावरणविज्ञान प्रोद्योगिकी

श्रीनगर की हवा पर प्रदूषण का दबाव, 169 दिन सीमा से ऊपर रहा PM2.5

A one-year air quality study (15 Sept 2025–15 Sept 2026) by HNB Garhwal University’s HASPRL lab in Srinagar Garhwal reveals concerning pollution levels in the Himalayan valley. Average PM2.5 was 73.30 µg/m³ (exceeded limits on 169 days) and PM10 was 100.48 µg/m³ (146 days). Ground-level ozone breached the 100 µg/m³ eight-hour standard on 26 days, peaking at an alarming 634.13 µg/m³ on 19 December 2025. Winter inversion trapped particulates, while summer photochemistry raised ozone and CO. Scientists stress continuous monitoring of extreme events in this sensitive region and urge reduced local emissions.

26 दिन मानक से अधिक रहा ओजोन, 19 दिसंबर को 634 माइक्रोग्राम तक पहुंचा आठ घंटे का औसत

 

 

श्रीनगर (गढ़वाल), 15 सितम्बर ( आशुतोष बहुगुणा ) । हिमालयी क्षेत्रों की साफ-सुथरी हवा को लेकर बनी आम धारणा के बीच श्रीनगर गढ़वाल से सामने आए एक साल के वायु गुणवत्ता आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय की हिमालयी वातावरणीय एवं अंतरिक्ष भौतिकी शोध प्रयोगशाला (एचएएसपीआरएल) के अध्ययन में पीएम2.5 और पीएम10 प्रमुख प्रदूषक पाए गए, जबकि कुछ दिनों में धरातलीय ओजोन का स्तर भी असामान्य रूप से ऊंचा दर्ज किया गया।

प्रयोगशाला ने 15 सितम्बर 2025 से 15 सितम्बर 2026 तक दर्ज आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर मंगलवार को भौतिकी विभाग के चौरास परिसर में पांचवां ग्रीनहाउस गैस एवं वायु गुणवत्ता सूचना बुलेटिन जारी किया। अध्ययन में 339 वैध दिनों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।

आंकड़ों के अनुसार पीएम2.5 की औसत सांद्रता 73.30 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और पीएम10 की 100.48 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रही। पीएम2.5 ने 169 दिन और पीएम10 ने 146 दिन निर्धारित 24 घंटे की सीमा पार की। इससे संकेत मिलता है कि हिमालयी घाटियों में भी महीन धूल और दूसरे कणीय प्रदूषकों की समस्या को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

ओजोन के आंकड़े भी महत्वपूर्ण रहे। इसका आठ घंटे का औसत 26 दिन यानी कुल वैध दिनों के 7.7 प्रतिशत समय केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की 100 माइ्रोग्राम प्रति घन मीटर की निर्धारित सीमा से अधिक रहा।

19 दिसंबर को ओजोन में असामान्य उछाल

अध्ययन में सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा 19 दिसंबर 2025 का रहा। इस दिन ओजोन का आठ घंटे का औसत 634.13 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया, जो निर्धारित सीमा से छह गुना से भी अधिक था। इसी दिन प्रति घंटे ओजोन की अधिकतम सांद्रता 880 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से ऊपर दर्ज की गई।

वैज्ञानिकों के अनुसार सर्दियों में घाटी के भीतर प्रदूषकों के फंसने, स्थानीय स्तर पर बायोमास जलाने और विशेष मौसमीय परिस्थितियों की इस असामान्य घटना में भूमिका हो सकती है। हालांकि इसके वास्तविक कारणों की पुष्टि के लिए विस्तृत वैज्ञानिक विश्लेषण आवश्यक बताया गया है।

सर्दियों में कणीय प्रदूषण का ज्यादा दबाव

अध्ययन में मौसम के साथ प्रदूषण का स्वरूप बदलता दिखाई दिया। सर्दियों में तापमान प्रतिलोमन और वायुमंडलीय स्थिरता के कारण प्रदूषक घाटी में फंसे और पीएम का स्तर बढ़ा। गर्मियों में अधिक तापमान, धूल और तेज सौर विकिरण से जुड़ी प्रकाश-रासायनिक प्रक्रियाओं के कारण ओजोन और कार्बन मोनोऑक्साइड में वृद्धि देखी गई। मानसून में बारिश से हवा में मौजूद कणों के साफ होने के कारण पीएम का स्तर अपेक्षाकृत कम रहा।

कार्बन मोनोऑक्साइड भी 22 दिन निर्धारित सीमा से अधिक दर्ज हुई। इसके विपरीत नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, अमोनिया और बेंजीन की औसत सांद्रता केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के संबंधित मानकों के भीतर रही।

ऊपर जीवनरक्षक, धरातल पर प्रदूषक है ओजोन

ओजोन परत संरक्षण दिवस के अवसर पर डॉ. आलोक सागर गौतम ने बताया कि ओजोन का प्रभाव उसकी ऊंचाई पर निर्भर करता है। समतापमंडल में मौजूद ओजोन सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से पृथ्वी पर जीवन की रक्षा करता है, लेकिन धरातल के पास अधिक मात्रा में मौजूद ओजोन स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए हानिकारक वायु प्रदूषक बन जाता है। इसे उन्होंने सरल शब्दों में—“अच्छा ओजोन ऊपर, हानिकारक ओजोन नीचे” बताया।

डॉ. गौतम के अनुसार हिमालय जैसे संवेदनशील क्षेत्र में केवल वार्षिक औसत के आधार पर वायु गुणवत्ता का आकलन पर्याप्त नहीं है। अचानक होने वाली अत्यधिक प्रदूषण और ओजोन की घटनाओं की लगातार निगरानी जरूरी है। उपग्रह और जमीन पर स्थापित उपकरणों से मिले आंकड़ों को जोड़कर हिमालयी वायुमंडल, पराबैंगनी विकिरण, ओजोन और जलवायु परिवर्तन के संबंधों को अधिक बेहतर ढंग से समझा जा सकता है।

उन्होंने पुराने रेफ्रिजरेटर और एयर कंडीशनर को अनुचित तरीके से नष्ट न करने, रेफ्रिजरेंट गैसों की सुरक्षित रिकवरी कराने और वाहन उत्सर्जन सहित स्थानीय प्रदूषण स्रोतों को कम करने की जरूरत भी बताई।

बुलेटिन जारी करते हुए भौतिकी विभागाध्यक्ष प्रो. त्रिलोक चंद्र उपाध्याय ने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान से प्राप्त जानकारी समाज तक पहुंचनी चाहिए। उन्होंने डॉ. गौतम और उनकी शोध टीम के अमनदीप विश्वकर्मा, अंकित कुमार और सरस्वती रावत के प्रयासों की सराहना की।

एक नजर में सालभर की हवा

339 दिन के वैध आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इनमें 169 दिन पीएम2.5 और 146 दिन पीएम10 निर्धारित सीमा से अधिक रहा। ओजोन ने 26 दिन आठ घंटे की निर्धारित सीमा पार की, जबकि कार्बन मोनोऑक्साइड 22 दिन सीमा से ऊपर रहा। पीएम2.5 का सालाना औसत 73.30 और पीएम10 का 100.48 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। 19 दिसंबर 2025 को ओजोन का आठ घंटे का औसत 634.13 और अधिकतम प्रति घंटे का स्तर 880 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक दर्ज हुआ।

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