कृत्रिम बुद्धिमत्ता से आसान होगी आयुर्वेद की जानकारी, शोध और उपचार
At the citizen-facing level, the MAISP Chatbot is designed to make Ayush-related information, including Ayurveda, readily accessible through a conversational interface. The ARP Research Assistant, a GenAI-based assistant, extends the Ayush Research Portal, helping researchers navigate Ayurveda and other Ayush literature more effectively. The eLMS Chatbot introduces AI-based Student Life Cycle Management for Ayurveda and other Ayush education institutions, while the e-CHARAK Chatbot functions as a medicinal-plant trade assistant, connecting conversational AI with the ecosystem that underpins Ayurvedic pharmacology. Yoga Saarthi serves as a yoga recommendation AI chatbot, and Nivesh Saarthi serves as an AI assistant for investment in the Ayush sector. Together, these chatbots demonstrate the expansion of Ayush Grid from digital portals towards interactive, intelligent and user-oriented AI services.
चैटबॉट बताएंगे योग से औषधीय पौधों तक की जानकारी, 22 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध होंगी डिजिटल सेवाएं
नई दिल्ली, 19 सितम्बर। आयुर्वेद और अन्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में आयुष मंत्रालय ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल बढ़ाना शुरू किया है। इसका उद्देश्य आयुर्वेदिक ज्ञान की जगह तकनीक को खड़ा करना नहीं, बल्कि शोध, उपचार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में इस ज्ञान को अधिक आसानी से उपलब्ध और उपयोगी बनाना है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार आयुष ग्रिड से तैयार डिजिटल आधार को आगे बढ़ाते हुए स्वास्थ्य सेवा, अनुसंधान, शिक्षा, सूचना और निवेश के क्षेत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सेवाएं विकसित की जा रही हैं। इसके लिए अलग-अलग काम करने वाले कई डिजिटल सहायक तैयार किए गए हैं।
एमएआईएसपी चैटबॉट आम लोगों को बातचीत के जरिए आयुर्वेद सहित आयुष से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराएगा। एआरपी रिसर्च असिस्टेंट शोधकर्ताओं को आयुर्वेद और अन्य आयुष विषयों से संबंधित शोध साहित्य खोजने और समझने में मदद करेगा। ई-एलएमएस चैटबॉट शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों से जुड़ी व्यवस्थाओं में उपयोगी होगा, जबकि ई-चरक औषधीय पौधों के व्यापार और आयुर्वेदिक औषध विज्ञान से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराएगा। ‘योग सारथी’ योग संबंधी सुझाव और ‘निवेश सारथी’ आयुष क्षेत्र में निवेश संबंधी जानकारी देने के लिए विकसित किए गए हैं।
मंत्रालय अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जरिए आवाज आधारित इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड, बीमारियों के रुझान की पहचान और व्यक्ति की जरूरत के अनुरूप उपचार में सहायता जैसी संभावनाओं पर भी काम कर रहा है। इसके लिए ‘इंडियाएआई इनोवेशन चैलेंज’ के माध्यम से विशेष समाधान विकसित किए जा रहे हैं।
आयुष मंत्रालय के कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित आयुर्वेदिक निर्णय सहायता मॉडल को विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से तैयार स्वास्थ्य संबंधी वैश्विक केसबुक में भी स्थान मिला है। इसमें प्रमाण आधारित आयुर्वेदिक जानकारी खोजने और चिकित्सकीय निर्णय में सहायता के लिए आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाएं बताई गई हैं।
मंत्रालय ने इंडियाएआई और डिजिटल इंडिया भाषिणी के साथ भी सहयोग किया है। भाषिणी की मदद से आयुष ग्रिड के पोर्टल अब भारत की 22 अनुसूचित भाषाओं में उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे चिकित्सकों और विद्यार्थियों के साथ आम लोगों को भी अपनी भाषा में आयुष सेवाओं तक पहुंचने में सुविधा होगी।
मंत्रालय का कहना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उद्देश्य पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान का स्थान लेना नहीं, बल्कि उसे अधिक प्रमाण आधारित, खोजने योग्य और सुलभ बनाकर भारत सहित दुनिया भर के लोगों तक पहुंचाना है।

