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शरीर के तरल पदार्थों में मौजूद सूक्ष्म ‘पाउच’ से मिल सकता है कैंसर का शुरुआती संकेत

Indian scientists have identified a promising biosensor approach for early detection of intestinal cancer using extracellular vesicles—tiny particles released by cells into blood and stool. Cancer cells shed at least twice as many of these vesicles as normal cells. The vesicles from cancer cells carry shorter hyaluronan sugar chains (under 500 nm) and are more flexible than those from healthy cells. Led by Dr. Tatini Rakshit of Shiv Nadar Institute of Eminence, with collaborators from SN Bose National Centre, Saha Institute, and IIT Bhilai, the study was published in the Journal of Physical Chemistry Letters. This non-invasive method could enable early cancer detection from body fluids, though further research is needed before clinical use.

वैज्ञानिकों ने विकसित किया नया जैव-संवेदी तरीका, रक्त और मल में मौजूद सूक्ष्म कणों से आंत के कैंसर की शुरुआती पहचान की संभावना

ज्योति रावत

नई दिल्ली। शरीर के रक्त और मल जैसे तरल पदार्थों में मौजूद बेहद छोटे कण भविष्य में कैंसर की शुरुआती पहचान में मददगार साबित हो सकते हैं। भारतीय वैज्ञानिकों के एक अध्ययन में पाया गया है कि कैंसर कोशिकाओं से निकलने वाले चीनी जैसे अणुओं से ढके सूक्ष्म पाउच सामान्य कोशिकाओं से निकलने वाले पाउच से अलग विशेषताएं रखते हैं। इनकी पहचान के आधार पर कैंसर का पता लगाने की नई जांच विकसित करने की संभावना है।

कोशिकाएं अपने आसपास बेहद छोटे थैलीनुमा कण छोड़ती हैं, जिन्हें ‘एक्स्ट्रासेल्युलर वेसीकल्स’ कहा जाता है। कैंसर कोशिकाएं सामान्य कोशिकाओं की तुलना में शरीर के तरल पदार्थों में कम से कम दोगुने ऐसे कण छोड़ सकती हैं। यही कारण है कि वैज्ञानिक इन्हें कैंसर के संभावित जैव-संकेतक के रूप में देख रहे हैं। खासकर आंत के कैंसर की शुरुआती पहचान में इनकी उपयोगिता की संभावना तलाशी जा रही है।

इन सूक्ष्म कणों की सतह पर ‘हयालूरोनन’ नामक शर्करा अणु पाए जाते हैं। शोध के अनुसार कैंसर की स्थिति में इन अणुओं की संरचना और लंबाई में होने वाले बदलाव ट्यूमर की प्रगति से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दे सकते हैं।

शिव नादर इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस की डॉ. तातिनी रक्षित की प्रयोगशाला ने एसएन बोस नेशनल सेंटर फॉर बेसिक साइंसेज, साहा इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर फिजिक्स और आईआईटी भिलाई के वैज्ञानिकों के सहयोग से कैंसर कोशिकाओं से निकलने वाले इन सूक्ष्म कणों का अध्ययन किया। शोध को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के इंस्पायर फैकल्टी अनुदान से सहायता मिली।

वैज्ञानिकों ने पाया कि एक कैंसर कोशिका से निकलने वाले इन कणों पर हयालूरोनन की बहुत छोटी श्रृंखलाएं मौजूद थीं, जिनकी लंबाई 500 नैनोमीटर से कम थी। ऐसे कण सामान्य कोशिकाओं से निकलने वाले कणों की तुलना में अधिक लचीले भी पाए गए। यह विशेषता शरीर में इनके आवागमन और कोशिकाओं के साथ संपर्क को प्रभावित कर सकती है।

‘जर्नल ऑफ फिजिकल केमिस्ट्री लेटर्स’ में प्रकाशित अध्ययन से कैंसर कोशिकाओं के व्यवहार को समझने के साथ भविष्य में ऐसी जांच विकसित करने की संभावना बढ़ी है, जिसमें शरीर में चीरफाड़ किए बिना रक्त या अन्य नमूनों से कैंसर के शुरुआती संकेत खोजे जा सकें। हालांकि इसे नियमित चिकित्सकीय जांच के रूप में इस्तेमाल करने से पहले आगे और शोध तथा परीक्षण आवश्यक होंगे।

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प्रकाशन लिंक:

https://pubs.acs.org/doi/full/10.1021/acs.jpclett.2c01629).

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