एसआईआर के बाद उत्तराखंड की मतदाता सूची में बड़ा बदलाव, 9.31 लाख पुराने नाम बाहर
देहरादून, 4 अक्टूबर। उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) ने राज्य का चुनावी नक्शा काफी हद तक बदल दिया है। आठ जून को एसआईआर शुरू होने के समय मतदाता सूची में 79,60,762 नाम थे, जबकि तीन अक्टूबर को प्रकाशित अंतिम सूची में 71,58,949 मतदाता रह गए हैं। इस दौरान पुराने मतदाताओं में से 9,31,685 नाम अंतिम सूची में नहीं रहे, हालांकि 1,29,872 नए मतदाता जोड़े जाने के कारण मतदाताओं की कुल संख्या में शुद्ध कमी 8,01,813 रही।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम के अनुसार अंतिम सूची में 37,37,701 पुरुष, 34,21,036 महिला और 212 तृतीय लिंग मतदाता हैं। एसआईआर की अंतिम सूची में पुराने नामों के बड़े पैमाने पर बाहर होने के कारण अब निर्वाचन आयोग ने छूटे पात्र मतदाताओं को फिर से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया है।
ड्राफ्ट में ही बाहर हो गए थे 8.26 लाख नाम
एसआईआर की शुरुआत आठ जून को हुई थी। गणना प्रपत्रों के वितरण और सत्यापन के बाद 14 जुलाई को प्रारूप मतदाता सूची जारी हुई। तब 79,60,762 में से 8,26,977 नाम कम होकर मतदाताओं की संख्या 71,33,785 रह गई थी। इसके बाद दावे और आपत्तियां आमंत्रित की गईं तथा उनकी सुनवाई और निस्तारण 28 सितंबर तक चला। इस प्रक्रिया में 1,04,708 नाम और कम हुए। इस तरह संख्या 70,29,077 तक पहुंची, लेकिन 1,29,872 नए मतदाताओं के जुड़ने के बाद अंतिम संख्या 71,58,949 हो गई।
निर्वाचन कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक प्रारूप सूची से बाहर रह गए 25,164 मतदाताओं के नाम दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया के बाद बहाल भी किए गए। करीब 24 लाख मतदाताओं को विभिन्न विसंगतियों को लेकर नोटिस दिए गए थे।
92 प्रतिशत से अधिक आपत्तियां खारिज
एसआईआर के दौरान फॉर्म-7 के माध्यम से मतदाताओं के नाम हटाने के लिए 96,704 आपत्तियां दर्ज की गई थीं। इनमें से 89,182 यानी करीब 92.22 प्रतिशत आपत्तियां खारिज कर दी गईं और केवल 7,522 स्वीकार हुईं। इतनी बड़ी संख्या में आपत्तियों का खारिज होना भी महत्वपूर्ण है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा है कि खारिज आपत्तियों की समीक्षा कर आवश्यकता के अनुसार नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
देहरादून और हरिद्वार में बड़ा बदलाव
एसआईआर का प्रभाव सभी क्षेत्रों में एक समान नहीं रहा। अंतिम सूची में हरिद्वार 12,45,458 मतदाताओं के साथ सबसे बड़ा मतदाता वाला जिला है, जबकि देहरादून में 11,94,797 मतदाता हैं। टिहरी गढ़वाल में 4,66,638, चमोली में 2,76,007 और रुद्रप्रयाग में 1,82,436 मतदाता दर्ज हैं।
अखबारों में प्रकाशित विधानसभा क्षेत्रवार आंकड़ों से तस्वीर और दिलचस्प बनती है। 2022 के विधानसभा चुनाव की मतदाता संख्या से तुलना करें तो सर्वाधिक कमी वाले क्षेत्रों में धर्मपुर प्रमुख है। यहां करीब 57 हजार से अधिक मतदाताओं का अंतर सामने आया है। देहरादून कैंट, ऋषिकेश, रायपुर और राजपुर रोड में भी मतदाताओं की संख्या में बड़ा अंतर दर्ज हुआ है। दूसरी ओर हरिद्वार की ज्वालापुर सीट उन चुनिंदा क्षेत्रों में है जहां 2022 की तुलना में मतदाताओं की संख्या घटी नहीं, बल्कि मामूली रूप से बढ़ी है।
हालांकि 2022 के विधानसभा चुनाव और 2026 की अंतिम सूची की सीधी तुलना करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि चार वर्षों में मृत्यु, स्थानांतरण, नए मतदाताओं का पंजीकरण और निर्वाचन क्षेत्रों के भीतर आबादी की आवाजाही भी संख्या को प्रभावित करती है। इसलिए पूरा अंतर केवल एसआईआर में नाम काटे जाने के रूप में नहीं देखा जा सकता।
अब घर-घर जाएंगे बीएलओ
अंतिम सूची का प्रकाशन एसआईआर की औपचारिक समाप्ति जरूर है, लेकिन छूटे मतदाताओं के लिए प्रक्रिया बंद नहीं हुई है। निर्वाचन आयोग ने उन लोगों की पहचान के लिए नया अभियान शुरू करने का निर्देश दिया है, जिनके नाम एसआईआर से पहले की सूची में थे लेकिन नई सूची में नहीं हैं। बीएलओ पुरानी और नई मतदाता सूचियों का मिलान करेंगे, संबंधित मतदाताओं के घर जाएंगे और पात्र पाए जाने पर उनका नाम दोबारा दर्ज कराने में सहायता करेंगे।
सात अक्टूबर से एक महीने का विशेष अभियान भी शुरू किया जाएगा। इसमें छूटे मतदाताओं और नए पात्र नागरिकों से फॉर्म-6 भरवाया जाएगा। बेघर लोगों, श्रमिकों और अन्य जरूरतमंद वर्गों के लिए नाइट शेल्टर तथा अन्य स्थानों पर सहायता केंद्र और विशेष शिविर लगाने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।
2027 से पहले बदलेगा राजनीतिक गणित
उत्तराखंड में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है। ऐसे में लगभग 9.31 लाख पुराने नामों का नई सूची में नहीं रहना राजनीतिक दलों के लिए भी महत्वपूर्ण है। खासकर देहरादून, हरिद्वार और दूसरे शहरी तथा तेजी से आबादी बदलने वाले क्षेत्रों में बूथवार मतदाता आधार का स्वरूप बदला है। राजनीतिक दलों को अब अपने पुराने बूथ प्रबंधन और मतदाता गणित की नए सिरे से समीक्षा करनी पड़ेगी।
सबसे महत्वपूर्ण सवाल उन पात्र नागरिकों का है जिनके नाम किसी कारण से सूची में नहीं आ पाए। आयोग का विशेष अभियान इसी अंतर को भरने का प्रयास होगा। अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित हो चुकी है, लेकिन पात्र नागरिक फॉर्म-6 के जरिए नाम जुड़वा सकते हैं। उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर एसआईआर-2026 से संबंधित घोषणाएं, प्रेस विज्ञप्तियां तथा मतदाता सूची से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई गई है।
