बनबसा में धामी कैबिनेट के 24 फैसले, भूमि अधिकार से उच्च शिक्षा कौशल योजना तक कई अहम मंजूरियां
बनबसा (चम्पावत), 4 अक्टूबर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में रविवार को एनएचपीसी परिसर बनबसा में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में भूमि अधिकार, उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, वित्त, वन, पशुपालन और प्रशासन से जुड़े 24 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। सीमांत क्षेत्र में आयोजित इस बैठक में वर्ग-3 और वर्ग-4 भूमि के पट्टेदारों-कब्जाधारकों को भूमिधरी अधिकार देने, करीब 1.19 लाख विद्यार्थियों के लिए कौशल संवर्धन योजना शुरू करने और 153 साल पुराने नहर एवं जल निकास कानून के स्थान पर नया राज्य कानून लाने जैसे फैसले प्रमुख रहे।
मंत्रिमंडल ने वर्ग-3 और वर्ग-4 भूमि के पट्टेदारों और कब्जाधारकों को भूमिधरी अधिकार देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। नैनीताल की नगर पंचायत लालकुआं में संबंधित पट्टेदारों-कब्जाधारकों को संक्रमणीय भूमिधर अधिकार मिल सकेंगे। जौनसार-बावर में वर्ग-4 भूमि के विनियमितीकरण की व्यवस्था भी मंजूर की गई है। इसके लिए 2004 के सर्किल रेट पर विनियमितीकरण की अवधि एक वर्ष बढ़ाई जाएगी, जिसके बाद मौजूदा सर्किल रेट लागू होंगे। उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था नियमावली, 1952 में संशोधन को भी मंजूरी मिली है।
उच्च शिक्षा के विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता और उद्यमिता बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा कौशल संवर्धन योजना-2026 को स्वीकृति दी गई। सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों तथा संबद्ध महाविद्यालयों के करीब 1.19 लाख विद्यार्थी इसके दायरे में आएंगे। पांच वर्षों में योजना पर लगभग 200 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
निजी विश्वविद्यालय खोलने के मानकों में भी बदलाव किया गया है। पर्वतीय क्षेत्रों में न्यूनतम 2,500 वर्गमीटर और मैदानी क्षेत्रों में 20 हजार वर्गमीटर निर्मित क्षेत्र की शर्त होगी। प्रस्तावों की गुणवत्ता जांचने के लिए अलग मूल्यांकन मानक बनाए जाएंगे।
राज्य की वित्तीय व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय में उत्तराखंड राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन संशोधन विधेयक-2026 को मंजूरी दी गई। वर्ष 2026-27 से 2030-31 के दौरान वार्षिक राजकोषीय घाटे की सीमा सकल राज्य घरेलू उत्पाद के तीन प्रतिशत और संचयी ऋण की अधिकतम सीमा 30 प्रतिशत तय करने का प्रावधान है। आपदा और सुरक्षा संबंधी परिस्थितियों में नियमानुसार छूट मिल सकेगी।
पंतनगर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के विस्तार के लिए हस्तांतरित परिसंपत्तियों के एवज में उत्तराखंड सीड्स एंड तराई डेवलपमेंट कॉरपोरेशन को 66.2916 करोड़ रुपये की शेष राशि जारी करने को मंजूरी मिली। वहीं संपत्ति की खरीद-बिक्री में फर्जी या गलत पैन के इस्तेमाल पर अंकुश लगाने के लिए पैन सत्यापन व्यवस्था लागू की जाएगी।
सरकार ने 1873 के उत्तरी भारत नहर एवं जल निकास अधिनियम को समाप्त कर उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप नया उत्तराखंड सिंचाई एवं जल निकासी विधेयक-2026 विधानसभा में पेश करने का फैसला किया है।
वन भूमि हस्तांतरण मामलों के तकनीकी परीक्षण के लिए नोडल अधिकारी, वन संरक्षण कार्यालय में छह पदों वाली परियोजना प्रबंधन इकाई बनाई जाएगी। कुमाऊं और गढ़वाल के मुख्य वन संरक्षकों को विभागाध्यक्ष का दर्जा देने का निर्णय भी लिया गया, ताकि वनाग्नि, बाढ़, आपदा और मानव-वन्यजीव संघर्ष के मामलों में त्वरित निर्णय हो सकें।
पशुपालन, डेयरी और मत्स्य विभागों के बीच बेहतर समन्वय के लिए महानिदेशक का नया पद सृजित होगा। कुक्कुट आहार सब्सिडी अब आधार से जुड़े बैंक खाते में सीधे भेजी जाएगी।
स्वास्थ्य क्षेत्र में राजकीय मेडिकल कॉलेजों में सीनियर रेजिडेंट, जूनियर रेजिडेंट और डेमोन्स्ट्रेटर की कमी दूर करने के उद्देश्य से उनके वेतन और मानदेय के पुनर्निर्धारण को मंजूरी मिली। वैक्टर जनित रोग नियंत्रण सेवा के कर्मचारियों के लिए अलग सेवा नियमावली-2026 भी स्वीकृत की गई।
मंत्रिमंडल ने नरेंद्रनगर में नया उप निबंधक कार्यालय खोलने का फैसला किया। इसके दायरे में नरेंद्रनगर तहसील के 98 और पावकी देवी उपतहसील के 35 सहित कुल 133 राजस्व गांव आएंगे।
इसके अलावा समूह ‘ग’ के उप कारापाल पद पर साक्षात्कार समाप्त करने, राज्य कर्मचारियों की संपत्ति संबंधी आचरण नियमों में संशोधन, सतर्कता अधिष्ठान के पुनर्गठन, भारतीय न्याय संहिता के अनुरूप पुरानी अधिसूचनाओं में बदलाव और छठे राज्य वित्त आयोग की रिपोर्ट विधानसभा में रखने को भी मंजूरी दी गई। सार्वजनिक अभिकरणों की परिसंपत्तियों के विनिवेश अथवा मुद्रीकरण से मिलने वाली आय का 92 प्रतिशत हिस्सा संबंधित अभिकरण को देने का निर्णय भी मंत्रिमंडल ने किया।
