सोना और नशीले पदार्थों की तस्करी पर डीआरआई का शिकंजा, सात गिरफ्तार
बांग्लादेश सीमा से कोलकाता तक फैले सोना तस्करी नेटवर्क का खुलासा, रेल और सड़क मार्गों से हो रही थी तस्करी : ट्रेन यात्री के बैग से मिला 5.75 किलोग्राम संदिग्ध क्रिस्टल मेथ

नई दिल्ली, 11 अक्टूबर ( PIB)। राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) ने सोने और नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ अलग-अलग अभियानों में बड़ी सफलता हासिल करते हुए सात लोगों को गिरफ्तार किया है। खुफिया सूचनाओं के आधार पर 8 और 9 अक्टूबर को की गई कार्रवाई में बांग्लादेश सीमा से भारत में तस्करी करके लाया गया लगभग 7.8 किलोग्राम विदेशी सोना जब्त किया गया, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत 11.50 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। एक अन्य अभियान में दिल्ली से बेंगलुरु जा रही ट्रेन से 5.753 किलोग्राम संदिग्ध मेथामफेटामाइन (क्रिस्टल मेथ) बरामद किया गया। इन कार्रवाइयों से तस्करों द्वारा रेल और सड़क परिवहन नेटवर्क के इस्तेमाल का खुलासा हुआ है।
केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अधीन डीआरआई की ओर से रविवार को जारी दो अलग-अलग विज्ञप्तियों के अनुसार सोने की तस्करी के खिलाफ पश्चिम बंगाल में चलाए गए अभियान के दौरान डंकुनी टोल प्लाजा पर एक चारपहिया वाहन को रोका गया। वाहन में सवार चार लोग बांग्लादेश सीमा के निकट बानपुर क्षेत्र से कोलकाता की ओर जा रहे थे। तलाशी के दौरान वाहन से लगभग 6.8 किलोग्राम वजन की सोने की 50 छड़ें बरामद हुईं, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 10 करोड़ रुपये है। इनमें कुछ छड़ों पर विदेशी चिह्न अंकित थे।
अधिकारियों के अनुसार वाहन में सवार चारों व्यक्ति सोने की वैध खरीद अथवा कब्जे से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। पूछताछ में उन्होंने बांग्लादेश के रास्ते विदेशी सोने की तस्करी में अपनी संलिप्तता स्वीकार की। गिरफ्तार आरोपियों में बानपुर सीमा क्षेत्र में सक्रिय तस्करी गिरोह का कथित सरगना भी शामिल है। इस गिरफ्तारी को सीमा पार संचालित संगठित तस्करी नेटवर्क के खिलाफ महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है।
इसी अभियान के तहत डीआरआई अधिकारियों ने पश्चिम बंगाल के मालदा टाउन और न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशनों पर ट्रेनों से उतरे दो यात्रियों को पकड़ा। उनके पास से लगभग एक किलोग्राम विदेशी मूल का सोना बरामद हुआ, जिसकी कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपये आंकी गई है। बरामद सोना छड़ों और चूड़ियों के रूप में था। दोनों यात्री इसकी वैध खरीद के दस्तावेज नहीं दिखा सके, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि यह सोना त्रिपुरा में भारत-बांग्लादेश सीमा के रास्ते तस्करी करके लाया गया था। डीआरआई के अनुसार इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि तस्करी गिरोह सीमावर्ती क्षेत्रों से कोलकाता जैसे बड़े व्यापारिक केंद्रों तक सोना पहुंचाने के लिए सड़क और रेल मार्गों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
ट्रेन यात्री के बैग से मिला 5.75 किलोग्राम संदिग्ध क्रिस्टल मेथ
इस बीच डीआरआई की मंगलुरु क्षेत्रीय इकाई ने नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए दिल्ली से बेंगलुरु जा रहे एक भारतीय नागरिक को ट्रेन में पकड़ा। खुफिया सूचना के आधार पर उसके ट्रॉली बैग की तलाशी लेने पर तीन पैकेट मिले, जिनमें 5.753 किलोग्राम सफेद क्रिस्टलीय पदार्थ था। अधिकारियों को इसके मेथामफेटामाइन होने का संदेह है। बरामद पदार्थ को स्वापक औषधि एवं मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 के तहत जब्त कर लिया गया। आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद सक्षम न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
मेथामफेटामाइन, जिसे क्रिस्टल मेथ अथवा आइस भी कहा जाता है, एक अत्यंत शक्तिशाली और लत पैदा करने वाला कृत्रिम नशीला पदार्थ है। इसका सेवन केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है और शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।
डीआरआई के अनुसार मेथामफेटामाइन के लिए अधिसूचित वाणिज्यिक मात्रा 50 ग्राम है, जबकि इस मामले में बरामद संदिग्ध पदार्थ की मात्रा उससे लगभग 115 गुना अधिक है। यदि जांच में पदार्थ की पहचान की पुष्टि होती है और संबंधित अपराध सिद्ध होता है, तो एनडीपीएस अधिनियम के तहत 10 से 20 वर्ष तक के कठोर कारावास तथा एक से दो लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान लागू हो सकता है।
डीआरआई ने कहा है कि खुफिया सूचनाओं पर आधारित अभियानों और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय के माध्यम से संगठित तस्करी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। दो दिनों में हुई इन कार्रवाइयों में छह लोगों की गिरफ्तारी सोने की तस्करी के मामलों में हुई, जबकि एक व्यक्ति को संदिग्ध नशीले पदार्थ की तस्करी के मामले में गिरफ्तार किया गया है। दोनों अभियानों में कुल सात गिरफ्तारियां हुई हैं।

