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गिरधारी लाल साहू की अग्रिम जमानत याचिका खारिज, गिरफ्तारी से बचने के लिए बरेली छोड़ी

 

देहरादून/बरेली, 19 अक्टूबर। उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य और उनके पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी से जुड़ा विवाद कानूनी और राजनीतिक दृष्टि से गंभीर होता जा रहा है। बरेली की विशेष अदालत ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज मामले में गिरधारी लाल साहू की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की आशंका बढ़ गई है।

समाचार पत्रों में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद गिरधारी लाल साहू बरेली छोड़कर चले गए। पुलिस उनकी तलाश कर रही है। हालांकि, उनके ठिकाने और गिरफ्तारी के संबंध में आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

मामला बरेली में रहने वाले एक परिवार से जुड़े विवाद का है। शिकायतकर्ता पक्ष ने गिरधारी लाल साहू और अन्य लोगों पर जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करने, अपमानित करने तथा धमकाने के आरोप लगाए हैं। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था। गिरधारी लाल साहू ने गिरफ्तारी से बचने के लिए विशेष अदालत में अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल की थी। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिका खारिज कर दी। हालांकि, अग्रिम जमानत खारिज होने का अर्थ आरोपों का न्यायिक रूप से सिद्ध होना नहीं है।

मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम ने कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य और उनके पति गिरधारी लाल साहू के बयान दर्ज किए हैं। जांच टीम ने संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ करने के साथ ही विवाद से जुड़े दस्तावेज भी एकत्र किए हैं। पुलिस शिकायतकर्ता के आरोपों और संबंधित व्यक्तियों के बयानों का मिलान कर रही है।

इस मामले के साथ ही कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य और उनके पति से संबंधित लगभग 210 करोड़ रुपये की संपत्ति का विवाद भी सामने आया है। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, इस संपत्ति को लेकर विजिलेंस से शिकायत की गई है। शिकायत में संपत्ति से जुड़े लेनदेन और अन्य पहलुओं की जांच कराने की मांग की गई है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

गिरधारी लाल साहू का नाम पहले भी विभिन्न आपराधिक मामलों में सामने आता रहा है। समाचार पत्र में प्रकाशित विवरण के अनुसार, उनके विरुद्ध हत्या, जानलेवा हमला, धोखाधड़ी और अन्य धाराओं में कुल 39 मुकदमे दर्ज होने का उल्लेख है। इनमें चर्चित जैन दंपती हत्याकांड का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2008 में उन्हें इस मामले में अदालत से राहत मिली थी। किसी व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज होना और दोषसिद्ध होना अलग-अलग कानूनी स्थितियां हैं।

इस बीच बरेली के वनखंडीनाथ मंदिर से संबंधित एक अन्य विवाद भी चर्चा में आया है। प्रकाशित समाचार के अनुसार, गिरधारी लाल साहू पहले मंदिर से जुड़े कार्यक्रमों और व्यवस्थाओं में शामिल रहे हैं, लेकिन इस बार एक धार्मिक आयोजन में उनकी अनुपस्थिति रही।

अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद गिरधारी लाल साहू के सामने गिरफ्तारी की आशंका बढ़ गई है। हालांकि, उनके पास उच्च न्यायालय में कानूनी राहत मांगने का विकल्प है। पुलिस की जांच अब शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों पर केंद्रित है। कैबिनेट मंत्री के पति से जुड़ा होने के कारण यह मामला राजनीतिक दृष्टि से भी संवेदनशील बन गया है।

 

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