राजनीति

भाजपा में घुटन महसूस कर रहे थे यशपाल बेनाम, आठ साल बाद छोड़ी पार्टी

पौड़ी, 19 अक्टूबर। उत्तराखंड में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी को पौड़ी में राजनीतिक झटका लगा है। पूर्व विधायक एवं तीन बार पौड़ी नगर पालिका के अध्यक्ष रह चुके यशपाल बेनाम ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पार्टी छोड़ने के पीछे व्यक्तिगत कारणों के साथ ही भाजपा में अपनी उपेक्षा और घुटन महसूस होने को प्रमुख वजह बताया है। बेनाम का कहना है कि आठ वर्षों तक पार्टी के साथ रहने के बावजूद उनकी राजनीतिक क्षमताओं का समुचित उपयोग नहीं किया गया और पार्टी के नेता उन्हें तथा उनकी राजनीतिक विचारधारा को ठीक से समझ नहीं पाए।
रविवार को पौड़ी में आयोजित पत्रकार वार्ता और अपने वीडियो संदेश में बेनाम ने बताया कि उन्होंने ठीक आठ वर्ष पहले 18 अक्टूबर 2018 को देहरादून स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी। संयोग से आठ वर्ष बाद उसी तारीख, 18 अक्टूबर 2026 को उन्होंने भाजपा से अपना संबंध समाप्त करने का फैसला किया। उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र देने की घोषणा करते हुए कहा कि अब वह स्वयं को भाजपा से अलग कर रहे हैं।
बेनाम ने अपनी राजनीतिक यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा स्वतंत्र विचारधारा और अपने सिद्धांतों के आधार पर राजनीति की है। उनकी राजनीतिक पहचान किसी दल विशेष की देन नहीं, बल्कि उनकी अपनी कार्यक्षमता और जनता के समर्थन का परिणाम रही है। उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़कर सफलता प्राप्त की और जनता के बीच अपनी अलग पहचान बनाई। लेकिन भाजपा में आठ वर्ष बिताने के बावजूद पार्टी उनकी क्षमताओं का अपेक्षित उपयोग नहीं कर सकी।

बेनाम के अनुसार, भाजपा के भीतर कई नेताओं ने उन्हें समझने का प्रयास नहीं किया। पार्टी में उनकी स्थिति ऐसी हो गई थी कि वह घुटन महसूस करने लगे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की परिस्थितियों में रहना उनके स्वभाव के अनुकूल नहीं है। इसी कारण उन्होंने पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया।
अपनी बात को शायराना अंदाज में व्यक्त करते हुए बेनाम ने कुछ पंक्तियाँ भी सुनाईं—
ये जश्न, ये खुशियाँ, ये मेले रहने दो।
मुझे बख्श दो लोगों, मुझे अकेले रहने दो।
इन पंक्तियों के माध्यम से उन्होंने अपनी मनःस्थिति व्यक्त की। उनके बयान में भाजपा के भीतर अपनी भूमिका को लेकर असंतोष दिखाई दिया।
यशपाल बेनाम उत्तराखंड राज्य आंदोलन से भी जुड़े रहे हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन का उल्लेख करते हुए बताया कि राज्य आंदोलन के दौरान उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। पौड़ी की राजनीति में उनका लंबा अनुभव रहा है। वर्ष 2007 में वह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पौड़ी विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए थे। इसके अतिरिक्त वह तीन बार पौड़ी नगर पालिका के अध्यक्ष रहे। इनमें दो बार निर्दलीय और एक बार भाजपा प्रत्याशी के रूप में उन्हें सफलता मिली।
राजनीतिक दलों से अलग अपनी व्यक्तिगत पहचान और स्थानीय जनाधार के कारण बेनाम का पौड़ी की राजनीति में विशेष स्थान रहा है। ऐसे में विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले उनका भाजपा छोड़ना स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हालांकि, बेनाम ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह भविष्य में किस राजनीतिक दल के साथ जाएंगे अथवा स्वतंत्र राजनीतिक रास्ता अपनाएंगे। उन्होंने इतना अवश्य कहा है कि अपने अगले राजनीतिक कदम के संबंध में जल्द निर्णय लेंगे। उनके इस्तीफे के बाद कांग्रेस में शामिल होने की संभावनाओं को लेकर भी चर्चाएं हैं, लेकिन इस संबंध में उनकी ओर से कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।
उत्तराखंड में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच बेनाम का इस्तीफा भाजपा के लिए स्थानीय स्तर पर राजनीतिक चुनौती पैदा कर सकता है। विशेष रूप से उनके इस आरोप से कि पार्टी में उनकी क्षमताओं का उपयोग नहीं किया गया और वह घुटन महसूस कर रहे थे, भाजपा के भीतर पुराने जनाधार वाले नेताओं की भूमिका तथा संगठन में उनके समायोजन को लेकर सवाल उठते हैं। फिलहाल पौड़ी की राजनीति में सबसे अधिक उत्सुकता उनके अगले राजनीतिक फैसले को लेकर है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!