सीएचसी थराली के स्टाफ कक्ष में बिस्तर पर लेटा दिखा कुत्ता, स्वास्थ्य सेवाओं पर उठे गंभीर सवाल
सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में रात साढ़े तीन बजे अस्पताल में कर्मचारी नहीं मिलने का दावा, गंभीर बीमार महिला को उपचार के लिए कर्णप्रयाग ले जाने की बात
— हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट —
थराली, 8 नवंबर। पिंडर घाटी के सबसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्रों में शामिल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) थराली की व्यवस्थाओं को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में अस्पताल के पुरुष स्टाफ कक्ष में किसी कर्मचारी के बजाय एक कुत्ता बिस्तर पर आराम से लेटा दिखाई दे रहा है। वीडियो बनाने वाले व्यक्ति का दावा है कि वह अपने परिजनों के साथ एक गंभीर रूप से बीमार महिला को लेकर रात करीब साढ़े तीन बजे अस्पताल पहुंचा था, लेकिन वहां कोई जिम्मेदार चिकित्सक अथवा कर्मचारी नहीं मिला। हालांकि इस वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
शनिवार तड़के से सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे इस वीडियो में कुछ लोग अस्पताल परिसर में कर्मचारियों को आवाज लगाते सुनाई दे रहे हैं। वीडियो में एक व्यक्ति कह रहा है कि वे अपनी गंभीर रूप से बीमार चाची को उपचार के लिए सीएचसी थराली लेकर आए हैं। अस्पताल के कई कक्ष खुले होने के बावजूद उन्हें कोई चिकित्सक अथवा स्वास्थ्य कर्मचारी दिखाई नहीं दे रहा है।
वीडियो में कुछ लोग पुरुष स्टाफ कक्ष का बंद दरवाजा धकेलकर खोलते दिखाई देते हैं। कमरे के भीतर बिस्तर पर एक कुत्ता लेटा हुआ नजर आता है। वहां किसी कर्मचारी की मौजूदगी दिखाई नहीं देती। इस दौरान वीडियो में सुनाई दे रही आवाजों में अस्पताल की व्यवस्थाओं पर नाराजगी व्यक्त की जा रही है। लोग बीमार महिला को उपचार के लिए उप जिला चिकित्सालय कर्णप्रयाग ले जाने की बात भी कहते सुनाई दे रहे हैं।
इस वीडियो के सामने आने के बाद अस्पताल की रात्रिकालीन आपातकालीन सेवाओं, कर्मचारियों की ड्यूटी और अस्पताल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वीडियो किसने बनाया, कब रिकॉर्ड किया गया और उसमें किए गए दावे कितने सही हैं। वीडियो में किसी कर्मचारी के दिखाई नहीं देने मात्र से पूरे अस्पताल में चिकित्सकीय स्टाफ की अनुपस्थिति की पुष्टि नहीं होती। ऐसे में वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से निष्पक्ष जांच आवश्यक मानी जा रही है।
उल्लेखनीय है कि करीब 24 वर्ष पहले पिंडर घाटी के देवाल, थराली और नारायणबगड़ विकासखंडों की एक लाख से अधिक आबादी को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र थराली की स्थापना की गई थी। लेकिन स्थानीय लोगों की शिकायत रही है कि स्थापना के इतने वर्षों बाद भी अस्पताल में अपेक्षित स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित नहीं हो सकी हैं।
चिकित्सकों और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी, आवश्यक उपकरणों की अनुपलब्धता तथा चिकित्सा व्यवस्थाओं में सुधार की मांग को लेकर क्षेत्र में समय-समय पर आंदोलन भी होते रहे हैं। इसके बावजूद अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं।
पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की सीमित उपलब्धता के कारण सीएचसी थराली जैसे अस्पतालों का महत्व और बढ़ जाता है। विशेषकर रात के समय गंभीर रूप से बीमार मरीजों को तत्काल उपचार मिलना आवश्यक है। ऐसे में यदि वायरल वीडियो में किए गए दावे सही पाए जाते हैं तो यह न केवल अस्पताल प्रबंधन की गंभीर लापरवाही होगी, बल्कि पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के सरकारी दावों पर भी प्रश्नचिह्न लगाएगी।
स्थानीय स्तर पर पहले से ही स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर असंतोष रहा है। अब इस वीडियो ने अस्पताल की कार्यप्रणाली, रात्रिकालीन ड्यूटी व्यवस्था और जवाबदेही की जांच की आवश्यकता को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है।
इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग का पक्ष जानने के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राजीव पाल सिंह से मोबाइल फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। लिहाजा वीडियो में किए गए दावों पर विभागीय प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो पाई है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि गंभीर रूप से बीमार महिला को लेकर परिजन वास्तव में रात साढ़े तीन बजे अस्पताल पहुंचे थे, तो उस समय आपातकालीन चिकित्सा सेवा की क्या व्यवस्था थी और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी कहां थे? इन सवालों का जवाब स्वास्थ्य विभाग की जांच से ही मिल सकेगा।

