सरकारी पेंशनरों का आरोप सरकार उनको ठग रही है, धरना 94 वें दिन भी रहा जारी

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भिकियासैंण, 25 नवंबर (उ  हि ) ।  तहसील मुख्यालय पर उत्तराखंड गवर्नमेंट पैशनर्स संगठन रामगंगा भिकियासैंण का धरना आज 94वे दिन में प्रवेश कर गया है। तय कार्यक्रम के अनुसार आज भिकियासैंण विकासखंड के पैशनर्स ने धरना दिया। आज सुबह से ही धरना स्थल पर 25 नवंबर को जारी शासनादेश पर बहस केन्द्रित रही।धरना स्थल पर वक्ताओं ने कहा कि कल जारी हुए शासनादेश में कुछ खास नहीं है सरकार ने एक बार फिर पैशनर्स व कर्मचारियों को ठगने का प्रयास किया है।

वक्ताओं ने कहा कि अभी भी ओपीडी को कैशलैश नहीं किया गया है। पैंशनर्स /पारिवारिक पेंशनर्स व सेवारत कर्मचारियों से कटौती पूर्ववत जारी रखी गई है। जबकि पैंशनर्स को 50 प्रतिशत और पारिवारिक पेंशनर्स को केवल 30 प्रतिशत ही पैंशन मिलती है। पूर्व निर्गत शासनादेशों में भी असीमित इलाज देने का उल्लेख है वहीं दूसरी ओर इलाज के  पैकेज निर्धारित किए गए हैं मसलन आंखों के आपरेशन के लिए महज़ 7500 रुपए निर्धारित किए गए हैं जबकि आंखों के आपरेशन पर कम से कम 30,000 रुपए खर्च करने पड़ते हैं। इस भ्रमित करने वाले शासनादेश जारी होने पर भी कुछ पैंशनर्स व कर्मचारी संगठन अपना श्रेय लेने की होड़ में लगे हैं तथा सरकार का गुणगान कर रहे हैं। बैठक को सम्बोधित करते हुए संगठन के अध्यक्ष तुला सिंह तड़ियाल ने कहा कि, आज  मुख्यमंत्री का कार्यक्रम इसी इलाके में होने के कारण विरोध की सम्भावना को देखते हुए हड़बड़ी में यह शासनादेश जारी किया गया है इस शासनादेश में भी वही बातें लिखी गई हैं जो पूर्व में निर्गत शासनादेशों में पहले से ही लिखी गई हैं।

उन्होंने कहा अभी तक ग्रामीण क्षेत्रों में गोल्डन कार्ड बने नहीं हैं, दस महीने की कटौती हो चुकी है किसी को भी इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है। पूर्व शासनादेश में शिकायत निवारण के लिए त्रिस्तरीय शिकायत निवारण समिति बनाने का उल्लेख है जिसमें ब्लाक स्तर पर उप जिलाधिकारी को इसका अध्यक्ष बनाया गया है इसी प्रकार जिलाधिकारी को जिले स्तर पर व स्वास्थ्य सचिव को प्रदेश स्तर पर इस समिति का अध्यक्ष बनाया गया है उन्होंने सरकार पर सवाल दागते हुए कहा है कि क्या एक साल के बाद भी ऐसी कोई समिति अस्तित्व में है ? उन्होंने कहा सरकार ने माननीय उच्च न्यायालय में देशभर के पच्चीस हजार अस्पतालों को सूचीबद्ध किए जाने का शपथ पत्र दाखिल किया हुआ है लेकिन एक भी अस्पताल हमारे गोल्डन कार्ड को स्वीकार नहीं कर रहे हैं। क्या राज्य सरकार इन अस्पतालों के साथ अब अनुबंध करेंगी ? जब तक सरकार इन अस्पतालों के साथ अनुबंध नहीं करती तब तक पैंशनर्स व कर्मचारियों को इस कार्ड से लाभ नहीं मिल सकता। नये शासनादेश के बाद पुराने गोल्डन कार्ड उपयोग में रहेंगे ? अथवा नये गोल्डन कार्ड बनाने होंगे ? ऐसे अनेक सवाल अभी गर्त में छुपे हुए हैं। ताज़ा शासनादेश पर गहन विचार विमर्श के लिए कल सभी विकासखंडों की एक आपात बैठक बुलाई गई है जिसमें धरने को जारी रखने व माननीय उच्च न्यायालय में वाद दायर करने जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की जाएगी। बैठक को बचे सिहं नेगी,भीम सिंह रावत, गुसाईं सिंह उनियाल,प्रकाश चन्द्र आर्य, राम दत्त लखचौरा, नारायण राम आर्य, डॉ विश्वम्बर दत्त सती , गंगा दत्त जोशी, देबी दत्त लखचौरा, आनन्द प्रकाश लखचौरा, गंगा दत्त शर्मा, किसन सिंह मेहता, बालम सिंह बिष्ट, राम सिंह बिष्ट, मोहन सिंह नेगी, राम सिंह रावत, मदन सिंह नेगी, आदि लोगों ने सम्बोधित किया।

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