धर्म/संस्कृति/ चारधाम यात्रा

गौचर क्षेत्र के 7 गावों की आराध्या कालिंका की डोली के स्वागत की भव्य स्वागत की तैयारियां हुयी पूरी

-गौचर से दिग्पाल गुसाईं –

पालिका क्षेत्र के सात गांवों की आराध्य देवी कांलिका की उत्सव डोली को 19 सितंबर मायके मंदिर में लाने की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं इसके लिए मंदिर को विषेश रूप से सजाया गया है।

जनपद चमोली की गौचर पालिका क्षेत्र के सात गांवों की आराध्य देवी कांलिका का मूल मंदिर भटनगर गांव की सीमा पर अलकनंदा के किनारे पर स्थित है। मायके पक्ष का मंदिर पनाई सेरे में है। सन् अस्सी पूर्व इस स्थान पर मात्र एक पीपल का वृक्ष था लेकिन अब यहां पर भव्य मंदिर बनाया गया है। पूर्व से चली आ रही परंपरा के अनुसार भटनगर गांव निवासी देवी के ससुराल पक्ष के माने जाते हैं।

पनाईं मल्ली तल्ली, रावलनगर मल्ला तल्ला, बंदरखंड आदि गांव मायके पक्ष के माने जाते हैं। शैल गांव के शैली पंडित देवी के गुरु माने जाते हैं। पूर्व से चली आ रही परंपरा के अनुसार मायके पक्ष के लोग हर साल नंदाष्टमी के दिन अपनी आराध्य देवी कांलिका को मायके पक्ष के मंदिर में लाकर पूजा अर्चना कर क्षेत्र की खुशहाली की कामना करते हैं।

पूर्व में यह कार्यक्रम एक दिन का होता था। तब अष्टबलि देकर देवी को खुश किया जाता था। लेकिन सन् सत्तर के दशक में आए सामाजिक बदलाव के बाद अष्टबलि की जगह हवन यज्ञ किया जाने लगा। तब से यह कार्यक्रम एक दिन के बजाय तीन दिनों का आयोजित किया जाने लगा।

इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए इस वर्ष 19 सितंबर को देवी की उत्सव डोली को गाजे-बाजे के साथ पूजा अर्चना के लिए मायके मंदिर में लाई जाएगी। इस कार्यक्रम को लेकर जहां क्षेत्र वासियों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है वहीं मायके पक्ष के मंदिर को विषेश रूप से सजाया गया। सभी गांवों के रावल देवता खासकर रावलनगर गांव के रावल जो भगवती को मायके के मंदिर में लाने व मूल मंदिर में भेजने के दिन देवी की अगवानी करते हैं देवी के भाई मानें जाते हैं। उनकी पूजा अर्चना की जाती है इसके लिए शनिवार या मंगलवार का दिन जो भी उत्सव डोली के दिन से पहले पड़े उस दिन को चुना जाता है।

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