समुद्र के पेट में चप्पे -चप्पे को छान मरने वाला सर्वे सर्वे जहाज संध्याक 3 फरवरी को नौसेना में शामिल होगा

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-uttarakhandhimalaya.in-

नयी दिल्ली, 2 फरवरी । भारतीय नौसेना 3 फरवरी 24 को विशाखापट्टनम में नौसेना डॉकयार्ड में अपने सबसे नए सर्वे बेसल संध्याक को मुख्य अतिथि के रूप में रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह और विशिष्ट अतिथि के रूप में नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार की उपस्थिति में कमीशन करने के लिए पूरी तरह तैयार है। वाइस एडमिरल राजेश पेंढारकर, एफओसी-इन-सी पूर्वी नौसेना कमान और वरिष्ठ नौसेना अधिकारी और जीआरएसई अधिकारी भी इस मौके पर उपस्थित थे। यह आयोजन मैसर्स गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई), कोलकाता में निर्माणाधीन चार सर्वे वेसल्स (बड़े) जहाजों में से पहले को नौसेना में औपचारिक रूप से शामिल किए जाने का प्रतीक है। इस परियोजना का संचालन भारतीय नौसेना के वारशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा किया गया है।

बंदरगाह और समुद्र दोनों में एक कठोर और व्यापक परीक्षण कार्यक्रम पूरा करने के बाद संध्याक को 4 दिसंबर 2023 को भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया था। (https://pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=1982348)

जहाज की प्राथमिक भूमिका सुरक्षित समुद्री नेविगेशन को सक्षम करने की दिशा में बंदरगाहों, नौवहन चैनलों/मार्गों, तटीय क्षेत्रों और गहरे समुद्रों का पूर्ण पैमाने पर हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण करना है। अपनी अन्य भूमिका में, जहाज कई प्रकार के नौसैनिक अभियानों को अंजाम देने में सक्षम होगा।

नौसेना बेड़े में एक महत्वपूर्ण अतिरिक्त, संध्याक गहरे और उथले पानी के मल्टी-बीम इको-साउंडर्स, ऑटोनॉमस अंडरवाटर वाहन, दूर से संचालित वाहन, साइड स्कैन सोनार, डेटा अधिग्रहण और प्रसंस्करण प्रणाली सहित अत्याधुनिक हाइड्रोग्राफिक उपकरणों, सैटेलाइट बेस्ड पोजिशनिंग सिस्टम और स्थलीय सर्वेक्षण उपकरण से सुसज्जित है।

यह जहाज अपने पुराने संध्याक रूप से अपने वर्तमान अवतार में दोबारा आया है। पिछले संध्याक को 4 जून 21 को सेवामुक्त कर दिया गया था। नया संध्याक दो डीजल इंजनों द्वारा संचालित है और 18 समुद्री मील से अधिक की गति प्राप्त करने में सक्षम है। 110 मीटर लंबाई, 3400 टन वजनी और 80 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री के साथ, संधायक आत्मनिर्भर भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में भारत की बढ़ती जहाज निर्माण क्षमता का एक सच्चा प्रमाण है। संध्याक अमृत काल की राष्ट्रीय दृष्टि के अनुरूप विकसित भारत का सच्चा अग्रदूत भी है।

 

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