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उत्तराखण्ड में खगोल, धातु व कृषि विज्ञान पर विशेष अध्ययन केंद्र स्थापित करने पर विचार-विमर्श

देहरादून, 5  मई। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में उच्च स्तरीय बैठक कर ऋषिकुल, हरिद्वार स्थित श्री मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान के समग्र विकास एवं विस्तार योजनाओं की समीक्षा की। बैठक में संस्थान को भारतीय ज्ञान परंपरा, प्राचीन विज्ञान, संस्कृति और आधुनिक शोध के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने पर विस्तृत चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड केवल आस्था और अध्यात्म की भूमि ही नहीं, बल्कि ऋषियों, ज्ञान और वैज्ञानिक चिंतन की भी धरती रही है। ऋषिकुल, हरिद्वार स्थित इस महत्वपूर्ण संस्थान को नई पहचान देना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि संस्थान का कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाए और आगामी कुंभ से पूर्व इसे पूर्ण किया जाए। पर्यटन विभाग को इस परियोजना का नोडल विभाग बनाया गया है। मुख्यमंत्री ने प्रमुख सचिव श्री आर.के. सुधांशु को निर्देशित किया कि कार्यों की नियमित प्रगति की समीक्षा हेतु संबंधित विभागीय सचिवों के साथ पाक्षिक बैठकें आयोजित की जाएं। साथ ही विकास के साथ विरासत संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाए तथा राज्य के सभी जनपदों की लोक कलाओं पर आधारित गतिविधियों को भी इसमें शामिल किया जाए।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि संस्थान में वैदिक गणित, वेदों में निहित विज्ञान, उपनिषदों का दर्शन, भारतीय तर्कशास्त्र, पर्यावरण विज्ञान एवं जीवन मूल्यों पर आधारित शोध और अध्ययन की आधुनिक व्यवस्था विकसित की जाए। उन्होंने कहा कि भारत ने विश्व को शून्य, दशमलव प्रणाली, बीजगणित और त्रिकोणमिति जैसे महत्वपूर्ण गणितीय सिद्धांत दिए हैं। आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त और वराहमिहिर जैसे महान विद्वानों के योगदान को शोध और शिक्षा से जोड़ा जाना चाहिए।

बैठक में खगोल विज्ञान, धातु विज्ञान, कृषि विज्ञान तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विषयों पर विशेष अध्ययन केंद्र स्थापित करने पर भी विचार-विमर्श हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राचीन भारत में धातु विज्ञान, जल प्रबंधन, जैविक खेती और मौसम आधारित कृषि ज्ञान अत्यंत विकसित था, जिसे आधुनिक अनुसंधान से जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में वेदों और उपनिषदों में वर्णित नैतिक शिक्षा, अनुशासन, कर्तव्यबोध और मानवीय मूल्यों को समाज तक पहुंचाना जरूरी है। यह संस्थान शिक्षा के साथ-साथ संस्कार और राष्ट्र निर्माण का भी केंद्र बने। उन्होंने निर्देश दिए कि संस्थान में डिजिटल पांडुलिपि संरक्षण केंद्र, आधुनिक पुस्तकालय, शोध प्रयोगशालाएं, संगोष्ठी केंद्र तथा ई-लर्निंग सुविधाएं विकसित की जाएं।

बैठक में संस्थान को भारतीय विद्या की विभिन्न शाखाओं के गहन अध्ययन के साथ पर्यटन, आयुर्वेद, ज्योतिष और योग शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित करने पर भी चर्चा हुई। जानकारी दी गई कि संस्थान में ज्ञान, योग, ध्यान और भारतीय अध्यात्म की समृद्ध परंपराओं को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया जाएगा। इसके अंतर्गत श्रुति केंद्र में वेद, उपनिषद एवं शास्त्रीय ज्ञान, दर्शन केंद्र में भारतीय चिंतन, आयु केंद्र में आयुर्वेद एवं समग्र स्वास्थ्य विज्ञान, विज्ञान केंद्र में पारंपरिक ज्ञान प्रणालियां तथा कला केंद्र में भारतीय कला एवं संस्कृति की अभिव्यक्ति को विकसित किया जाएगा।

बैठक में प्रमुख सचिव श्री आर.के. सुधांशु, डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव श्री धीराज गर्ब्याल, श्री दीपक कुमार, डॉ. आर. राजेश कुमार, श्रीमती रंजना राजगुरु, हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष श्रीमती सोनिका, अपर सचिव श्री बंशीधर तिवारी तथा वर्चुअल माध्यम से जिलाधिकारी हरिद्वार श्री मयूर दीक्षित उपस्थित थे।

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