क्षेत्रीय समाचार

ग्वालदम-तपोवन सड़क बीआरओ को सौंपने की मांग तेज, नवंबर से आंदोलन की चेतावनी

सड़क हस्तांतरण में देरी से पिंडर घाटी में बढ़ रहा असंतोष, विधानसभा चुनाव के बहिष्कार की भी उठने लगी आवाज

 

-हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट-

थराली, 22 अक्टूबर। सामरिक, साहसिक पर्यटन और तीर्थाटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण प्रस्तावित ग्वालदम-नंदकेशरी-देवाल-वांण-तपोवन मोटर मार्ग को लोक निर्माण विभाग से सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) को हस्तांतरित करने की मांग को लेकर पिंडर घाटी में जन आंदोलन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। सड़क हस्तांतरण में हो रही देरी से क्षेत्रीय जनता में असंतोष बढ़ रहा है। इस संबंध में मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजने के साथ ही सोशल मीडिया पर वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव के बहिष्कार की चेतावनियां भी सामने आने लगी हैं। यह सड़क पिंडर घाटी के साथ ही नंदानगर (घाट) विकासखंड के विकास के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

दरअसल, भारत-तिब्बत सीमा से लगे कुमाऊं के धारचूला और गढ़वाल के जोशीमठ क्षेत्रों में सेना की आवाजाही तथा सैन्य साजो-सामान के परिवहन को सुगम बनाने के उद्देश्य से ग्वालदम-नंदकेशरी-देवाल-वांण-तपोवन मोटर मार्ग की योजना तैयार की गई थी। रक्षा मंत्रालय की ओर से कराए गए विस्तृत सर्वेक्षण में पाया गया कि इस मार्ग के निर्माण से दोनों सीमावर्ती क्षेत्रों के बीच सड़क की दूरी मौजूदा मार्ग की तुलना में लगभग 60 किलोमीटर कम हो सकती है। इससे सैन्य वाहनों और आवश्यक रक्षा सामग्री को एक सीमावर्ती क्षेत्र से दूसरे तक पहुंचाने में लगने वाला समय भी घटेगा।

सामरिक महत्व को देखते हुए रक्षा मंत्रालय ने अक्टूबर 2024 में इस सड़क परियोजना के लिए लगभग 936 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की थी। इसके निर्माण और रखरखाव की जिम्मेदारी सीमा सड़क संगठन को सौंपी गई। योजना के अनुसार लोक निर्माण विभाग को ग्वालदम से वांण तक लगभग 60 किलोमीटर लंबी मौजूदा सड़क बीआरओ को हस्तांतरित करनी थी, जबकि वांण से तपोवन तक लगभग 29 किलोमीटर नई सड़क का निर्माण बीआरओ द्वारा किया जाना प्रस्तावित था।

हालांकि, वर्ष 2025 में उत्तराखंड सरकार ने रक्षा मंत्रालय से अनुरोध किया कि वर्ष 2026 में प्रस्तावित विश्व प्रसिद्ध श्री नंदादेवी राजजात यात्रा को देखते हुए ग्वालदम से वांण तक की सड़क यात्रा संपन्न होने तक लोक निर्माण विभाग के थराली खंड के अधीन ही रखी जाए। रक्षा मंत्रालय ने राज्य सरकार के इस अनुरोध पर सहमति दे दी थी।

राज्य सरकार के इस निर्णय का पिंडर घाटी में विरोध शुरू हो गया। क्षेत्रीय लोगों का कहना था कि सामरिक और क्षेत्रीय विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण इस सड़क को तत्काल बीआरओ को सौंपा जाना चाहिए, ताकि इसके चौड़ीकरण, सुधार और नए निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ सके।

जनता के विरोध को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 7 दिसंबर 2025 को देवाल विकासखंड के सवाड़ गांव में आयोजित अमर शहीद सैनिक मेले के मंच से घोषणा की थी कि वर्ष 2026 की नंदादेवी राजजात यात्रा संपन्न होने के बाद ग्वालदम-वांण मोटर मार्ग को लोक निर्माण विभाग से बीआरओ को हस्तांतरित कर दिया जाएगा।

इस वर्ष प्रस्तावित नंदादेवी राजजात यात्रा आयोजित नहीं हो सकी, हालांकि सितंबर में श्री नंदादेवी बड़ी जात यात्रा संपन्न हो चुकी है। इसके बावजूद सड़क हस्तांतरण की दिशा में कोई ठोस प्रगति सामने नहीं आने से क्षेत्रीय जनता में एक बार फिर नाराजगी बढ़ने लगी है।

इसी क्रम में गुरुवार को ग्वालदम-नंदकेशरी-देवाल-वांण-तपोवन सड़क संघर्ष समिति के एक प्रतिनिधिमंडल ने थराली के उपजिलाधिकारी यदुवीर सिंह रावत से मुलाकात कर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में सड़क के सामरिक महत्व के साथ ही पिंडर घाटी और आसपास के क्षेत्रों के आर्थिक विकास, पर्यटन तथा तीर्थाटन की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए इसे तत्काल बीआरओ को हस्तांतरित करने की मांग की गई है।

समिति ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने शीघ्र सड़क हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू नहीं की तो नवंबर से जन आंदोलन प्रारंभ किया जाएगा। ज्ञापन में सड़क संघर्ष समिति के संयोजक महावीर बिष्ट, देवाल के ज्येष्ठ प्रमुख दीपक गड़िया, किशोर घुनियाल, गौरव खत्री, लखपत परिहार, मनोज पाल, दर्शन, यशवंत सिंह और गंगा सिंह सहित अन्य लोगों के हस्ताक्षर हैं।

विधानसभा चुनाव के बहिष्कार की चेतावनी भी

इस बीच ग्वालदम-तपोवन मोटर मार्ग को बीआरओ को हस्तांतरित करने की मांग सोशल मीडिया पर भी जोर पकड़ने लगी है। विभिन्न संदेशों में कहा जा रहा है कि यदि सरकार ने सड़क हस्तांतरण की मांग पूरी नहीं की तो देवाल विकासखंड में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव का बहिष्कार किया जा सकता है। इन संदेशों पर कई लोग समर्थन व्यक्त करते हुए चुनाव बहिष्कार की रणनीति बनाने की बात भी कर रहे हैं। हालांकि, चुनाव बहिष्कार को लेकर अभी किसी औपचारिक सामूहिक निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई है।

26 अक्टूबर को तय होगी आंदोलन की रणनीति

ग्वालदम-नंदकेशरी-देवाल-वांण-तपोवन सड़क संघर्ष समिति के संयोजक महावीर बिष्ट ने बताया कि सड़क को बीआरओ को हस्तांतरित करने की मांग को लेकर आंदोलन की रणनीति तैयार की जा रही है। इसके लिए 26 अक्टूबर को विकासखंड मुख्यालय देवाल में समिति के संयोजक मंडल की बैठक बुलाई गई है। बैठक में सरकार के रुख की समीक्षा करने के साथ ही आंदोलन की आगामी रूपरेखा तय की जाएगी।

इस प्रकार विधानसभा चुनाव से पहले ग्वालदम-तपोवन सड़क का मुद्दा पिंडर घाटी में एक बार फिर प्रमुख जनसमस्या के रूप में उभरने लगा है। अब देखना होगा कि राज्य सरकार सड़क हस्तांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाती है या क्षेत्रीय जनता को अपनी मांग मनवाने के लिए आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!