डीएम चमोली ने टीम के साथ पैदल दूरस्थ/दुर्गम गांव डुमक पहुँच कर किया विकास कार्यों का निरीक्षण

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-उत्तराखंड हिमालय ब्यूरो –

गोपेश्वर, 6 नवंबर। जिलाधिकारी हिमांशु खुराना ने शुक्रवार को 18 किलोमीटर की दुर्गम खडी चढाई पैदल तय करते हुए जिले के सबसे दूरस्थ गांव डुमक पहुंचे। इस दौरान उन्होंने सुदूरवर्ती गांव किमाणा, उच्छोग्वाड, कलगोठ और डुमक में ग्रामीणों की समस्याएं सुनी और विभिन्न विकास योजनाओं का स्थलीय निरीक्षण किया।

पिछले 32 साल बाद आज किसी जिलाधिकारी के सबसे दूरस्थ गांव डुमक गांव पहुंचने पर ग्रामीण खासे उत्साहित नजर आए। उन्होंने डीएम का फूल मालाओं एवं पारंपरिक बाध्य यंत्रों के साथ भव्य स्वागत करते हुए अपनी खुशी जाहिर की।

शुक्रवार को जिलाधिकारी सड़क मार्ग से उर्गम घाटी में स्थित किमाणा पहुंचे। यहां से दुर्गम पगडंडियों से उच्छोग्वाड, कलगोठ होते हुए 18 किलोमीटर की पैदल दूरी तय कर दूरस्थ गांव डुमक पहुंचे और दूरस्थ गांव क्षेत्रों में चौपाल लगाकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनी।

 

उर्गम घाटी में पड़ने वाला डुमक गांव उत्तराखंड राज्य का सबसे दूरस्थ पोलिंग बूथ भी है। जिलाधिकारी आज रात्रि प्रवास डुमक गांव मे ही करेंगे। अगले दिन डुमक मे स्कूल एवं विभिन्न विकास योजनाओं का निरीक्षण करने के बाद तोलीताल होते हुए गोपेश्वर पहुंचेंगे।

जिलाधिकारी ने कहा कि उनका यहां आने का मकसद दूरस्थ क्षेत्रों की समस्याएं और चुनौतियों का जानना और उनका स्थानीय स्तर पर समाधान करना है। सबसे दूरस्थ क्षेत्र तक सरकार की योजनाओं का लाभ पहुॅचे ये उनकी प्राथमिकता है। ग्रामीणों ने जो भी मांग और समस्याएं रखी है, उनका प्राथमिकता पर समाधान किया जाएगा। डीएम ने कहा कि नैसर्गिंक सुंदरता से परिपूर्ण डुमक गांव में पर्यटन की आपार संभावनाएं है। पर्यटन को नई दिशा देने के लिए नई सोच के साथ कदम बढ़ाए जाएंगे। उन्होंने ग्रामीणों से डुमक गांव लगाए गए स्वास्थ्य शिविर का लाभ उठाने और कृषि के माध्यम से किसान क्रेडिट कार्ड बनाने की बात कही।

इस दौरान कलगोठ और डुमक गांव के ग्रामीणों ने सैंजी-कुजौंमैकोट-बेमरू-डुमक मोटर मार्ग पर समरेखण विवाद की समस्या प्रमुखता से रखी। इस दौरान कलगोठ में रिक्त प्रधानाचार्य के पद पर तैनाती व प्रयोगशाला निर्माण, फसलों की सुरक्षा के लिए घेरबाड, डुमक में पर्यटन गतिविधियों को बढाने के लिए ट्रैक रूटों का सुधारीकरण और नेटवर्क की समस्या रखी। किमाणा में विद्यालय के खाली पडे भवन में आयुर्वेदिक अस्पताल का संचालन कराने की बात जिलाधिकारी के समक्ष रखी। इस दौरान जिला स्तरीय अधिकारियों ने विभिन्न विकास योजनाओं की जानकारी दी। स्वास्थ्य विभाग द्वारा शिविर लगाकर देर रात तक लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।

क्षेत्र भ्रमण के दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा.राजीव शर्मा, परियोजना निदेशक आनंद सिंह, ईई पीएमजीएसवाई परशुराम चमोली, सीईओ कुलदीप गैरोला, तहसीलदार रवि शाह, जिला समाज कल्याण अधिकारी वीके उनियाल आदि मौजूद थे।

उल्लेखनीय है कि डुमक गाँव उत्तराखंड में सड़क मार्ग से सबसे लंबी पैदल दूरी पर भगवान रूद्रनाथ की तलहटी में बसा गाँव है। यहाँ 3 अलग अलग रास्तो से होकर जा सकते है और तीनों मार्ग से 22 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। इस गांव में नगदी आलू, चौलाई व राजमा फसल की खेती बहुतायत में होती है। इस गांव के लिए पौराणीक मान्यता है कि माता पार्वती सती हुई और भगवान शिव को इसका पता चला तो उन्होंने डुमक गाँव के पास जोर से डमाक मारी और वीरभद्र को पैदा किया। इस गाँव में भी उन्हीं वीरभद्र का मंदिर है जिसे वजीर देवता कहते है। इस गाँव में मां नंदा देवी, भगवान शिव और नाग देवता का मंदिर भी है। वासुकी नाग का कुंड भी गाँव के लिये वरदान है। गाँव में कई जगह पानी की जलधाराएं भी है। डुमक गांव में करीब 91 और कलगोठ गांव में 90 परिवार रहते है।

 

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