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शिक्षा शास्त्र समग्र, आनन्ददायी व रुचिकर हो: डॉ. एन. पी. सिंह

हरिद्वार। 30 जून। पुनश्चर्या पाठ्यक्रम के 12वें दिन का सत्र योग अनुसंधान एवं विशेष शिक्षण पद्धतियों पर केन्द्रित रहा। प्रथम सत्र का सम्बोधन पतंजलि अनुंसधान की वैज्ञानिक डॉ. वेदप्रिया आर्या द्वारा किया गया। उन्होंने साहित्य समीक्षा एवं यादृच्छिक नियंत्रित अध्ययन की वैज्ञानिक प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। साथ ही उन्होंने पंतजलि अनुसंधान में चल रहे विभिन्न प्रयोग एवं परीक्षणों के परिणामों को भी साझा किया।

आई.आई.टी. रूड़की के प्रो0 डॉ0 नवनीत अरोड़ा ने अपने जीवन अनुभव को साझा करते हुए सभी प्रतिभागियों को अनवरत अपना उत्कर्ष करने की प्रेरणा प्रदान की। शिक्षा के व्यापक उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने व्यक्तित्व के सम्पूर्ण विकास को इसका प्रमुख उद्देष्य बताया। विशेष शिक्षण पद्धति पर बोलते हुए पूर्व आईएएस एवं भारतीय शिक्षा बोर्ड के कार्यवाहक अध्यक्ष डॉ. एन.पी.सिंह ने अपने व्याख्यान में भारतीय वाघ्मय में वर्णित शिक्षण पद्धतियों पर प्रकाश डाला। आचार्य के गुणों पर चर्चा के क्रम में उन्होंने बताया कि एक आचार्य को संयमी, वाचस्पति, ज्ञान निधि, मननशील व विचारक, दूरदर्शी, प्रसन्नचित्त मन वाला, भाषा वैज्ञानिक एवं निष्काम प्रतिबद्धता से युक्त होना चाहिए।


इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक प्रति-कुलपति प्रो. महावीर अग्रवाल ने उपस्थित प्रतिभागियों का मार्गदर्षन करते हुए कहा कि भारत गुरुओं का देश है और सद्गुरु ही सच्चे शिष्यों का निर्माण करते हैं। सह-संयोजिका कुलानुशासिका साध्वी डॉ. देवप्रिया ने सभी से सकारात्मक चिन्तन करने का मार्गदर्शन दिया और कहा कि जो सकारात्मक सोचते हैं वही जीवन देते हैं। कार्यक्रम में वि.वि. के सलाहकार प्रो. यादव, कुलसचिव डॉ. प्रवीण पुनिया, प्रो. पारन, स्वामी परमार्थदेव, डॉ. निर्विकार, स्वामी आर्शदेव सहित वि.वि. के विभिन्न संकायों के आचार्य एवं शोध छात्र उपस्थित रहे। सत्रों का सफल संचालन डॉ. संजय सिंह, डॉ. निधीश एवं डॉ. निवेदिता द्वारा किया गया।

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