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बदरीनाथ मंदिर में चढ़ावे में कथित हेराफेरी के आरोपों की जांच शुरू, सरकार-विपक्ष आमने-सामने

उषा रावत

देहरादून/गोपेश्वर। उत्तराखंड के प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित वित्तीय अनियमितताओं और हेराफेरी के आरोपों को लेकर प्रदेश की राजनीति गर्मा गई है। एक ओर राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने इसे गंभीर आर्थिक घोटाला बताते हुए सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। इस बीच प्रदेश के पर्यटन, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने स्पष्ट किया है कि सरकार किसी भी प्रकार की जांच से पीछे नहीं हटेगी और विपक्ष को राजनीति करने के बजाय जांच के निष्कर्षों का इंतजार करना चाहिए।

चार सदस्यीय समिति करेगी जांच

बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने चढ़ावे में कथित हेराफेरी के आरोपों की जांच के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति को एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही मंदिर परिसर में स्थापित सीसीटीवी कैमरों के फुटेज की भी विस्तृत जांच कराई जा रही है ताकि आरोपों की वास्तविकता सामने आ सके।

मंदिर समिति के अध्यक्ष ने बताया कि प्रथम दृष्टया कुछ शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनकी गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की गई है। समिति सभी संबंधित दस्तावेजों, अभिलेखों और सीसीटीवी फुटेज का परीक्षण करेगी। यदि जांच में किसी कर्मचारी अथवा अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

वित्तीय लेन-देन की भी होगी पड़ताल

समाचार के अनुसार जांच केवल चढ़ावे तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मंदिर के वित्तीय प्रबंधन और धनराशि के रख-रखाव की प्रक्रिया की भी समीक्षा की जाएगी। समिति यह भी देखेगी कि चढ़ावे के संग्रह, सुरक्षा और लेखांकन की व्यवस्था निर्धारित नियमों के अनुरूप संचालित हो रही थी या नहीं।

मंत्री सतपाल महाराज बोले— ‘हल्ला मचाने से कुछ नहीं होगा’

प्रदेश के पर्यटन एवं धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि सरकार जांच के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि केवल आरोप लगाने और हल्ला मचाने से सच्चाई सामने नहीं आती।

मंत्री ने कहा कि इससे पहले केदारनाथ धाम में कथित सोना चोरी के आरोप भी लगाए गए थे, लेकिन जांच में वे आरोप सही साबित नहीं हुए। उनके अनुसार मंदिर समिति ने सोने की परत की सुरक्षा के लिए तांबे पर गोल्ड प्लेटिंग कराई थी, जिसे लेकर अनावश्यक भ्रम फैलाया गया।

उन्होंने कहा कि बदरीनाथ और केदारनाथ में दान की परंपरा वर्षों पुरानी है तथा यदि किसी कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही बीकेटीसी अध्यक्ष को सीसीटीवी फुटेज की गहन जांच कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।

विपक्ष ने उठाए गंभीर सवाल

उधर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बदरीनाथ में कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे को जोरदार ढंग से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के प्रतिनिधियों के कार्यकाल में मंदिरों में आर्थिक अनियमितताओं के मामले सामने आ रहे हैं और सरकार इनका संतोषजनक जवाब देने में असफल रही है।

गोदियाल ने कहा कि पहले केदारनाथ धाम के सोने को लेकर विवाद हुआ और अब बदरीनाथ मंदिर में चढ़ावे को लेकर आरोप सामने आए हैं। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके।

कांग्रेस ने बनाई संसदीय समिति

कांग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना ने भी मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि राम मंदिर और बदरीनाथ धाम जैसे आस्था के केंद्रों में आर्थिक अनियमितताओं के आरोप देशभर के श्रद्धालुओं की भावनाओं को प्रभावित करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

मामले की निगरानी के लिए कांग्रेस ने एक संसदीय समिति भी गठित की है, जो जांच प्रक्रिया पर नजर रखेगी और अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी।

जांच रिपोर्ट का इंतजार

फिलहाल पूरे मामले में सभी की निगाहें बीकेटीसी द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं। सीसीटीवी फुटेज, दस्तावेजों और वित्तीय अभिलेखों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि यदि किसी स्तर पर अनियमितता प्रमाणित होती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जबकि विपक्ष इस मामले को जवाबदेही और पारदर्शिता से जोड़कर सरकार को घेरने में जुटा है।

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