मल्टीडिसीप्लीनरी रिसर्च और इंनोवेशन से मिलेगी ऊंची उड़ान

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तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के एफओईसीएस की ओर से सिस्टम मॉडलिंग एंड एडवांसमेंट इन रिसर्च ट्रेंड्स- स्मार्ट-2021 का समापन, भारत समेत रूस, यूके, रोमानिया, बहरीन, बांग्लादेश, हंगरी और सऊदी अरब के कुल आठ देशों के आईटी विशेषज्ञों ने साझा किए विचार

ख़ास बातें:

अडाप्टिव लर्निंग समय की आवश्यकता: डॉ. प्रकाश चौहान
इंनोवेशन से ही बदलाव संभव: डॉ. आशीष कुमार सिंह
बहुविषयक अनुसंधान वक्त की मांग: डॉ. एसएन सिंह
आईटी तकनीक से इंडस्ट्री 4.0 ने बदला व्यापार का स्वरुप: प्रो. एमएन हुडा
स्मार्ट-2021 में ब्लेंडेड मोड में पढ़े गए 134 शोध पत्र

—प्रो. श्याम सुंदर भाटिया
तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के एफओईसीएस की ओर से सिस्टम मॉडलिंग एंड एडवांसमेंट इन रिसर्च ट्रेंड्स- स्मार्ट-2021 के अंतिम दिन बतौर मुख्य अतिथि भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान-आईआईआरएस, देहरादून के निदेशक डॉ. प्रकाश चौहान ने कहा, हमें समस्याओं के प्रति पॉजिटिव सोच को अपनाना चाहिए। बहुविषयक अनुसंधान और अनुकूली शिक्षा ही किसी समस्या का समाधान करने में ज्यादा सक्षम है। उन्होंने अडाप्टिव लर्निंग पर जोर देते हुए निरंतर सीखते रहने की आदत डालने पर खासा जोर दिया। डॉ. चौहान बोले, हम अपने ही विषय के एक्सपर्ट के साथ ज्यादा सहज अनुभव करते हैं, जबकि अन्य विषयों के विशेषज्ञों के साथ हमें कुछ नया सीखने को मिलता है। आज का समय मल्टीडिसीप्लीनरी एक्सपर्ट बनने का है, जिसके लिए अन्य विषयों के एक्सपर्ट के साथ ज्ञान का आदान-प्रदान जरूरी है। इससे पूर्व र्स्माट-2021 का शुभारम्भ मुख्य अतिथि भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान-आईआईआरएस, देहरादून के निदेशक डॉ. प्रकाश चौहान, एफओईसीएस के निदेशक एवम् प्राचार्य प्रो. आरके द्विवेदी, माता वैष्णोदेवी यूनिवर्सिटी कटरा, जम्मू एंड कश्मीर में कंप्यूटर विभाग के हेड डॉ. मनोज कुमार गुप्ता, हल्द्वानी के कंप्यूटर विज्ञान और अनुप्रयोग संकाय के प्रोफेसर और चीफ प्रॉक्टर प्रो. एमके शर्मा आदि ने माँ सरस्वती के समक्ष संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलन और पुष्प अर्पित करके किया। विशिष्ट अतिथि एवं मुख्य वक्ता आईआईटी, कानपुर के ईई विभाग के प्रो. श्री निवास सिंह, भारती विद्यापीठ के कंप्यूटर अनुप्रयोग और प्रबंधन संस्थान- बीवीआईसीएएम, नई दिल्ली के निदेशक प्रो. एमएन हुडा, इलाहाबाद के ईई विभाग के पूर्व सेक्शन चेयर प्रो. आशीष कुमार सिंह और एमएमएमटीयू, गोरखपुर के ईई विभाग के सचिव डॉ. प्रभाकर तिवारी की ऑनलाइन मौजूदगी रही। स्टुडेंट्स अंजलि त्यागी, अज़्मी इस्माइल, दृष्टि जैन, आकांक्षा और पीयूष जैन ने सरस्वती वंदना की मधुर प्रस्तुति दी। कॉन्फ्रेंस चेयर डॉ. अशेंद्र कुमार सक्सेना ने स्वागत भाषण दिया। संचालन डॉ. प्रियांक सिंघल, डॉ. सोनिया जैन, श्रेया गुप्ता, अनन्य माथुर, रिदम गुलाटी और देवांश मिश्रा ने किया।

कॉन्फ्रेंस में माता वैष्णोदेवी यूनिवर्सिटी कटरा, जम्मू एंड कश्मीर में कंप्यूटर विभाग के हेड डॉ. मनोज कुमार गुप्ता ने अपने सम्बोधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास और उसके अनुपालन का विस्तार से उल्लेख किया। डॉ. गुप्ता बोले, एआई, एमएल, डीएल जैसी तकनीकें मशीनों को और स्मार्ट बना रही हैं। एक उज्जवल भविष्य के लिए हमें इन तकनीकों से खुद को अपडेट करना ही होगा। एमएमएमटीयू, गोरखपुर के ईई विभाग के सचिव डॉ. प्रभाकर तिवारी ने शोधकर्ताओं से कहा, असफलता स्थाई नहीं होती है। हमें निरंतर प्रयास करते रहने की आदत होनी चाहिए, तभी हम मंजिल को पा सकते हैं। भारती विद्यापीठ के कंप्यूटर अनुप्रयोग और प्रबंधन संस्थान- बीवीआईसीएएम, नई दिल्ली के निदेशक प्रो. एमएन हुडा ने आधुनिक तकनीक को मानवता के वेलफेयर के लिए अनुकूल बनाने पर जोर दिया। उन्होंने अपने सम्बोधन में कोविड-19 के दौरान बदले परिवेश में तकनीक के इस्तेमाल और इंडस्ट्री 4.0 के बदलते स्वरुप पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा, आज के तकनीकी विकास आने वाले कल का आधार तय कर रहे हैं। इंडस्ट्री 4.0 ने 100 सालों से चले आ रहे पारम्परिक व्यापार को बदल कर रख दिया है। आईआईटी, कानपुर के ईई विभाग के प्रो. श्री निवास सिंह ने बहुविषयक अनुसंधान को वक्त की मांग बताते हुए कहा, जो तकनीक मानव जाति की उन्नति में योगदान न दे वह तर्क संगत नहीं है। तकनीकी विकास से ही हम पाषाण युग से वर्तमान के डिजिटल युग तक पहुंचे हैं। इलाहाबाद के ईई विभाग के पूर्व सेक्शन चेयर प्रो. आशीष कुमार सिंह ने इंनोवेशन की आवश्यकता पर बल दिया। इंनोवेशन तथा इन्वेंशन के बीच के फर्क को रेखांकित करते हुए कहा, इंनोवेशन ही वास्तव में किसी इन्वेंशन का आउटपुट देते हैं। ये आउटपुट सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक या किसी अन्य रूप में हो सकते हैं।

दोनों दिनों के तकनीकी सत्रों के दौरान साउथ वैली यूनिवर्सिटी, मिस्र के सीई विभाग के प्रो. हम्माम अल्शज़ली, वोल्गोग्राड राज्य तकनीकी विश्वविद्यालय, रूस के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. डेनिला पैरगिन, डैफोडिल यूनिवर्सिटी, ढाका, बांग्लादेश के सीएसई विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर मो. अब्दुस सत्तार, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी के कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. संजय कुमार गुप्ता, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़ के इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. इमरान उल्लाह खान, चंडीगढ़ विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के अनुसंधान समन्वयक और प्रोफेसर डॉ. आनंद शुक्ला, गलगोटिया विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा के कंप्यूटिंग साइंस एंड इंजीनियरिंग स्कूल के प्रोफ़ेसर डॉ. प्रशांत जौहरी, डीआईटी विश्वविद्यालय, देहरादून के डॉ. अजय नारायण शुक्ला, कोनेरु लक्ष्मईया एजुकेशन फ़ाउंडेशन, वड्डेश्वरम, आंध्र प्रदेश के सीएसई विभाग के प्रोफेसर डॉ. संदीप कुमार, जीजीएसआईपी विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के सूचना संचार और प्रौद्योगिकी स्कूल के प्रोफ़ेसर डॉ. संजय कुमार मलिक, राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, बांदा के आईटी हेड डॉ. विभाष यादव, शारदा विश्वविद्यालय, उज़्बेकिस्तान की एसोसिएट डीन डॉ. पूजा, पेट्रोलियम और ऊर्जा अध्ययन विश्वविद्यालय, देहरादून की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुशीला दहिया, चंडीगढ़ विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के प्रोफ़ेसर डॉ. राजीव कुमार, चितकारा विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी संस्थान के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अंबुज कुमार अग्रवाल, आम्रपाली ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट, हल्द्वानी के कंप्यूटर विज्ञान और अनुप्रयोग संकाय के प्रोफेसर और चीफ प्रॉक्टर प्रो. एमके शर्मा, जेएनयू, नई दिल्ली के कंप्यूटर और सिस्टम स्कूल के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. करन सिंह,एएमयू, अलीगढ़ के कंप्यूटर इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. मोहम्मद सरोश उमर, श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय, जम्मू के कंप्यूटर विज्ञान और अभियांत्रिकी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में भारत समेत रूस, यूनाइटेड किंगडम, रोमानिया, बहरीन, बांग्लादेश, हंगरी और सऊदी अरब के रिसर्चर्स ने उभरती तकनीकी, आईओटी और वायरलेस संचार, डिजिटल इंडिया पहल, संचार और नेटवर्क प्रसारण, सिग्नल छवि और संचार प्रौद्योगिकी, सम्मेलन ट्रैक, उपकरण, सर्किट, सामग्री और प्रसंस्करण, रोबोटिक्स, नियंत्रण, इंस्ट्रुमेंटेशन और स्वचालन, बायोमेडिकल इंजीनियरिंग और हेल्थकेयर टेक्नोलॉजीज, पावर, एनर्जी और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, शासन, जोखिम और अनुपालन, ब्लॉक चेन टेक्नोलॉजी, उद्योग 4.0, शिक्षा 4.0, सिस्टम मॉडलिंग और डिजाइन कार्यान्वयन जैसे विषयों पर कुल 134 शोध पत्र पढ़े।

अंत में डॉ. गुलिस्तां खान ने कॉन्फ्रेंस में आये सभी मेहमानों समेत स्मार्ट के सफल आयोजन के लिए एफओईसीएस के सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया। कॉन्फ्रेंस का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। इस अवसर पर प्रो. आरसी त्रिपाठी, डॉ. अर्पित जैन, डॉ. शंभु भारद्वाज, डॉ. संदीप वर्मा, डॉ. पंकज गोस्वामी, डॉ. पराग अग्रवाल, डॉ. विनय मिश्रा, डॉ. मेघा शर्मा, श्रीमती शिखा गंभीर, श्रीमती हिना हाशमी, श्री रूपल गुप्ता, श्री प्रदीप कुमार गुप्ता, श्री नवनीत विश्नोई प्रथम, श्री नवनीत विश्नोई द्वितीय, श्रीमती रंजना शर्मा, श्री अभिलाष कुमार, श्री ज्योति रंजन लाभ, श्री मनीष तिवारी, श्री निखिल सक्सेना आदि की गरिमामयी मौजूदगी रही।

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