ज्योलिकोट में दूषित पेयजल पर सख्ती, 15 दिन में प्रदेश की प्रमुख जल योजनाओं का होगा भौतिक सत्यापन
देहरादून, 23 सितम्बर। नैनीताल के ज्योलिकोट में दूषित पेयजल की घटना के बाद शासन ने प्रदेशभर की पेयजल व्यवस्था की व्यापक जांच के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने बुधवार को सचिवालय में संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ घटना की समीक्षा करते हुए अगले 15 दिनों में प्रमुख पेयजल योजनाओं का भौतिक सत्यापन कराने को कहा। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी घटना में प्रथम दृष्टया लापरवाही सामने आने पर संबंधित विभागाध्यक्षों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य सचिव ने इस बात पर नाराजगी जताई कि मजबूत मैदानी तंत्र होने के बावजूद ज्योलिकोट में दूषित पानी की जानकारी समय पर शासन तक नहीं पहुंच सकी। उन्होंने शिक्षक, पटवारी, ग्राम पंचायत अधिकारी और नलकूप संचालकों सहित मैदानी कर्मचारियों को जोड़कर स्थायी सूचना और निगरानी तंत्र विकसित करने के निर्देश दिए।
प्रदेश की प्रमुख पेयजल योजनाओं की भू-मानचित्रण और भौगोलिक सूचना प्रणाली के माध्यम से संदर्भित मानचित्र तैयार किए जाएंगे। जलस्रोत से उपभोक्ता तक भंडारण टैंक, पाइपलाइन, सीवर लाइन और दोनों लाइनों के मिलने या एक-दूसरे को पार करने वाले स्थानों को चिह्नित किया जाएगा। 15 दिन के सत्यापन अभियान में संभावित लीकेज, पुराने पाइप, टैंकों की सफाई, क्लोरीनीकरण तथा पानी में कॉलीफॉर्म सहित जरूरी मानकों की जांच होगी।
मुख्य सचिव ने पेयजल और सीवर लाइनों की जांच के लिए स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया तैयार कर उसका कड़ाई से पालन कराने को कहा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सीवेज शोधन संयंत्रों और सतही जल के साथ प्रमुख शहरों में पेयजल की गुणवत्ता की नियमित जांच तथा सभी सीवेज शोधन संयंत्रों का औचक निरीक्षण कराने के निर्देश दिए गए।
स्वास्थ्य विभाग को दूषित पेयजल का मामला सामने आते ही चिकित्सकीय दल भेजने और अगले 15 दिनों में प्रदेशभर में स्वास्थ्य निगरानी एवं आवश्यक जांच करने को कहा गया है। जिला स्तरीय समितियों को भी केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित न रहकर स्थायी निगरानी व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए गए।
मुख्य सचिव ने पुराने जल नेटवर्क की जानकारी के लिए सेवानिवृत्त लाइनमैन और अनुभवी मैदानी कर्मचारियों की सेवाएं लेने का सुझाव भी दिया। बैठक में सचिव डॉ. रणवीर सिंह चौहान, डॉ. वी. षणमुगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते और जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक डी.के. सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। नैनीताल के जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बैठक में शामिल हुए।
