चिरंजी लाल पर्यावरण ब्याख्यान में वन पर्यावरण एवं हिमालय पर चर्चा

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जोशीमठ, 22 सितम्बर।सी पी भट्ट पर्यावरण एवं विकास केंद्र और रा.स्ना.महा.विद्या.जोशीमठ के सयुक्त तत्वाधान में गुरुवार को महाविद्यालय परिसर में स्व. चिरंजी लाल पर्यावरण ब्याख्यान का आयोजन किया गया। जिसमें प्रसिद्ध पर्यावरणविद डा. आर बी एस रावत ने अपने विचार और अनुभव साझा किए।

उनका कहना था कि किसी दूसरे की ओर देखने के बजाय हम क्या कर सकते हैं, अपनी क्षमता के अनुसार उसे करना चाहिए। इससे न केवल हमारा परिवेश सुरक्षित रहेगा अपितु हम देश और दुनिया की भलाई भी कर सकेंगे।
महाविद्यालय के सभागार में आयोजित चतुर्थ व्याख्यान माला में बोलते हुए उत्तराखंड के पूर्व प्रमुख मुख्य वन संरक्षक डॉ आर बी एस रावत ने छात्र- छात्राओं को वन पर्यावरण एवं हिमालय के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि जल एवं जंगल हमारे जीवन के महत्वपूर्ण आधार है।

वन जहाँ प्राण वायु के स्रोत है वही वातावरण से कार्बन के अवशोसक भी है।ये हमारी जल सहित लगभग अन्य सभी जरूरतों को पूरा करते है। हिमालय हमारी सदानीरा नदियों के उद्गम स्रोत होने के साथ ही सदाबहार वनों का घर भी है। वन एवं जल के प्रति यदि हमें अभी से संवेदनशील होना ही होगा। यदि अभी हमने इनके प्रति संवेदंशीलता नही हुए तो भविष्य में हमें व आने वाली पीढ़ी को शुद्ध जल एवं वायु समस्याओं से दो चार होना पड़ेगा।इसी क्रम में उन्होंने छात्रों से यह भी कहा कि मेहनत से नही घबराने व ऊँचे ख्वाब देखने से से ही सपने साकार होते हैं। उन्होेंने छात्रों से स्वामी विवेकानंद के जीवन से प्रेरेणा लेने प्रगतिशील बनने के साथ ही अच्छाइयों को आत्मसात करने को कहा। छात्रों से दैनिक जीवन में ऊर्जा संरक्षण के साथ ही जल संरक्षण की प्रवृत्ति अपनाने का आह्वान भी किया।
उन्होंने ईकोपिक पद्धति की जानकारी देते हुए पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में इसकी महत्ता पर प्रकाश डाला।

ब्याख्यानमाला के आयोजक सी पी भट्ट पर्यावरण एवं विकास केंद्र की ओर से ओम प्रकाश भट्ट ने स्वागत करते हुए केंद्र द्वारा संचालित गतिविधियों की जानकारी दी और कहा कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से जहाँ एक ओर क्षेत्रीय स्तर पर वैश्विक छाप छोड़ने वाले सामाजिक सरकारों से जुड़े हमारे इन समाजसेवी पुरोधाओं के कार्यों की जानकारी युवाओं को होती है तो दूसरी ओर हमारे विद्वानों और अनुभवी लोगों के अनुभव का लाभ भी युवाओं को मिलता है। इससे उनमे पर्यावरणीय संचेतना विकसित होती है,उन्हें अपने जल एवं जंगल के प्रति संवेदनशील बनाना है।

इस दौरान जड़ी बूटी शोध संस्थान के वरिष्ठ विज्ञानी डॉ सी.पी.कुनियाल ने छात्रों को डॉ आर बी एस रावत के जीवन परिचय पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उनके द्वारा किये गए शोध कार्यों की जानकारी दी।कार्यक्रम में सीपीबीसीईडी के समन्वयक विनय सेमवाल द्वारा समाज सेवी चिरंजी लाल भट्ट द्वारा सामाजिक क्षेत्र में किये गए कार्यों की जानकारी दी।

गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए चिपको आंदोलनकारी तथा सर्वोदयी नेता मुरारी लाल द्वारा चिपको आंदोलन के दौरान के अपने संस्मरणो से अवगत कराया। महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डा.बीएन खाली ने ब्याख्यान के महत्व पर प्रकाश डाला।सामाजिक कार्यकर्ता और पूर्व अधिशासी अधिकारी शान्ति प्रसाद भट्ट ने समाजसेवा और उनके दूरगामी प्रभावों से जुड़े अनुभव साझा किए।

इससे पूर्व कार्यक्रम की विधिवत शुरूआत मुख्य अथिति द्वारा दीप प्रज्वलन तथा महा विद्यालय की छात्राओं द्वारा स्वागतगान से हुई।कार्यक्रम में संस्थान द्वारा मुख्य अथिति को प्रशस्ति पत्र एवं अंगवस्त्र भी भेंट किया गया।ब्याख्यान का संचालन महाविद्यालय के संस्कृत विभाग के सहायक प्रौफेसर नवीन पंत ने किया।

विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम मे विद्यालय के प्रौफेसर डॉ जी के सेमवाल, डॉ चरण सिंह ,शिव सिंह कुँवर, डॉ बीना, डॉ मोनिका सती, डॉ नवीन, राजेंद्र सिंह जड़ी बूटी शोध संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ सी पी कुनियाल सहित विद्यालय के सभी कर्मचारियों सहित समस्त छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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