उत्तराखंड संस्कृत विवि में हिंदी दिवस समारोह का भव्य आयोजन
हरिद्वार, 14 सितम्बर। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार में हिंदी दिवस पूरे उत्साह से मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित समारोह में वक्ताओं ने कहा कि हिंदी की शब्द सामर्थ्य व बहु प्रयोजनीयता आज विश्वविख्यात है।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलानशासक एवं लब्ध प्रतिष्ठित साहित्यकार, प्रो.दिनेश चंद्र चमोला ने समारोह में कहा कि आज हिंदी विश्व के बहुत बड़े बाजार व समुदाय की भाषा ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों व शोधार्थियों के लिए वृत्ति के अनेकानेक लाभकारी सुअवसर सुलभ कराने वाली एक सशक्त भाषा है। हिंदी की शब्द सामर्थ्य व बहु प्रयोजनीयता आज विश्वविख्यात है।
डा0 चमोला ने कहा कि आज विश्व के 175 से अधिक विश्वविद्यालयों में हिंदी के अध्ययन-अध्यापन, शोध एवं प्रचार-प्रसार का कार्य निरन्तर प्रगति की ओर अग्रसर है । 14 सितंबर, 1949 को भारतीय संविधान द्वारा अंगीकृत भाषा ने आज ज्ञान-विज्ञान से लेकर अनेकानेक ज्ञानधाराओं में अपने अस्तित्व का परचम लहराया है, यह राजकाज की समृद्ध प्रशासनिक, वैज्ञानिक व तकनीकी शब्दावली से लेकर उच्च-शिक्षा में ग्रंथ निर्माण तक के कार्य में महनीय भूमिका का निर्वहन कर रही है ।
प्रो. चमोला ने अपने उद्बोधन में काव्य लेखन के बारे में न केवल अपने प्रारंभिक दिनों की उर्वर रचनाधर्मिता का स्मरण कर हिंदी के दिग्गज साहित्यकारों बाबा नागार्जुन व विष्णु प्रभाकर आदि के साथ हुए साक्षात्कारों के संस्मरण सुनाए, अपितु उपस्थित श्रोताओं को प्रेरित कर उनसे तत्काल आशु कविताएँ रचवाकर प्रस्तुत भी करवाई। शास्त्री, आचार्य व पीएच .डी. के 36 छात्र-छात्राओं ने इसमें अपनी तत्काल स्वरचित कविताएँ सुनाईं। निर्णायकों में डॉ. शैलेश कुमार तिवारी, संकायाध्यक्ष, डॉ. प्रकाश चन्द्र पंत, सहायक आचार्य, शिक्षा शस्त्र ने भी अपने उद्बोधन के साथ अपनी रचनाएँ सुनाईं। प्रो. चमोला ने
‘जालिम व्यथा भुलावा देकर,
छुड़ा गई है गांव
महानगर से देखूं कैसे,
वह बरगद की छांव’ गाकर सुनाया ।
छात्र-छात्राओं की सुंदर प्रस्तुति से प्रसन्न हो प्रो. चमोला ने अपनी ओर से प्रतिभाग कर चुके 36 प्रतिभागियों में से स्थान प्राप्त करने वाले श्री दीपक प्रसाद रतूड़ी,को ₹ 700/- का प्रथम, रेखा रानी ₹ 500/- का द्वितीय (दोनों शोध छात्र) तथा कु.
मनीषा, एम ए प्रथम वर्ष को ₹ 300/- का तृतीय पुरस्कार प्रोत्साहन स्वरूप प्रदान किया। इस अवसर चन्द्रमोहन, वंश शर्मा, ईशा चौधरी, विवेक जोशी, गिरीश सती व हिंदी के सहायक आचार्य, डॉ उमेश कुमार शुक्ल आदि उपस्थित रहे।
