भारत में निर्मित उन्नत स्टील्थ फ्रिगेट ‘आईएनएस महेन्द्रगिरि’ को शामिल
Named after the Mahendragiri mountain range in the Eastern Ghats, INS Mahendragiri symbolises strength, steadfastness and indomitable resolve, and bears the motto ‘Mighty, Majestic, Matchless’. Built through the contribution of more than 200 Indian industries, including numerous MSMEs, the ship reflects India’s growing defence manufacturing capability. The frigate features advanced stealth characteristics, a Combined Diesel or Gas propulsion system, an Integrated Platform Management System and advanced indigenous combat systems.

नयी दिल्ली, 11 जुलाई . भारतीय नौसेना ने 11 जुलाई, 2026 को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में आयोजित एक समारोह में स्वदेशी रूप से निर्मित उन्नत स्टील्थ फ्रिगेट ‘आईएनएस महेन्द्रगिरि’ को अपने पूर्वी बेड़े में शामिल किया। रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में इस अग्रिम पंक्ति के युद्धपोत को असाधारण डिजाइन क्षमताओं, विनिर्माण उत्कृष्टता, नौसेना-औद्योगिक तंत्र के तीव्र विकास और समय पर अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म प्रदान करने की क्षमता के आधार पर जहाज निर्माण में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता का प्रतीक बताया।


‘आईएनएस महेन्द्रगिरि’ प्रोजेक्ट 17ए के अंतर्गत आने वाला छठा स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट है जिसे मात्र डेढ़ वर्ष के अंतराल में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया है। इस श्रृंखला का पहला जहाज ‘आईएनएस नीलगिरि’ जनवरी 2025 में शामिल किया गया इसके बाद अगस्त में ‘आईएनएस उदयगिरि’ और ‘आईएनएस हिमगिरि’, इस वर्ष अप्रैल में ‘आईएनएस तारागिरि’ और पिछले महीने ‘आईएनएस दुनागिरि’ को शामिल किया गया। भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किया गया और मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) द्वारा निर्मित यह जहाजी बेड़ा वायु रक्षा, सतह-विरोधी युद्ध, पनडुब्बी-रोधी युद्ध, समुद्री अवरोधन, निगरानी और मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर) सहित समुद्री अभियानों को पूरा करने में सक्षम है।

75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से निर्मित इस युद्धपोत का विस्थापन लगभग 6,670 टन है और यह 28 समुद्री मील प्रति घंटे तक की गति प्राप्त करने में सक्षम है। यह सुपरसोनिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों, मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों, पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमताओं और एक बहु-भूमिका वाले हेलीकॉप्टर से सुसज्जित है, साथ ही इसमें उन्नत स्टील्थ विशेषताएं, आधुनिक सेंसर, नेटवर्क-केंद्रित युद्ध प्रणाली और अत्याधुनिक हथियार भी मौजूद हैं।
श्री राजनाथ सिंह ने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा, “आईएनएस महेन्द्रगिरि को दुनिया की सबसे तेज और सबसे घातक क्रूज मिसाइलों में से एक ब्रह्मोस सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल से सुसज्जित किया जा सकता है। इसमें बहुक्रियाशील रडार और सतह से वायु में मार करने वाली मिसाइलें लगी है जो लंबी दूरी पर हवाई खतरों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम है। इसके शस्त्रागार में स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर, टॉरपीडो लॉन्चर, एकीकृत पनडुब्बी रोधी रक्षा प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और क्लोज-इन वेपन सिस्टम भी शामिल हैं। ये सभी क्षमताएं युद्धपोत को दुर्जेय और अभेद्य बनाती हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि यह “समुद्री पोत” न केवल तट के पास बल्कि गहरे महासागरों में भी भारत के समुद्री हितों की रक्षा करेगा।
रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर युद्ध, अंतरिक्ष-आधारित क्षमताएं, हाइपरसोनिक हथियार और मानवरहित प्रणालियां जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों ने युद्ध के स्वरूप को काफी हद तक बदल दिया है, फिर भी पारंपरिक सैन्य क्षमताएं प्रभावी रक्षा का आधार है। उन्होंने कहा, “भविष्य के युद्ध कृत्रिम बुद्धिमत्ता से लड़े जा सकते हैं, लेकिन उन्हें राष्ट्रीय संकल्प, प्रशिक्षित सैनिकों और विश्वसनीय सैन्य शक्ति से ही जीता जाएगा।” उन्होंने इस बात पर बल दिया कि उन्नत प्रौद्योगिकियां और पारंपरिक प्रणालियां एक-दूसरे की पूरक हैं, न कि प्रतिस्पर्धी।
श्री राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की ओर से अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों में निवेश करते हुए अपनी पारंपरिक क्षमताओं को मजबूत करने के प्रति संतुलित दृष्टिकोण बनाए रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए पारंपरिक और आधुनिक क्षमताओं के प्रभावी एकीकरण का एक उत्कृष्ट उदाहरण था।” उन्होंने आगे कहा कि आईएनएस महेन्द्रगिरि तकनीकी रूप से उन्नत और युद्ध के लिए तैयार नौसेना के निर्माण के प्रति राष्ट्र की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि समुद्री और आर्थिक सुरक्षा आपस में घनिष्ठ रूप से जुड़ी हुई है और समुद्र न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा बल्कि व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने हिंद-प्रशांत क्षेत्र के रणनीतिक महत्व का उल्लेख करते हुए, क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास (सागर) की परिकल्पना के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।
श्री राजनाथ सिंह ने कहा, “भारत एक मजबूत सुरक्षा प्रदाता और एक विश्वसनीय भागीदार है जो पूरे क्षेत्र में सुरक्षा और विकास सुनिश्चित करने के लिए समर्पित है।” उन्होंने संकटग्रस्त क्षेत्रों से भारतीय और विदेशी नागरिकों को निकालने, समुद्री डकैती विरोधी अभियानों और आपदा-रोधी अभियानों में भारतीय नौसेना की निरंतर भूमिका की सराहना की। उन्होंने आगे कहा कि भारतीय नौसेना अपनी समयबद्ध और प्रभावी परिचालन प्रतिक्रिया के माध्यम से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता और पसंदीदा सुरक्षा भागीदार है।
पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान भारतीय नौसेना की भूमिका का उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा अभियान के तहत नौसेना ने 9,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के आवश्यक माल से लदे 18 व्यापारिक जहाजों की रक्षा की। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि ये प्रयास न केवल एक लड़ाकू बल के रूप में बल्कि भारत के आर्थिक हितों के प्रमुख रक्षक के रूप में भी नौसेना की भूमिका को दर्शाते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आईएनएस महेन्द्रगिरि इस समग्र समुद्री रणनीति को और मजबूत करेगा। यह पूर्वी तट की शक्ति को बढ़ाएगा, भारत की समुद्री पहुंच को बढ़ाएगा और हिंद महासागर क्षेत्र में इसकी उपस्थिति को और मजबूत करेगा।
श्री राजनाथ सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि स्वदेशी युद्धपोत निर्माण केवल युद्धक मंचों के निर्माण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह डिजाइन क्षमताओं, तकनीकी विशेषज्ञता, कुशल मानव संसाधन और समग्र समुद्री औद्योगिक तंत्र को भी मजबूत करता है। उन्होंने आगे कहा कि जहाज निर्माण इस्पात, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर, प्रणोदन प्रणाली, सॉफ्टवेयर, सटीक इंजीनियरिंग और रसद सहित कई क्षेत्रों में विकास को गति देता है, रोजगार सृजित करता है, नवाचार को बढ़ावा देता है और आर्थिक विकास में योगदान देता है।
रक्षा मंत्री ने भारत को जहाज निर्माण और समुद्री रक्षा नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के सरकार के दृष्टिकोण पर जोर देते हुए कहा कि देश मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 जैसी पहलों के माध्यम से प्रगति कर रहा है। इसका उद्देश्य बंदरगाहों का आधुनिकीकरण करना, अंतर्देशीय जलमार्गों का विस्तार करना, रसद नेटवर्क को मजबूत करना और विश्व स्तरीय समुद्री तंत्र विकसित करना है। उन्होंने समुद्री विकास कोष, जहाज निर्माण वित्तीय सहायता योजना और जहाज निर्माण विकास योजना सहित प्रमुख उपायों का भी उल्लेख किया, जिनका उद्देश्य औद्योगिक क्षमता को बढ़ाना, आत्मनिर्भरता को मजबूत करना और आर्थिक हितों की रक्षा करना है।
श्री राजनाथ सिंह ने देश के युवा उद्यमियों, इंजीनियरों, नवोन्मेषकों, शोधकर्ताओं और निवेशकों से भविष्य के युद्ध की दिशा तय करने वाली प्रौद्योगिकियों को विकसित करके राष्ट्र निर्माण में योगदान देने और भारत को आत्मनिर्भर बनाने वाली प्रणालियों का निर्माण करने का आह्वान किया।
नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन ने आईएनएस महेन्द्रगिरि को भारत की बढ़ती समुद्री क्षमता और तकनीकी आत्मनिर्भरता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि छठा प्रोजेक्ट 17ए फ्रिगेट का शामिल होना स्वदेशी युद्धपोत निर्माण में एक और उपलब्धि है जिससे भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय नौसेना युद्ध के लिए तैयार, विश्वसनीय, एकजुट और भविष्य के लिए तैयार बल है।

नौसेना प्रमुख ने आगे कहा कि 75% से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ-साथ, एमडीएल और नौसेना ने इस परियोजना में कई नए मानदंड स्थापित किए हैं, जिनमें शुरू करने से लेकर सुपुर्दगी तक की समयावधि में लगभग 50% की कमी शामिल है। यह अवधि 63 महीने से घटकर 31 महीने हो गई है। उन्होंने यह भी बताया कि कुल निर्माण समय में लगभग 20% की कमी आई है। यह 95 महीने से घटकर 75 महीने हो गया है और सभी तकनीकी विश्लेषण सामान्यतः लगने वाले पांच से सात समुद्री परीक्षणों के बजाय केवल एक ही समुद्री परीक्षण में पूरे कर लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियां एमडीएल, भारतीय निर्माताओं, एमएसएमई, युद्धपोत निरीक्षण दल, परीक्षण एजेंसियों और चालक दल के संयुक्त प्रयासों को दर्शाती हैं।



समारोह में कमीशनिंग पताका को पारंपरिक रूप से तोड़कर जहाज पर राष्ट्रीय ध्वज को पहली बार फहराया गया। इस अवसर पर पूर्वी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमान-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय भल्ला, सीएमडी, एमडीएल कैप्टन जगमोहन (सेवानिवृत्त), वरिष्ठ नौसेना अधिकारी, पूर्व सैनिक, जहाज निर्माण उद्योग के प्रतिनिधि और अन्य आमंत्रित अतिथि उपस्थित थे।
आईएनएस महेन्द्रगिरि के बारे में
पूर्वी घाट की महेन्द्रगिरि पर्वत श्रृंखला के नाम पर नामित, आईएनएस महेन्द्रगिरि शक्ति, दृढ़ता और अदम्य संकल्प का प्रतीक है और इसका आदर्श वाक्य है ‘शक्तिशाली, विशाल, अद्वितीय’। कई एमएसएमई सहित 200 से अधिक भारतीय उद्योगों के योगदान से निर्मित यह जहाज भारत की बढ़ती रक्षा विनिर्माण क्षमता को दर्शाता है। इस फ्रिगेट में उन्नत स्टील्थ विशेषताएं, संयुक्त डीजल या गैस प्रणोदन प्रणाली, एकीकृत प्लेटफॉर्म प्रबंधन प्रणाली और उन्नत स्वदेशी युद्ध प्रणालियां मौजूद हैं।
भारतीय नौसेना के सनराइज बेडे़, पूर्वी बेड़े में शामिल होने पर, आईएनएस महेन्द्रगिरि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री युद्ध क्षमता और परिचालन पहुंच को अत्यधिक बढ़ाएगा जिससे महासागर की परिकल्पना के तहत भविष्य के लिए तैयार नौसेना के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को बल मिलेगा।
