फ्रांस की बेस्टिल दिवस परेड में भाग लेने के लिए भारत की तीनों सेनाओं का एक दल फ्रांस के लिए रवाना

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14 July is celebrated as the Fête Nationale Française or the National Day in France. It is also known as Bastille Day as this day is the anniversary of the Storming of the Bastille in 1789 during the French Revolution. This year, the Prime Minister of India, Shri Narendra Modi has been invited as the Guest of Honour at the Bastille Day Parade in France. The parade will witness a 269-member tri-services contingent of the Indian Armed Forces marching alongside their French counterparts. The contingent has left for France today.

uttarakhandhimalaya.in

नयी दिल्ली, 6 जुलाई ।  चौदह जुलाई को फ्रांस में ‘फेटे नेशनले फ्रांसेइस’ या राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसदिनको बैस्टिल दिवस के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि 1789 में हुई फ्रांसीसी क्रांति के दौरान इस दिन बैस्टिल पर हमला हुआ था। इस दिवसको उस हमले की वर्षगांठ मनाई जाती है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी को इस वर्षफ्रांस में आयोजित होने वाली ‘बैस्टिल डे परेड’ में सम्मानित अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। इस वर्ष की परेड में भारतीय सशस्त्र बलों केतीनों अंगों की 269 सदस्यीय टुकड़ी फ्रांस की तीनोंसेनाओं की टुकड़ी के साथ मार्च करते हुए दिखाई देगी। यह टुकड़ी आज फ्रांस के लिए रवाना हो गई है।

भारत और फ्रांस की सेनाओं के बीच यह परस्‍पर संबंध प्रथम विश्व युद्ध से ही जारी है। इस युद्ध में 13 लाख से अधिक भारतीय सैनिकों ने भाग लिया था, इनमें से लगभग 74,000 सैनिकों ने कीचड़ भरी खाइयों में लड़ाई लड़ी थीऔर वे फिर कभी वापस नहीं लौटे,जबकि अन्य 67,000 सैनिक घायल हो गए थे। भारत के सैनिकफ्रांस की धरती पर भी बहुत बहादुरी से लड़े थे। उनके साहस, वीरता और सर्वोच्च बलिदान से न केवल दुश्मन को विफल कर दिया था,बल्कि उन्‍होंने युद्ध जीतने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया था। इसके बाद दूसरे विश्व युद्ध में 25 लाख से अधिक भारतीय सैनिकों ने एशिया से लेकर अफ्रीका और यूरोप तक युद्ध के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। उनके योगदान में फ्रांस के युद्धक्षेत्र भी शामिल रहे थे। भारतीय सैनिकों ने इन युद्धों में अपनी वीरता के मानदंड स्थापित किए, जिसकेकारण भारतीय सैनिकों को अनेक वीरता पुरस्कारों के रूप में अच्छी पहचान मिली।

इस वर्ष दोनों देश रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे होने का समारोह मना रहे हैं। दोनों देशों की सेनाएं संयुक्त अभ्यासों में हिस्सा ले रही हैं और अपने-अपने अनुभवोंको भी साझा कर रही हैं। पिछले कुछ वर्षों के दौरान भारत और फ्रांस विश्वसनीय रक्षा भागीदार बन गए हैं।

भारतीय सेना की टुकड़ी में 77 मार्चिंग सैन्‍यकर्मी और बैंड के 38 सदस्य भी शामिल हैं, जिसका नेतृत्व कैप्टन अमन जगताप कर रहे हैं। भारतीय नौसेना टुकड़ी का नेतृत्व कमांडर व्रत बघेल जबकि भारतीय वायु सेना की टुकड़ी का नेतृत्व स्क्वाड्रन लीडर सिंधु रेड्डी कर रहे हैं। भारतीय वायुसेना के राफेल लड़ाकू विमान भी परेड के दौरान फ्लाई पास्ट में भाग लेंगे।

सेना की टुकड़ी का प्रतिनिधित्व पंजाब रेजिमेंट द्वारा किया जा रहा है जो भारतीय सेना की एक सबसे पुरानी रेजिमेंट है। इस रेजिमेंट के सैनिकों ने दोनों विश्व युद्धों के साथ-साथ स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद आयोजित अनेक ऑपरेशनों में भी भाग लिया है। प्रथम विश्व युद्ध में इन्‍हें 18 युद्धकतथा थियेटर सम्मान प्रदान किए गए थे। इस रेजिमेंट के वीर सैनिकों ने मेसोपोटामिया, गैलीपोली, फिलिस्तीन, मिस्र, चीन, हांगकांग, दमिश्क और फ्रांस में कई लड़ाई लड़ी हैं। फ़्रांस में,इसके सैनिकों ने सितंबर 1915 में न्यूवे चैपल के पास एक आक्रामक हमले में भाग लेकर युद्धक सम्‍मान लूज़‘ और फ़्रांस एंड फ़्लैंडर्सप्राप्‍त किये थे। द्वितीय विश्व युद्ध मेंइन्‍होंने 16 युद्धक सम्मान और 14 थिएटर सम्मान अर्जित किये थे।

इस सैन्‍य टुकड़ी में राजपूताना राइफल्स रेजिमेंट बैंड भी शामिल है। यह रेजिमेंट भारतीय सेना की सबसे वरिष्ठ राइफल रेजिमेंट है। इसकी अधिकांश बटालियनों का एक लंबा और गौरवशाली इतिहास रहा है। इसके सैनिकों ने दुनिया के कई क्षेत्रों में सबसे खूनी लड़ाइयों में भाग लिया है। इस रेजिमेंट के सैनिकों ने दोनों विश्व युद्धों में अनुकरणीय साहस का प्रदर्शन किया है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरानइसरेजिमेंट की बटालियनों ने हर उस क्षेत्र कीलड़ाइयों में भाग लिया, जिनमें भारतीय सेना शामिल रही थी। इस रेजिमेंट नेस्वतंत्रता पूर्व छह विक्टोरिया क्रॉस के हासिल किए थे। इस रेजिमेंट के बैंड की नसीराबाद (राजस्थान) में 1920 में स्थापना हुई थी।

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