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मायके पहुंचीं 7 गावों की आराध्य कालिंका देवी, तीन दिन चलेगा विशेष हवन-पूजन

 

गौचर, 28 अगस्त (गुसाईं)। पालिका क्षेत्र के सात गाँवों की आराध्य देवी कालिंका को गुरुवार को पारंपरिक विधि-विधान के साथ मायके मंदिर लाया गया। इस अवसर पर क्षेत्रवासियों ने मांगल गीतों और पुष्प-अक्षत से अपनी आराध्य का भव्य स्वागत किया।

जानकारी के अनुसार पालिका क्षेत्र के पनाई तल्ली, पनाई मल्ली, रावलनगर तल्ला-मल्ला और बंदरखंड आदि गाँव देवी के मायके पक्ष के माने जाते हैं, जबकि भटनगर गाँव देवी का ससुराल और शैल गाँव के शैली पंडित देवी के गुरु माने जाते हैं। देवी का मूल मंदिर भटनगर गाँव की सीमा पर अलकनंदा नदी के किनारे स्थित है, जबकि मायके पक्ष का मंदिर पनाई सेरे में है।

पुरानी परंपरा, आधुनिक रूप
पूर्व में नंदा अष्टमी पर मायके पक्ष के लोग देवी को मायके मंदिर लाकर अष्टबलि देते थे। लेकिन 70 के दशक में सामाजिक बदलाव के बाद बलि प्रथा समाप्त कर दी गई। अब तीन दिनों तक विशेष हवन-पूजन कर देवी को पकवानों और श्रृंगार सामग्री का भोग लगाकर क्षेत्र की खुशहाली की कामना की जाती है।

गुरुवार को परंपरा के अनुसार रावलनगर के रावल, जिन्हें देवी का भाई माना जाता है, गाजे-बाजे के साथ मूल मंदिर से बहन को अगवाकर मायके मंदिर लाए। मायके सीमा पर पहुंचते ही भक्तों ने देवी का मांगल गीतों और पुष्प वर्षा के साथ स्वागत किया।

भव्य आयोजन में उमड़ा जनसमूह
मायके मंदिर पहुंचने के बाद कर्मकांडी पंडितों द्वारा पूजा-अर्चना की गई। इस अवसर पर मंदिर समिति अध्यक्ष जगदीश कनवासी, व्यापार संघ अध्यक्ष राकेश लिंगवाल, पालिका अध्यक्ष संदीप नेगी, जयकृत बिष्ट, पंडित बंशीधर शैली, नागेंद्र सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

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