गणिनी प्रमुख ज्ञानमती का लोकसभा स्पीकर और टीएमयू चांसलर को मिला मंगल आशीर्वाद

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शरद पूर्णिमा पर दिल्ली में आयोजित आर्यिका, गणिनी प्रमुख  ज्ञानमती माता  के 70वें त्याग दिवस एवम् 88वें जन्मोत्सव में  लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला और तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति  सुरेश जैन को शामिल होने का सौभाग्य मिला।
\बिरला की बतौर मुख्य अतिथि गरिमामयी मौजूदगी रही, तो \ जैन ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। उल्लेखनीय है, देशभर में गणिनी प्रमुख के जन्मोत्सव कार्यक्रम 18 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक चले। शरद पूर्णिमा की मुख्य विनयांजलि सभा का शुभारम्भ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दीप प्रज्जवलन करके किया। पूज्य माता जी का पाद प्रक्षाल का सर्वप्रथम सौभाग्य लोकसभा अध्यक्ष तो फिर टीएमयू के कुलाधिपति को मिला। इससे पूर्व  बिरला ने सर्वप्रथम भगवान भरत को श्रीफल समर्पित करके दर्शन किए। इस अविस्मरणीय अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष  ओम बिरला को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इस सुअवसर पर टीएमयू के कुलाधिपति  सुरेश जैन, पीठाधीश रविन्द्रकीर्ति स्वामी , कार्यक्रम के मुख्य संयोजक  विनय कुमार जैन,  कैलाशचन्द्र सर्राफ,  प्रमोद जैन आदि की उल्लेखनीय मौजूदगी रही। स्वर्णिम व्यक्तित्व की धनी गणिनी प्रमुख  ज्ञानमती माता  के सम्मान में अपने उद्गार प्रकट करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कहा,  माता के जरिए प्राप्त साहित्य एवम् उनकी शिक्षाएं मेरे जीवन में अभूतपूर्व हैं। टीएमयू के कुलाधिपति ने  की मधुर स्मृतियों को वंदन करते हुए कहा, समय-समय पर माता के दिए दिशा-निर्देश पर ही चलकर तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी विकास के पथ पर अग्र्रसर है। उल्लेखनीय है, भगवान महावीर के पश्चात 2600 वर्ष के इतिहास में किसी भी साध्वी ने इतने निपुण साहित्य का सृजन नहीं किया, लेकिन मां सरस्वती के वरदान एवम् दिव्य शक्ति से ओत-प्रोत 22 अक्टूबर, 1934 को शरद पूर्णिमा के दिन टिकैत नगर ग्राम-बाराबंकी (यूपी) में जन्मीं गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माता  ने एक नहीं, दो नहीं बल्कि पांच सौ ग्रंथों का सृजन किया है।

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