2030 तक कुत्तों से होने वाले रेबीज के उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय कार्ययोजना

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नयी दिल्ली , 29  सितम्बर ( PIB Delhi)

विश्व रेबीज दिवस के अवसर पर, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री मनसुख मंडाविया और केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन व डेयरी मंत्री श्री पुरुषोत्तम रूपाला ने नेशनल एक्शन प्लान फॉर डॉग मीडिएटेड रेबीज एलीमिनेशन बाए 2030 (एनएपीआरई) का अनावरण किया। इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री डॉ. भारती प्रवीण पवार और मत्स्यपालन, पशुपालन व डेयरी राज्य मंत्री श्री संजीव कुमार बाल्यान भी उपस्थित रहे।

मंत्रियों ने सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों से रेबीज को एक ध्यान देने योग्य बीमारी बनाने का अनुरोध किया। श्री मनसुख मंडाविया और श्री पुरुषोत्तम रूपाला ने वन हैल्थ दृष्टिकोण के माध्यम से 2030 तक कुत्तों से होने वाली रेबीज के उन्मूलन के लिए एक “संयुक्त अंतर-मंत्रालयी घोषणा समर्थन वक्तव्य” भी लॉन्च किया।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने बीमारी से मानवीय लागत के रूप में पड़ने वाले असर पर भी बात की। एक जानवर के इलाज के दौरान एक प्राणीजन्य बीमारी के संपर्क में आने के अपने अऩुभव को साझा करते हुए, उन्होंने माना कि बीमारी से पीड़ित होने वाले अधिकांश वे लोग हैं, जो अपने जीवन के सबसे उत्पादक वर्षों में हैं। उन्होंने कहा, “रेबीज जैसी जानवरों से होने वाली बीमारियां परिवारों के कमाऊ सदस्य होने की परवाह किए बिना लोगों की जिंदगियां लील लेती हैं।”

पुरुषोत्तम रूपाला ने ग्रामीणों को ग्रामीण जीवन में रेबीज के खतरे के प्रति आगाह किया, जिसे वे अंग्रेजी से इतर ‘हडकवा’ नाम से जानते हैं। उन्होंने कहा, “ग्रामीण इलाकों में ‘हडकवा’ का नाम लेने से ही आतंक मच जाता है। ग्रामीण सक्रिय रूप से सामने आएंगे, जब उन्हें मालूम चलेगा कि रेबीज का नाम ही हडकवा है। वे इस नेक प्रयास में सरकार की सहायता के लिए सक्रिय होंगे।” उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को इस योजना के अंतर्गत होने वाली गतिविधियों को लोकप्रिय बनाने में ज्यादा परिचित शब्द ‘हडकवा’ के उपयोग के लिए तैयार रहने की सलाह दी है।

इतने कम समय में मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के साथ परामर्श में एक कार्ययोजना तैयार करने के लिए राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) को बधाई देते हुए, डॉ. पवार ने कहा, “रेबीज 100 प्रतिशत जानलेवा है, लेकिन वैक्सीन से 100 प्रतिशत बचाव संभव है। दुनिया में रेबीज से होने वाली मौतों में से 33 प्रतिशत भारत में होती हैं।” उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि निपाह, जाइका, एविएन फ्लू जैसी प्राणीजन्य बीमारियों से पार पाने और इनफ्लुएंजा, हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों की निगरानी के व्यापक अनुभव के साथ एनसीडीसी सरकार के समग्र स्वास्थ्य दृष्टिकोण को प्रोत्साहन देने में एक अहम भूमिका निभाएगा।

 

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