नई मॉलिक्यूलर तकनीक पुरानी से बेहतरः डॉ. शर्मा

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टीएमयू के कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल की ओर से रीसेंट इंनोवेशंस एंड इट्स इम्पीमेंटेशन्स इन हेल्थ सेक्टर पर आयोजित गेस्ट लेक्चर

ख़ास बातें

  • आवश्यकता ही आविष्कार की जननीः प्रो. नवनीत
  • सोच में बदलाव से ही रिसर्च की विकास यात्रा संभव
  • अतिथि व्याख्यान में शामिल हुए डेढ़ सौ स्टुडेंट्स

–प्रो. श्याम सुंदर भाटिया

डीएनए लैब्स, देहरादून के हेड एंड सीनियर साइंसिस्ट डॉ. नरोत्तम शर्मा ने कहा, कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौरान स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए नए आविष्कारों ने इतने कम समय में अपनी जगह बना ली है। उन्होंने टीबी होने के कारणों, इसके प्रकार और प्रभाव के बारे में भी विस्तार से चर्चा की। उल्लेखनीय है, तकरीबन दो दशक पहले चिकित्सा जगत में मॉलिक्यूलर डायग्नॉस्टिक्स, मॉलीक्यूलर पैथोलॉजी जैसे शब्दों को कोई नहीं जानता था। वास्तव में चिकित्सा विशेषज्ञ भी इनसे अनजान थे। मॉलिक्यूलर डायग्नॉस्टिक्स का अर्थ प्रयोगशाला में किए गए परीक्षणों से है, जिसमें न्यूक्लिक एसिड (डीएनए या आरएनए) का विश्लेषण करके किसी संक्रमण या बीमारी की स्क्रीनिंग या निदान किया जा सकता है या बीमारी का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है। मॉलिक्यूलर डायग्नॉस्टिक्स (एमडीएक्स) जांच आज के क्लीनिकल परीक्षणों से आगे है।

डॉ. शर्मा ने रोगों के निदान के लिए उपलब्ध तकनीकों के बारे में भी स्टुडेंट्स को जानकारी दी। डॉ. शर्मा ने नयी मॉलिक्यूलर तकनीकों की जरूरतों को बताते हुए यह भी स्ष्पट किया कि ये नई तकनीकें पुरानी तकनीकों से कैसे बेहतर हैं। साथ ही साथ बताया, हम इन तकनीकों को और बेहतर कैसे बना सकते हैं। उन्होंने रियल टाइम पीसीआर और अन्य मॉलिक्यूलर टेस्टिंग तकनीकों के बारे में समझाने के लिए फिल्म ऐरे का उदाहरण देते हुए वाइरोलॉजी के बारे में भी गहनता से बताया, जिसमें विभिन्न प्रकार के वायरस की वजह से होने वाली बीमारियों से भी अवगत कराया।

डॉ. शर्मा तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी में कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज के मेडिकल लैब टेक्निक्स विभाग की ओर से रीसेंट इंनोवेशंस एंड इट्स इम्पीमेंटेशन्स इन हेल्थ सेक्टर पर बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे। संचालन फैकल्टी श्रीमती शिखा पालीवाल ने किया। कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज के मेडिकल के वाइस प्रिंसिपल प्रो. नवनीत कुमार ने कहा, वैश्विक महामारी के दौरान कई तरह की नई खोजों का जन्म हुआ है। आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है। नई सोच से ही हम नई तकनीकों और खोजों का विकास कर सकते हैं। गेस्ट लेक्चर में कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज के एमएलटी विभाग की हेड डॉ. रूचि कांत, फॉरेंसिक विभाग के हेड डॉ. रवि कुमार, ऑपटोमेट्री विभाग के हेड श्री राकेश यादव, श्री हिमांशु यादव, श्री आकाश चौहान, मिस प्रीति लाठर, श्री मनोज डढवाल के अलावा कॉलेज के 150 स्टुडेंट्स भी मौजूद रहे।

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