वैज्ञानिकों ने खोजा नया जीन जो कैंसर और एड्स जैसे रोगों के इलाज में सहायक होगा

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हाल ही में पहचाना गया एक नया गुणसूत्र (जीन) ऐसे कवकीय (फंगल) संक्रमण कैंडिडिआसिस को रोकने की कुंजी बन सकता है जो अक्सर गहन देखभाल इकाई (आईसीयू) के रोगियों, कैंसर रोगियों और प्रतिरक्षा – समझौता प्रणाली की कम सक्रियता वाले (इम्यूनोसएक्सप्रेसिव) रोगियों  का उपचार प्राप्त करने वाले रोगियों को प्रभावित करता है।

सीएसए 6 नामक आनुवंशिक गुणसूत्र (जीन) की पहचान कैंडीडा अल्बिकन्स की  एक कवक (फंगस) प्रजाति में की गई है, जो कुछ प्रतिरक्षा-समझौता स्थितियों जैसे एड्स या कैंसर के उपचार के दौरान रुग्णता और मृत्यु दर की उच्च दर पैदा करने के लिए कुख्यात है। स्वस्थ व्यक्तियों के जठरांत्र (गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल) और मूत्रजननांगी (यूरोजेनिटल) नलिकाओं के श्लेष्मिक  (म्यूकोसल) सतह में रहने वाली कवक प्रजातियां प्रतिरक्षा-समझौता स्थितियों के तहत एक रोगज़नक़ (पैथोजेनिक) अवयव में बदल जाती हैं, जिससे इन्हें आश्रय देने वाली (होस्ट) रक्षा सतह को क्षति के साथ ही रोगी के जीवन के लिए प्रणालीजन्य खतरे वाला संक्रमण भी उत्पन्न हो जाता है ।

भारत में बैंगलुरू (कर्नाटक) स्थित जवाहर लाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र (जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च – जेएनसीएएसआर), के प्रोफेसर कौस्तव सान्याल के समूह और इंस्टिट्यूट पाश्चर, पेरिस, फ्रांस (जेटली ईटी एएल, 2022) में क्रिस्टोफ डी’एनफर्ट के समूह के बीच हाल ही में हुए एक सहयोगी अध्ययन में इन लेखकों ने एक चिकित्सकीय रूप से प्रासंगिक कवक मॉडल प्रणाली सी. एल्बिकैंस में गुणसूत्र स्थिरता के नियामकों की पहचान करने के लिए बड़े पैमाने पर एक स्क्रीन अध्ययन किया ।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एक स्वायत्त संस्थान, जवाहर लाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र (जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च – जेएनसीएएसआर)  के लेखकों ने व्यक्तिगत रूप से जीनोम स्थिरता पर सी. अल्बिकन्स के एक हजार से अधिक अनुवांशिकीय गुणसूत्रों (जीन्स) के प्रभाव की जांच की और छह गुणसूत्र स्थिरता (सीएसए) के एक ऐसे सेट की पहचान करने में सफल रहे) जिसके गुणसूत्र (जीन) जीनोम अखंडता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं। जबकि अध्ययन में पहचाने गए सीएसए गुणसूत्रों  में से पांच को अन्य प्रजातियों में कोशिका विभाजन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, वहीं  सीएसए6 नाम का छठा सीएसए जीन एक प्रोटीन के लिए अनुकूटित (एन्कोडेड है) जो सी.अल्बिकन्स में व्यवहार्यता के लिए आवश्यक है। उन्होंने पाया कि सीएसए6 कोशिका चक्र की प्रगति का एक महत्वपूर्ण नियामक था जिसमें सीएसए6 की अति-अभिव्यक्ति और विलोपन दोनों से ही सी.अल्बिकन्स कोशिकाओं की वृद्धि कम हो जाती है।

नेचर कम्युनिकेशंस पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन मानव कवक रोगज़नक़ सी.अल्बिकन्स में इतनी व्यापक स्क्रीन की पहली रिपोर्ट का प्रतिनिधित्व करता है। यह गुणसूत्र स्थिरता के एक अनूठे नियामक के कार्यों की पहचान करता है और उसे स्पष्ट करता है जो विशेष रूप से चिकित्सकीय रूप से प्रासंगिक मानव कवक रोगजनकों के समूह में मौजूद है। इसके अलावा, यह उन गुणसूत्रों की पहचान करने के लिए एक व्यवस्थित योजना भी प्रदान करता है जिनके उत्पाद मनुष्यों पर कम प्रतिकूल प्रभाव डालकर कवकीय (फंगल संक्रमण) के लिए संभावित चिकित्सीय हस्तक्षेप के रूप में काम कर सकते हैं। इसलिए वे छोटे अणु मॉड्यूलेटर जो सीएसए 6 नामक गुणसूत्र (जीन) की अभिव्यक्ति स्तर को बदलते हैं, मनुष्यों में बिना किसी दुष्प्रभाव के उपचार के संभावित रास्ते प्रदान करते हैं।

कैंडीडा अल्बिकन्स की लम्बी विस्तारित कलिका (बड) कोशिकाओं में विषम (कन्ट्रास्ट) माइटोटिक स्पिंडल संरचनाओं के विपरीत (बाएं) सीएसए6 की अतिअभिव्यक्ति  (ओवरएक्सप्रेशन) और (दाएं) ह्रास (डीप्लीशन)

अधिक जानकारी के लिए प्रो. कौस्तुव सान्याल से संपर्क करें; ईमेल आईडी: sanyal@jncasr.ac.in.

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